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हरेवा के बलदेव हत्याकांड के नौ दोषियों को उम्रकैद
अमर उजाला ब्यूरो/यमुनानगर
Updated Thu, 05 Nov 2015 11:58 PM IST
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पुरानी रंजिश के चलते गांव हरेवा निवासी बलदेव की गोली मारकर हत्या करने के नौ दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायधीश रितु गर्ग ने उम्रकैद तथा एक लाख 71 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। सबूतों के अभाव में कोर्ट ने 18 लोगों को बरी किया है। उपरोक्त हमले में मृतक बलदेव सिंह का भतीजा मनप्रीत, व यादविंद्र तथा परमजीत (मृतक का भाई) गंभीर रूप से घायल हो गए थे। कोर्ट में करीब चार साल चली सुनवाई के दौरान करीब 30 से अधिक लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने गांव जयधर निवासी अरुण, गांव हरेवा निवासी धर्मबीर, रणबीर, सुदेश, गांव खरिंडवा थाना शाहबाद निवासी प्रदीप, गांव अलहार थाना जठलाना निवासी नागेश को धारा 302 के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद तथा 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जबकि 148/149 में तीन साल कैद, 452 में सात साल कैद तथा दो-दो हजार रुपये जुर्माना, 323 में एक साल कैद, 307 में सात साल कैद तथा पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना, 506 में दो साल कैद तथा आर्म्स एक्ट में तीन साल कैद तथा दो-दो हजार रुपये जुर्माना किया है। वहीं, गांव लेदा खास निवासी अशोक कुमार, गांव हरेवा निवासी राजेंद्र उर्फ मंगा तथा गांव जयधरी निवासी महाबीर को 302 के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद तथा 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जबकि 148/149 में तीन साल कैद, 452 में सात साल कैद तथा दो-दो हजार रुपये जुर्माना, 323 में एक साल कैद, 307 में सात साल कैद तथा पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना, 506 में दो साल कैद की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। उपरोक्त सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
बाक्स-
घर में घुसकर बरसाईं थी गोलियां-
20 सितंबर 2011 को गांव हरेवा निवासी बलदेव सिंह अपने भतीजे मनप्रीत सिंह के साथ घर के पास खड़े अपने ट्रक की रिपेयर करवा रहे थे। तभी पड़ोस में रहने वाला धर्मबीर अपने 15-20 साथियों के साथ दो कार, एक जीप व मोटरसाइकिलों पर सवार होकर वहां आया। सभी के हाथों में पिस्तौलें तथा बंदूकें थी। धर्मबीर ने आते ही बलदेव सिंह पर गोलियां चला दी। जो कि बलदेव सिंह के सिर में लगी। इसके बाद सभी हमलावर घर में घुस गए और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस गोलीबारी में बलदेव सिंह के भाई परमजीत के गले, यादविंद्र (बलदेव सिंह का भतीजा) की आंख के पास तथा मनप्रीत के हाथ में गोली लगी। हमलावरों ने 50 राउंड से अधिक गोलियां चलाई। जब घायलों को गाड़ियों में डालकर अस्पताल लाया जा रहा था, तब भी उनके वाहनों पर गोलियां बरसाईं गई। अस्पताल में चिकित्सकों ने बलदेव सिंह को मृत घोषित कर दिया। जबकि यादविंदर को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। पुलिस ने मृतक बलदेव सिंह के भतीजे मनप्रीत सिंह की शिकायत पर गांव जयधर निवासी अरुण कुमार, गांव हरेवा निवासी सुदेश कुमार, रनबीर, धर्मबीर, राजेंद्र कुमार, गांव खरिंडवा निवासी प्रदीप कुमार, लेदाखास निवासी अशोक कुमार, अलहार निवासी नागेश, जयधरी निवासी महाबीर सहित अन्य 20 लोगों के खिलाफ धारा 148/149, 452, 307, 302, 506 तथा आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। कोर्ट में करीब चार साल चली सुनवाई के दौरान 30 से अधिक लोगों की गवाही हुई। 31 अक्टूबर को फास्ट ट्रैक की न्यायधीश रितु गर्ग ने गांव जयधर निवासी अरुण कुमार, गांव हरेवा निवासी सुदेश कुमार, रनबीर, धर्मबीर, राजेंद्र कुमार, गांव खरिंडवा निवासी प्रदीप कुमार, लेदाखास निवासी अशोक कुमार, अलहार निवासी नागेश, जयधरी निवासी महाबीर को गांव हरेवा निवासी बलदेव सिंह की हत्या करने का दोषी करार दिया। जबकि 18 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। इस मामले में नामजद दो आरोपियों का केस जुवेनाइल कोर्ट में विचाराधीन है।
बाक्स-
सोनू व हरदेव गैंगवार के चलते गई थी बलदेव सिंह की जान-
20 सितंबर 2011 को हरेवा गांव में हुआ हत्याकांड सोनू डागर व हरदेव सिंह गुट के बीच चली आ रही गैंगवार का नतीजा था। हरदेव व उसके साथी शिवकुमार की वर्ष 2008 में दशहरे के अगले दिन जगाधरी खेड़ा मंदिर के पास पीट कर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में सोनू डागर सहित 11 को नामजद किया गया। सूत्रों के मुताबिक सोनू डागर व हरदेव पहले मिलकर अवैध कब्जों का काम करते थे। किसी बात को लेकर उनमें दुश्मनी हो गई। हरदेव की मौत के बाद इस गुट की कमान हरेवा के कर्मबीर उर्फ कम्मा ने संभाल ली।
