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जान जोखिम में डाल यमुना में सिक्कों की तलाश
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थर्माकोल की नाव बनाकर यमुना में सिक्कों को तलाशता युवक। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। छठ पूूजा के दौरान श्रद्धालुओं की ओर से पश्चिमी यमुना नहर में फेंके गए सिक्कों को अब युवक तलाशने में जुट गए। युवक थर्माकोल की नाव बनाकर सिक्कों को तलाश रहे है। सिक्कों यह तलाश उनके जीवन पर भी भारी पड़ सकती है।
ऐसा ही नजारा पीडब्ल्यूडी के पीछे से गुजर रहे नहर में देखने को मिला। यहां कुछ युवकों की टोली दिखाई दी। कुछ युवक कपड़ों को किनारों पर उतार किनारों पर ही सिक्कों को टटोल रहे थे, तो कुछ थर्माकोल की नाव बनाने के बाद चप्पलों से पानी को पीछे धकेल आगे की तरफ चल रहे थे। जबकि निगम की तरफ से किनारों पर चेतावनी बोर्ड भी लगा हुआ है। मगर इन युवकों के लिए यह चेतावनी कोई मायने रखती है।
उल्लेखनीय है कि पश्चिमी यमुना नहर के घाटों पर छठ पूजा का आयोजन किया गया था। दो दिवसीय पूजा में हजारों श्रद्धालु जुटे थे। नहर के किनारे पर पूजा करते समय बहुत से लोग यमुना में सिक्के डाल देते हैं। इन्हीं सिक्कों की तलाश में फिर युवक जान जोखिम में डाल नहर के पानी में उतर जाते हैं। यह प्रक्रिया कई दिनों तक चलती है। दूसरे युवक भी सिक्कों को ढूंढने के लिए वहां पहुंच जाते हैं। कई बार इनकी संख्या काफी हो जाती है। ऐसे में युवकों को इस तरह नहर में देखकर वहां से गुजर रहे लोग भी इक्ट्ठा हो जाते हैं।
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यमुनानगर। छठ पूूजा के दौरान श्रद्धालुओं की ओर से पश्चिमी यमुना नहर में फेंके गए सिक्कों को अब युवक तलाशने में जुट गए। युवक थर्माकोल की नाव बनाकर सिक्कों को तलाश रहे है। सिक्कों यह तलाश उनके जीवन पर भी भारी पड़ सकती है।
ऐसा ही नजारा पीडब्ल्यूडी के पीछे से गुजर रहे नहर में देखने को मिला। यहां कुछ युवकों की टोली दिखाई दी। कुछ युवक कपड़ों को किनारों पर उतार किनारों पर ही सिक्कों को टटोल रहे थे, तो कुछ थर्माकोल की नाव बनाने के बाद चप्पलों से पानी को पीछे धकेल आगे की तरफ चल रहे थे। जबकि निगम की तरफ से किनारों पर चेतावनी बोर्ड भी लगा हुआ है। मगर इन युवकों के लिए यह चेतावनी कोई मायने रखती है।
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उल्लेखनीय है कि पश्चिमी यमुना नहर के घाटों पर छठ पूजा का आयोजन किया गया था। दो दिवसीय पूजा में हजारों श्रद्धालु जुटे थे। नहर के किनारे पर पूजा करते समय बहुत से लोग यमुना में सिक्के डाल देते हैं। इन्हीं सिक्कों की तलाश में फिर युवक जान जोखिम में डाल नहर के पानी में उतर जाते हैं। यह प्रक्रिया कई दिनों तक चलती है। दूसरे युवक भी सिक्कों को ढूंढने के लिए वहां पहुंच जाते हैं। कई बार इनकी संख्या काफी हो जाती है। ऐसे में युवकों को इस तरह नहर में देखकर वहां से गुजर रहे लोग भी इक्ट्ठा हो जाते हैं।
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