{"_id":"69a33abac649c9100709076c","slug":"migrant-workers-are-returning-home-the-pottery-and-plywood-industries-are-slowing-down-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-152141-2026-03-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: घर जा रहे प्रवासी मजदूर, बर्तन और प्लाईवुड उद्योग की रफ्तार थमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: घर जा रहे प्रवासी मजदूर, बर्तन और प्लाईवुड उद्योग की रफ्तार थमी
Sun, 01 Mar 2026 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 01 Mar 2026 12:28 AM IST
विज्ञापन
जगाधरी के बर्तन कारखाने में बर्तन तैयार करता कारीगर। आर्काइव
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। होली पर्व नजदीक आते ही जगाधरी की बर्तन नगरी और यमुनानगर के प्लाईवुड उद्योग से जुड़े हजारों मजदूर अपने-अपने घर लौटने लगे हैं। फैक्ट्रियों से करीब 40 प्रतिशत श्रमिकों के घर जाने से दोनों प्रमुख उद्योगों की उत्पादन रफ्तार धीमी पड़ गई है। ऐसे में ऑर्डर समय पर पूरे करना अब चुनौती बनता जा रहा है।
प्लाईवुड उद्योग की जहां 1400 करोड़ रुपये की टर्नओवर है, वहीं बर्तन नगरी की सालाना 1500 करोड़ रुपये की टर्नओवर है। वहीं अब ये दोनों उद्योग वर्तमान में मंदी के दौर से पहले गुजर रहे हैं। ऐसे में लेबर के चले जाने से कारोबार पर असर पड़ा स्वाभाविक है। जगाधरी की बर्तन नगरी में करीब एक हजार छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां संचालित हैं। इनमें लगभग दो लाख प्रवासी श्रमिक वर्षों से कार्यरत हैं।
उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से आए ये मजदूर यहीं रहकर अपने परिवारों का पालन-पोषण करते हैं। होली के चलते बड़ी संख्या में श्रमिक छुट्टी लेकर घर चले गए हैं। वहीं, दी जगाधरी मेटल मैन्युफैक्चरर्स एंड सप्लायर्स एसोसिएशन के महासचिव सुंदर लाल का कहना है कि होली के पर्व में लेबर काफी कम हो चुकी है। नया माल तैयार नहीं हो पा रहा है।
विज्ञापन
कच्चे माल के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत काफी बढ़ चुकी है। करीब 40 प्रतिशत लेबर के चले जाने से उत्पादन क्षमता में सीधा असर पड़ा है। यमुनानगर का प्लाईवुड उद्योग देशभर में अपनी पहचान रखता है। यहां लगभग 250 प्लाईवुड फैक्ट्रियां संचालित हैं, जिनमें करीब 50 हजार प्रवासी श्रमिक कार्य करते हैं।
त्योहार के कारण यहां से भी बड़ी संख्या में मजदूर अपने गांवों को रवाना हो चुके हैं। दोनों उद्योगों की मजबूती में प्रवासी श्रमिकों की अहम भूमिका रही है। ये श्रमिक वर्षों से यहां रहकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। किराये के मकानों, बाजार और परिवहन क्षेत्र को भी इनकी वजह से रोजगार मिलता है।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि त्योहार के समय यह स्थिति हर साल बनती है, लेकिन इस बार श्रमिकों की संख्या अधिक होने से असर भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। फिलहाल होली के बाद कामकाज सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।
उत्पादन 30 से 35 प्रतिशत तक गिरा : बिहानी
प्लाईवुड फैक्ट्री एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष जेके बिहानी का कहना है कि मशीनें पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहीं, जिससे उत्पादन में 30 से 35 प्रतिशत तक गिरावट आई है। कई इकाइयों में कच्चा माल स्टॉक में होने के बावजूद श्रमिकों की कमी से काम धीमा है।
विज्ञापन
यमुनानगर। होली पर्व नजदीक आते ही जगाधरी की बर्तन नगरी और यमुनानगर के प्लाईवुड उद्योग से जुड़े हजारों मजदूर अपने-अपने घर लौटने लगे हैं। फैक्ट्रियों से करीब 40 प्रतिशत श्रमिकों के घर जाने से दोनों प्रमुख उद्योगों की उत्पादन रफ्तार धीमी पड़ गई है। ऐसे में ऑर्डर समय पर पूरे करना अब चुनौती बनता जा रहा है।
प्लाईवुड उद्योग की जहां 1400 करोड़ रुपये की टर्नओवर है, वहीं बर्तन नगरी की सालाना 1500 करोड़ रुपये की टर्नओवर है। वहीं अब ये दोनों उद्योग वर्तमान में मंदी के दौर से पहले गुजर रहे हैं। ऐसे में लेबर के चले जाने से कारोबार पर असर पड़ा स्वाभाविक है। जगाधरी की बर्तन नगरी में करीब एक हजार छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां संचालित हैं। इनमें लगभग दो लाख प्रवासी श्रमिक वर्षों से कार्यरत हैं।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से आए ये मजदूर यहीं रहकर अपने परिवारों का पालन-पोषण करते हैं। होली के चलते बड़ी संख्या में श्रमिक छुट्टी लेकर घर चले गए हैं। वहीं, दी जगाधरी मेटल मैन्युफैक्चरर्स एंड सप्लायर्स एसोसिएशन के महासचिव सुंदर लाल का कहना है कि होली के पर्व में लेबर काफी कम हो चुकी है। नया माल तैयार नहीं हो पा रहा है।
विज्ञापन
कच्चे माल के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत काफी बढ़ चुकी है। करीब 40 प्रतिशत लेबर के चले जाने से उत्पादन क्षमता में सीधा असर पड़ा है। यमुनानगर का प्लाईवुड उद्योग देशभर में अपनी पहचान रखता है। यहां लगभग 250 प्लाईवुड फैक्ट्रियां संचालित हैं, जिनमें करीब 50 हजार प्रवासी श्रमिक कार्य करते हैं।
त्योहार के कारण यहां से भी बड़ी संख्या में मजदूर अपने गांवों को रवाना हो चुके हैं। दोनों उद्योगों की मजबूती में प्रवासी श्रमिकों की अहम भूमिका रही है। ये श्रमिक वर्षों से यहां रहकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। किराये के मकानों, बाजार और परिवहन क्षेत्र को भी इनकी वजह से रोजगार मिलता है।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि त्योहार के समय यह स्थिति हर साल बनती है, लेकिन इस बार श्रमिकों की संख्या अधिक होने से असर भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। फिलहाल होली के बाद कामकाज सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।
उत्पादन 30 से 35 प्रतिशत तक गिरा : बिहानी
प्लाईवुड फैक्ट्री एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष जेके बिहानी का कहना है कि मशीनें पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहीं, जिससे उत्पादन में 30 से 35 प्रतिशत तक गिरावट आई है। कई इकाइयों में कच्चा माल स्टॉक में होने के बावजूद श्रमिकों की कमी से काम धीमा है।