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योग निद्रा से जागे भगवान विष्णु, डेढ़ माह में विवाह के 14 शुभ मुहूर्त
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। चार महीने की योग निद्रा के बाद एकादशी पर भगत पालक भगवान विष्णु जाग गए हैं। भगवान विष्णु के जागने के साथ ही मंगल कार्यों पर लगा अंकुश भी समाप्त हो गया है। इसके बाद विवाह, नाम संस्कार, वैदिक कर्म सहित अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकेंगे।
आषाढ़ माह से कार्तिक माह की दशमी तक करीब चार माह भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। एकादशी के दिन वे जागते हैं। इसलिए इसे देवउठनी एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और मां तुलसी का विवाह होता है। इसी के साथ ही चार माह से बंद पड़े मांगलिक कार्य होने भी शुरू हो जाते हैं। गांव हरियाबांस निवासी पंडित महेश शांडिल्य ने बताया कि हिंदू पंचांग में हर माह दो एकादशी आती हैं। सभी एकादशियों का विशेष महत्व होता है।
एकादशी पर की गई देव पूजन परम लोक को प्राप्त करवाती है। जबकि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी सबसे बड़ी होती है। यह मोक्ष प्राप्ति व परम धाम पहुंचाने वाली होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करना, मां तुलसी व भगवान शालिग्राम का विवाह करवाना बेहद शुभ माना जाता है। पंडित महेश ने बताया कि इस दौरान शास्त्रों में इस एकादशी का सर्वाधिक महत्व बताया गया है। इस एकादशी के व्रत को करने का तो अपना महत्व है ही, इस दिन सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए कई तरह के उपाय भी किए जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु अपनी शैया से जागते ही भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए आतुर रहते हैं।
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अब शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य
ज्योतिषाचार्य बुडिया निवासी पंडित ललित शर्मा ने बताया कि वृश्चिक राशि में सूर्य का प्रवेश होने के साथ ही विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन व यज्ञोपवीत संस्कार व अनेक मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि देवउठनी के बाद मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे। एकादशी रविवार व सोमवार को रहेगा। सोमवार सुबह साढ़े सात बजे के बाद द्वादशी शुरू हो जाएगी। भगवान विष्णु के जागने के बाद विवाह स्थलों में शहनाइयों की गूंज और रौनक छाएगी। देवउठनी एकादशी को ही तुलसी शालीग्राम का विवाह होगा। उन्होंने बताया कि 16 नवंबर से मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे, जो 16 दिसंबर तक चलते रहेंगे।
16 दिसंबर से एक माह रहेगा मलमास
पंडित ललित शर्मा के अनुसार हिंदू धर्म में तुलसी विवाह के होते ही विवाह संस्कार शुरू हो जाते हैं। नवंबर व दिसंबर माह में शादी विवाह के कुल 14 मुहूर्त होंगे। नवंबर में विवाह के आठ व दिसंबर में छह मुहूर्त हैं। नवंबर में 19, 20, 21, 22, 26, 27, 28 व 30 को विवाह का शुभ मुहूर्त है। जबकि दिसंबर में 5, 6, 7, 11, 12 व 13 को शहनाइयां बजेंगी। उन्होंने बताया कि इसके बाद 16 दिसंबर से मलमास लग जाएगा। मलमास में ऐसे कार्य वर्जित होते हैं। मलमास लगने से एक माह तक विवाह संस्कार नहीं होंगे। इसके बाद पुन: 14 जनवरी मकर संक्राति पर रात 8:34 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश जाएंगे। इसके साथ ही मलमास समाप्त हो जाएगा। इसके बाद विवाह बहुत सारे मुहूर्त हैं।
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यमुनानगर। चार महीने की योग निद्रा के बाद एकादशी पर भगत पालक भगवान विष्णु जाग गए हैं। भगवान विष्णु के जागने के साथ ही मंगल कार्यों पर लगा अंकुश भी समाप्त हो गया है। इसके बाद विवाह, नाम संस्कार, वैदिक कर्म सहित अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकेंगे।
आषाढ़ माह से कार्तिक माह की दशमी तक करीब चार माह भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। एकादशी के दिन वे जागते हैं। इसलिए इसे देवउठनी एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और मां तुलसी का विवाह होता है। इसी के साथ ही चार माह से बंद पड़े मांगलिक कार्य होने भी शुरू हो जाते हैं। गांव हरियाबांस निवासी पंडित महेश शांडिल्य ने बताया कि हिंदू पंचांग में हर माह दो एकादशी आती हैं। सभी एकादशियों का विशेष महत्व होता है।
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एकादशी पर की गई देव पूजन परम लोक को प्राप्त करवाती है। जबकि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी सबसे बड़ी होती है। यह मोक्ष प्राप्ति व परम धाम पहुंचाने वाली होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करना, मां तुलसी व भगवान शालिग्राम का विवाह करवाना बेहद शुभ माना जाता है। पंडित महेश ने बताया कि इस दौरान शास्त्रों में इस एकादशी का सर्वाधिक महत्व बताया गया है। इस एकादशी के व्रत को करने का तो अपना महत्व है ही, इस दिन सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए कई तरह के उपाय भी किए जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु अपनी शैया से जागते ही भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए आतुर रहते हैं।
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अब शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य
ज्योतिषाचार्य बुडिया निवासी पंडित ललित शर्मा ने बताया कि वृश्चिक राशि में सूर्य का प्रवेश होने के साथ ही विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन व यज्ञोपवीत संस्कार व अनेक मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि देवउठनी के बाद मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे। एकादशी रविवार व सोमवार को रहेगा। सोमवार सुबह साढ़े सात बजे के बाद द्वादशी शुरू हो जाएगी। भगवान विष्णु के जागने के बाद विवाह स्थलों में शहनाइयों की गूंज और रौनक छाएगी। देवउठनी एकादशी को ही तुलसी शालीग्राम का विवाह होगा। उन्होंने बताया कि 16 नवंबर से मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे, जो 16 दिसंबर तक चलते रहेंगे।
16 दिसंबर से एक माह रहेगा मलमास
पंडित ललित शर्मा के अनुसार हिंदू धर्म में तुलसी विवाह के होते ही विवाह संस्कार शुरू हो जाते हैं। नवंबर व दिसंबर माह में शादी विवाह के कुल 14 मुहूर्त होंगे। नवंबर में विवाह के आठ व दिसंबर में छह मुहूर्त हैं। नवंबर में 19, 20, 21, 22, 26, 27, 28 व 30 को विवाह का शुभ मुहूर्त है। जबकि दिसंबर में 5, 6, 7, 11, 12 व 13 को शहनाइयां बजेंगी। उन्होंने बताया कि इसके बाद 16 दिसंबर से मलमास लग जाएगा। मलमास में ऐसे कार्य वर्जित होते हैं। मलमास लगने से एक माह तक विवाह संस्कार नहीं होंगे। इसके बाद पुन: 14 जनवरी मकर संक्राति पर रात 8:34 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश जाएंगे। इसके साथ ही मलमास समाप्त हो जाएगा। इसके बाद विवाह बहुत सारे मुहूर्त हैं।