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करोड़ों का कर्ज लेकर दिवालिया घोषित कर देते धनवान व्यवसायी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 12 Apr 2016 11:34 PM IST
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यमुनानगर। जगाधरी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज में शोध एवं परामर्श प्रकोष्ठ के तत्वावधान में बैंकों में एनपीए से संबंधित वित्तीय प्रावधान विषय पर संगोष्ठी कराई गई। इसका उद्घाटन कॉलेज प्राचार्य डॉ. पीके बाजपेयी ने किया। डॉ. बाजपेयी ने गुणवत्ता आधारित शोध कार्य को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए अच्छे शोध पत्रों व सरकार द्वारा देय अनुदानों के बल पर शोध कार्यों को पूरा करने पर जोर दिया।
बैंकों में एनपीए को लेकर संगोष्ठी में तीन प्राध्यापकों डॉ. सीमा गुप्ता (वाणिज्य विभागाध्यक्ष), प्रो. अनिल कुमार व मैडम राखी ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। डॉ. सीमा गुप्ता ने बताया कि एक ओर धनवान व्यवसायी करोड़ों का कर्ज बैंकों से ले लेते हैं और फिर वह अपने आपको दिवालिया घोषित कर देते हैं। विजय माल्या तो केवल एक उदाहरण हैं, न जाने ऐसे कितने व्यावसायी हैं, जिन्होंने बैंकों से काफी कर्ज ले रखा है और उस धन को वापस नहीं कर रहे हैं।
प्रो. अनिल कुमार व मैडम राखी ने भी इस विषय पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि सुपररिच व्यावसायी ही धोखाधड़ी कर रहे हैं। इससे आम जानता के धन का दुरुपयोग हो रहा हैं। डॉ. एमएल सिंगला ने कहा कि जो एजेंसियां कर्ज लेने और देने से पूर्व व्यवसायी की सम्पतियों का मूल्यांकन होता हैं, वही गलत और ज्यादा संपति आंक कर किया जाता है, जो भ्रष्ट तरीका है। यहीं से धोखाधड़ी शुरू हो जाती है।
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डॉ. अनिता ने कहा कि बड़ी मछलियां मौज कर रही हैं और आमजन भूख और गरीबी में दबा जा रहा है। गलत नीतियों और ढुलमुल कानूनी दांवपेंच से सुपर रिच पर आ जाते हैं, जबकि गरीब कराहता रहता है। प्रो. दीपक कक्कड़ ने कहा कि आरबीआई द्वारा एनपीए को लेकर पुन: समीक्षा की जाए और उपयोगी नियम बनाए जाएं।
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बैंकों में एनपीए को लेकर संगोष्ठी में तीन प्राध्यापकों डॉ. सीमा गुप्ता (वाणिज्य विभागाध्यक्ष), प्रो. अनिल कुमार व मैडम राखी ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। डॉ. सीमा गुप्ता ने बताया कि एक ओर धनवान व्यवसायी करोड़ों का कर्ज बैंकों से ले लेते हैं और फिर वह अपने आपको दिवालिया घोषित कर देते हैं। विजय माल्या तो केवल एक उदाहरण हैं, न जाने ऐसे कितने व्यावसायी हैं, जिन्होंने बैंकों से काफी कर्ज ले रखा है और उस धन को वापस नहीं कर रहे हैं।
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प्रो. अनिल कुमार व मैडम राखी ने भी इस विषय पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि सुपररिच व्यावसायी ही धोखाधड़ी कर रहे हैं। इससे आम जानता के धन का दुरुपयोग हो रहा हैं। डॉ. एमएल सिंगला ने कहा कि जो एजेंसियां कर्ज लेने और देने से पूर्व व्यवसायी की सम्पतियों का मूल्यांकन होता हैं, वही गलत और ज्यादा संपति आंक कर किया जाता है, जो भ्रष्ट तरीका है। यहीं से धोखाधड़ी शुरू हो जाती है।
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डॉ. अनिता ने कहा कि बड़ी मछलियां मौज कर रही हैं और आमजन भूख और गरीबी में दबा जा रहा है। गलत नीतियों और ढुलमुल कानूनी दांवपेंच से सुपर रिच पर आ जाते हैं, जबकि गरीब कराहता रहता है। प्रो. दीपक कक्कड़ ने कहा कि आरबीआई द्वारा एनपीए को लेकर पुन: समीक्षा की जाए और उपयोगी नियम बनाए जाएं।