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Yamuna Nagar News: हाथी पर सवार होकर आएंगी मां भगवती
Sun, 11 Oct 2026 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 11 Oct 2026 12:55 AM IST
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देवी भवन मंदिर में सजी माता की मूर्ति। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शक्ति उपासना का प्रमुख पर्व शारदीय नवरात्र रविवार शुरू हो गए। नौ दिनों तक श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिरों और घरों में घट स्थापना, अखंड ज्योत, दुर्गा सप्तशती पाठ, भजन-कीर्तन और हवन सहित धार्मिक अनुष्ठान होंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस बार मां भगवती का आगमन हाथी पर माना जा रहा है।
प्राचीन सूरजकुंड मंदिर अमादलपुर के आचार्य त्रिलोक महाराज ने बताया कि पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। रविवार को सुबह 8:05 से 9:31 बजे तक चंचल वेला और सुबह 9:31 से दोपहर 12:24 बजे तक लाभ-अमृत वेला में पूजा-अर्चना और घट स्थापना की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि दोपहर 12:01 से 1:47 बजे तक अभिजित वेला भी शुभ है। श्रद्धालु अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि कर सकते हैं। घट स्थापना के लिए श्रद्धालु सुबह स्नान कर पूजा स्थल को स्वच्छ करें। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और विधि-विधान से कलश स्थापित करें। दीप प्रज्वलित कर मां की आरती करें।
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यमुनानगर। शक्ति उपासना का प्रमुख पर्व शारदीय नवरात्र रविवार शुरू हो गए। नौ दिनों तक श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिरों और घरों में घट स्थापना, अखंड ज्योत, दुर्गा सप्तशती पाठ, भजन-कीर्तन और हवन सहित धार्मिक अनुष्ठान होंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस बार मां भगवती का आगमन हाथी पर माना जा रहा है।
प्राचीन सूरजकुंड मंदिर अमादलपुर के आचार्य त्रिलोक महाराज ने बताया कि पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। रविवार को सुबह 8:05 से 9:31 बजे तक चंचल वेला और सुबह 9:31 से दोपहर 12:24 बजे तक लाभ-अमृत वेला में पूजा-अर्चना और घट स्थापना की जा सकती है।
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उन्होंने बताया कि दोपहर 12:01 से 1:47 बजे तक अभिजित वेला भी शुभ है। श्रद्धालु अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि कर सकते हैं। घट स्थापना के लिए श्रद्धालु सुबह स्नान कर पूजा स्थल को स्वच्छ करें। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और विधि-विधान से कलश स्थापित करें। दीप प्रज्वलित कर मां की आरती करें।
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