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2009 में सोनू डागर गुट के विक्रम उर्फ भूरा पर जगाधरी में गोली चलाई गई, लेकिन वह बच गया। 2010 में कर्मवीर को कार सवार पांच युवकों ने छछरौली की हरियाली के समीप गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया। कम्मा मर्डर केस में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बाद में पुलिस ने इस मामले में सोनू डागर व हरेवा निवासी बलदेव सिंह के बेटे हरप्रीत का नाम भी शामिल कर लिया। इस हत्याकांड में बलदेव सिंह के बेटे का नाम आने के उपरांत इन दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी शुरू हो गई। इसी दुश्मनी के चलते कर्मबीर के भाई धर्मबीर ने बलदेव सिंह की हत्याकांड को अंजाम दिया।
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घर में घुसकर बरसाईं थी गोलियां-
20 सितंबर 2011 को गांव हरेवा निवासी बलदेव सिंह अपने भतीजे मनप्रीत सिंह के साथ घर के पास खड़े अपने ट्रक की रिपेयर करवा रहे थे। तभी पड़ोस में रहने वाला धर्मबीर अपने 15-20 साथियों के साथ दो कार, एक जीप व मोटरसाइकिलों पर सवार होकर वहां आया। सभी के हाथों में पिस्तौलें तथा बंदूकें थी। धर्मबीर ने आते ही बलदेव सिंह पर गोलियां चला दी। जो कि बलदेव सिंह के सिर में लगी। इसके बाद सभी हमलावर घर में घुस गए और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस गोलीबारी में बलदेव सिंह के भाई परमजीत के गले, यादविंद्र (बलदेव सिंह का भतीजा) की आंख के पास तथा मनप्रीत के हाथ में गोली लगी। हमलावरों ने 50 राउंड से अधिक गोलियां चलाई। जब घायलों को गाड़ियों में डालकर अस्पताल लाया जा रहा था, तब भी उनके वाहनों पर गोलियां बरसाईं गई। अस्पताल में चिकित्सकों ने बलदेव सिंह को मृत घोषित कर दिया। जबकि यादविंदर को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। पुलिस ने मृतक बलदेव सिंह के भतीजे मनप्रीत सिंह की शिकायत पर गांव जयधर निवासी अरुण कुमार, गांव हरेवा निवासी सुदेश कुमार, रनबीर, धर्मबीर, राजेंद्र कुमार, गांव खरिंडवा निवासी प्रदीप कुमार, लेदाखास निवासी अशोक कुमार, अलहार निवासी नागेश, जयधरी निवासी महाबीर सहित अन्य 20 लोगों के खिलाफ धारा 148/149, 452, 307, 302, 506 तथा आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। कोर्ट में करीब चार साल चली सुनवाई के दौरान 30 से अधिक लोगों की गवाही हुई। 31 अक्टूबर को फास्ट ट्रैक की न्यायधीश रितु गर्ग ने गांव जयधर निवासी अरुण कुमार, गांव हरेवा निवासी सुदेश कुमार, रनबीर, धर्मबीर, राजेंद्र कुमार, गांव खरिंडवा निवासी प्रदीप कुमार, लेदाखास निवासी अशोक कुमार, अलहार निवासी नागेश, जयधरी निवासी महाबीर को गांव हरेवा निवासी बलदेव सिंह की हत्या करने का दोषी करार दिया। जबकि 18 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। इस मामले में नामजद दो आरोपियों का केस जुवेनाइल कोर्ट में विचाराधीन है।
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सोनू व हरदेव गैंगवार के चलते गई थी बलदेव सिंह की जान-
20 सितंबर 2011 को हरेवा गांव में हुआ हत्याकांड सोनू डागर व हरदेव सिंह गुट के बीच चली आ रही गैंगवार का नतीजा था। हरदेव व उसके साथी शिवकुमार की वर्ष 2008 में दशहरे के अगले दिन जगाधरी खेड़ा मंदिर के पास पीट कर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में सोनू डागर सहित 11 को नामजद किया गया। सूत्रों के मुताबिक सोनू डागर व हरदेव पहले मिलकर अवैध कब्जों का काम करते थे। किसी बात को लेकर उनमें दुश्मनी हो गई। हरदेव की मौत के बाद इस गुट की कमान हरेवा के कर्मबीर उर्फ कम्मा ने संभाल ली।
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2009 में सोनू डागर गुट के विक्रम उर्फ भूरा पर जगाधरी में गोली चलाई गई, लेकिन वह बच गया। 2010 में कर्मवीर को कार सवार पांच युवकों ने छछरौली की हरियाली के समीप गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया। कम्मा मर्डर केस में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बाद में पुलिस ने इस मामले में सोनू डागर व हरेवा निवासी बलदेव सिंह के बेटे हरप्रीत का नाम भी शामिल कर लिया। इस हत्याकांड में बलदेव सिंह के बेटे का नाम आने के उपरांत इन दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी शुरू हो गई। इसी दुश्मनी के चलते कर्मबीर के भाई धर्मबीर ने बलदेव सिंह की हत्याकांड को अंजाम दिया।