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Yamuna Nagar News: हरियाली के साथ बढ़ रहे तेंदुए और हाथी
Fri, 05 Jun 2026 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 05 Jun 2026 12:33 AM IST
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यमुनानगर के कलेसर नेशनल पार्क में बढ़ती हरियाली को दर्शाती तस्वीर। आर्काइव
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में वन क्षेत्र बढ़कर 188.99 वर्ग किलोमीटर हो गया है, जो इसके कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 10.69 प्रतिशत है। यही नहीं प्रदेश के जंगलों कुल पेड़ों में से लगभग 14.86 प्रतिशत पेड़ अकेले यमुनानगर में हैं। बढ़ते वन क्षेत्र और वृक्षों की संख्या ने जिला प्रदेश में दूसरे नंबर पर कायम है।
वन विभाग की ओर से कराई गई डिजिटल वृक्ष गणना के अनुसार हरियाणा में जंगलों से बाहर कुल 4.01 करोड़ पेड़ दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 60 लाख 94153 पेड़ यमुनानगर में पाए गए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि प्रदेश के हर सातवें पेड़ की मौजूदगी यमुनानगर में है। वन क्षेत्र के मामले में भी जिला प्रदेश में दूसरे स्थान पर है।
आंकड़ों के अनुसार जिले में 21.47 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र बहुत घने वन, 86.16 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मध्यम घने वन तथा 81.36 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र खुले वनों के रूप में दर्ज किया गया है। पर्यावणण विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में पौधरोपण अभियानों, संरक्षण गतिविधियों और लोगों में बढ़ी पर्यावरणीय जागरूकता के कारण वन क्षेत्र में लगातार वृद्धि हुई है।
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हालांकि हरियाली बढ़ाने की राह पूरी तरह आसान नहीं है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार हर वर्ष लगाए जाने वाले पौधों में से करीब 30 से 35 प्रतिशत पौधे विभिन्न कारणों से नष्ट हो जाते हैं। इनमें पानी की कमी, मौसम का प्रभाव, बेसहारा पशुओं द्वारा नुकसान पहुंचाना और लोगोंकी ओर से अनजाने में पौधों को क्षति पहुंचाना प्रमुख कारण हैं। जिले में इंडियन फॉरेस्ट एक्ट-1927 के तहत 50,195.58 एकड़ क्षेत्र आरक्षित वन घोषित है।
11570 एकड़ में है कलेसर नेशनल पार्क
जिले में 11570 एकड़ क्षेत्र में फैला कलेसर नेशनल पार्क भी शामिल है, जो हरियाणा के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव आवासों में गिना जाता है। वन क्षेत्र बढ़ने का सकारात्मक असर वन्यजीवों की संख्या और उनकी सुरक्षा पर भी दिखाई दे रहा है। कलेसर नेशनल पार्क में वर्तमान में एक टाइगर, लगभग 40 तेंदुए, करीब 15 हाथी, सांभर, खरगोश, अजगर, कोबरा समेत अनेक दुर्लभ वन्य जीव निवास कर रहे हैं।
वर्ष 2023 में कैद हुई थी बंगाल टाइगर की तस्वीर
विशेष रूप से बंगाल टाइगर की मौजूदगी ने कलेसर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। वर्ष 2023 में जंगल में लगाए गए फ्लैश एंड क्लिक कैमरों में एक बंगाल टाइगर की तस्वीर कैद हुई थी। विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 110 वर्षों बाद कलेसर क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई थी। यह घटना इस बात का संकेत मानी गई कि क्षेत्र का वन पर्यावरण और जैव विविधता वन्यजीवों के लिए अनुकूल बन रही है।
