{"_id":"69dbfebd8f32fcb004063459","slug":"mri-and-cath-lab-facilities-will-soon-be-available-in-the-district-civil-hospital-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-154260-2026-04-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: जिला नागरिक अस्पताल में जल्द मिलेगी एमआरआई व कैथ लैब की सुविधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: जिला नागरिक अस्पताल में जल्द मिलेगी एमआरआई व कैथ लैब की सुविधा
Mon, 13 Apr 2026 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 13 Apr 2026 01:51 AM IST
विज्ञापन
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल। संवाद
- फोटो : संगठन
यमुनानगर। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में इलाज करवाने आने वाले मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अस्पताल में जल्द ही एमआरआई और कैथ लैब की सुविधा शुरू होने जा रही है। एमआरआई के लिए पीपीपी मोड पर टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही चयनित एजेंसी मशीन स्थापित करेगी। वहीं कैथ लैब के लिए टेंडर प्रक्रिया अभी जारी है। इन दोनों सुविधाओं के शुरू होने से मरीजों को दूसरे जिलों या बड़े चिकित्सा केंद्रों में जाने की मजबूरी से निजात मिलेगी।
करीब 200 बेड वाले इस जिला नागरिक अस्पताल में अभी तक एमआरआई और कैथ लैब जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। यहां रोजाना 2200 से 2500 मरीजों की आउटडोर व इंडोर ओपीडी होती है। इसके चलते गंभीर मरीजों को अक्सर रेफर करना पड़ता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को पहले जिला अस्पताल और फिर वहां से आगे बड़े अस्पतालों में भेजा जाता है। संसाधनों की कमी के कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
हड्डी या सिर में चोट लगने के मामलों में सटीक जांच के लिए एमआरआई जरूरी होती है। लेकिन अस्पताल में यह सुविधा न होने के कारण मरीजों को निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है, जहां जांच काफी महंगी होती है। हालांकि अस्पताल में पीपीपी मोड पर सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध है, जिससे शुरुआती जांच की जा सकती है, लेकिन गंभीर मामलों में एमआरआई की आवश्यकता पड़ती है। इसी तरह हृदय रोग से जुड़े मरीजों के लिए कैथ लैब की सुविधा भी बेहद जरूरी है। कैथ लैब में कार्डियक कैथीटेराइजेशन के जरिए हृदय की बीमारियों का निदान और उपचार किया जाता है। इसके अभाव में मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है। एमआरआई तकनीक के माध्यम से मस्तिष्क संबंधी बीमारियां जैसे स्ट्रोक, एन्यूरिज्म, आंखों और आंतरिक कान की समस्याएं, कैंसर, मल्टीपल स्केलेरोसिस और रीढ़ की हड्डी की चोटों का पता लगाया जाता है। ऐसे में यह सुविधा शुरू होने से मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। खासकर सिर की गंभीर चोटों के इलाज के लिए विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। सड़क दुर्घटनाओं या अन्य हादसों में घायल मरीजों को तुरंत पीजीआई जैसे बड़े संस्थानों में रेफर करना पड़ता है। कई बार परिजन निजी अस्पतालों का रुख करते हैं, जहां इलाज का खर्च काफी अधिक होता है।
विज्ञापन
एमआरआई के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और जल्द ही अस्पताल में यह सुविधा शुरू हो जाएगी। पीपीपी मोड में उपलब्ध होगी। विभाग की ओर से निर्धारित नियमों को पूरा करते हुए जल्द ही एजेंसी अस्पताल में अपनी मशीन इंस्टॉल करेगी। - डॉ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर।
विज्ञापन
करीब 200 बेड वाले इस जिला नागरिक अस्पताल में अभी तक एमआरआई और कैथ लैब जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। यहां रोजाना 2200 से 2500 मरीजों की आउटडोर व इंडोर ओपीडी होती है। इसके चलते गंभीर मरीजों को अक्सर रेफर करना पड़ता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को पहले जिला अस्पताल और फिर वहां से आगे बड़े अस्पतालों में भेजा जाता है। संसाधनों की कमी के कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
हड्डी या सिर में चोट लगने के मामलों में सटीक जांच के लिए एमआरआई जरूरी होती है। लेकिन अस्पताल में यह सुविधा न होने के कारण मरीजों को निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है, जहां जांच काफी महंगी होती है। हालांकि अस्पताल में पीपीपी मोड पर सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध है, जिससे शुरुआती जांच की जा सकती है, लेकिन गंभीर मामलों में एमआरआई की आवश्यकता पड़ती है। इसी तरह हृदय रोग से जुड़े मरीजों के लिए कैथ लैब की सुविधा भी बेहद जरूरी है। कैथ लैब में कार्डियक कैथीटेराइजेशन के जरिए हृदय की बीमारियों का निदान और उपचार किया जाता है। इसके अभाव में मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है। एमआरआई तकनीक के माध्यम से मस्तिष्क संबंधी बीमारियां जैसे स्ट्रोक, एन्यूरिज्म, आंखों और आंतरिक कान की समस्याएं, कैंसर, मल्टीपल स्केलेरोसिस और रीढ़ की हड्डी की चोटों का पता लगाया जाता है। ऐसे में यह सुविधा शुरू होने से मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। खासकर सिर की गंभीर चोटों के इलाज के लिए विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। सड़क दुर्घटनाओं या अन्य हादसों में घायल मरीजों को तुरंत पीजीआई जैसे बड़े संस्थानों में रेफर करना पड़ता है। कई बार परिजन निजी अस्पतालों का रुख करते हैं, जहां इलाज का खर्च काफी अधिक होता है।
विज्ञापन
एमआरआई के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और जल्द ही अस्पताल में यह सुविधा शुरू हो जाएगी। पीपीपी मोड में उपलब्ध होगी। विभाग की ओर से निर्धारित नियमों को पूरा करते हुए जल्द ही एजेंसी अस्पताल में अपनी मशीन इंस्टॉल करेगी। - डॉ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर।

मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल। संवाद- फोटो : संगठन