जिले में वन क्षेत्र में वृद्धि हो रही है। पर्यावरण संरक्षण के सामूहिक प्रयास भविष्य में और बेहतर परिणाम दे सकते हैं। पौधरोपण के साथ-साथ वन विभाग संरक्षण पर भी समान ध्यान दे रहा है। - संदीप सैनी, जिला वन अधिकारी, यमुनानगर।
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यमुनानगर। जिले में वन क्षेत्र बढ़कर 188.99 वर्ग किलोमीटर हो गया है, जो इसके कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 10.69 प्रतिशत है। यही नहीं प्रदेश के जंगलों कुल पेड़ों में से लगभग 14.86 प्रतिशत पेड़ अकेले यमुनानगर में हैं। बढ़ते वन क्षेत्र और वृक्षों की संख्या ने जिला प्रदेश में दूसरे नंबर पर कायम है।
वन विभाग की ओर से कराई गई डिजिटल वृक्ष गणना के अनुसार हरियाणा में जंगलों से बाहर कुल 4.01 करोड़ पेड़ दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 60 लाख 94153 पेड़ यमुनानगर में पाए गए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि प्रदेश के हर सातवें पेड़ की मौजूदगी यमुनानगर में है। वन क्षेत्र के मामले में भी जिला प्रदेश में दूसरे स्थान पर है।
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आंकड़ों के अनुसार जिले में 21.47 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र बहुत घने वन, 86.16 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मध्यम घने वन तथा 81.36 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र खुले वनों के रूप में दर्ज किया गया है। पर्यावणण विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में पौधरोपण अभियानों, संरक्षण गतिविधियों और लोगों में बढ़ी पर्यावरणीय जागरूकता के कारण वन क्षेत्र में लगातार वृद्धि हुई है।
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हालांकि हरियाली बढ़ाने की राह पूरी तरह आसान नहीं है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार हर वर्ष लगाए जाने वाले पौधों में से करीब 30 से 35 प्रतिशत पौधे विभिन्न कारणों से नष्ट हो जाते हैं। इनमें पानी की कमी, मौसम का प्रभाव, बेसहारा पशुओं द्वारा नुकसान पहुंचाना और लोगोंकी ओर से अनजाने में पौधों को क्षति पहुंचाना प्रमुख कारण हैं। जिले में इंडियन फॉरेस्ट एक्ट-1927 के तहत 50,195.58 एकड़ क्षेत्र आरक्षित वन घोषित है।
11570 एकड़ में है कलेसर नेशनल पार्क
जिले में 11570 एकड़ क्षेत्र में फैला कलेसर नेशनल पार्क भी शामिल है, जो हरियाणा के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव आवासों में गिना जाता है। वन क्षेत्र बढ़ने का सकारात्मक असर वन्यजीवों की संख्या और उनकी सुरक्षा पर भी दिखाई दे रहा है। कलेसर नेशनल पार्क में वर्तमान में एक टाइगर, लगभग 40 तेंदुए, करीब 15 हाथी, सांभर, खरगोश, अजगर, कोबरा समेत अनेक दुर्लभ वन्य जीव निवास कर रहे हैं।
वर्ष 2023 में कैद हुई थी बंगाल टाइगर की तस्वीर
विशेष रूप से बंगाल टाइगर की मौजूदगी ने कलेसर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। वर्ष 2023 में जंगल में लगाए गए फ्लैश एंड क्लिक कैमरों में एक बंगाल टाइगर की तस्वीर कैद हुई थी। विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 110 वर्षों बाद कलेसर क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई थी। यह घटना इस बात का संकेत मानी गई कि क्षेत्र का वन पर्यावरण और जैव विविधता वन्यजीवों के लिए अनुकूल बन रही है।
जिले में वन क्षेत्र में वृद्धि हो रही है। पर्यावरण संरक्षण के सामूहिक प्रयास भविष्य में और बेहतर परिणाम दे सकते हैं। पौधरोपण के साथ-साथ वन विभाग संरक्षण पर भी समान ध्यान दे रहा है। - संदीप सैनी, जिला वन अधिकारी, यमुनानगर।