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कुशमदीप ने लिखा सबसे बेहतर स्लोगन, मिला प्रथम स्थान
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Kushmdeep wrote the best slogan, got first place
- फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। डीएवी गर्ल्स कॉलेज में विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के उपलक्ष्य में तनाव प्रबंधन एवं कौशल विकास कार्यक्रम पर स्लोगन लेखन प्रतियोगिता हुई। साथ ही नुक्कड़ नाटक भी हुआ। आयोजन कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की ओर से कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. मीनू जैन की देखरेख में किया गया।
स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में 50 से अधिक छात्राओं ने हिस्सा लिया। इसमें बीए द्वितीय वर्ष में साइकोलॉजी ऑनर्स की कुशमदीप ने प्रथम, बीए तृतीय वर्ष की हरजोत ने द्वितीय व बीएससी फैशन डिजाइनिंग द्वितीय वर्ष की रमनप्रीत ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। साइकोलॉजी ऑनर्स प्रथम वर्ष की शगुन व ओजस्वी को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। साथ ही द्वितीय वर्ष की सुपरनीति व रीतिक को विशिष्ट पुरस्कार मिला। डॉ. मीनू जैन ने विजेताओं को पुरस्कृत कर बताया जैसे सांस लेना जरूरी है, वैसे ही मानसिक स्वास्थ्य का महत्व है।
शालिनी छाबड़ा ने बताया कि स्वास्थ्य जीवन के हर चरण अर्थात बचपन, किशोरावस्था, वयस्क व बुढ़ापे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मानसिक रोगियों की बड़ी संख्या के बावजूद भी अब तक समाज में लोग इसके प्रति जागरूक नहीं है। आज भी मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा की जाती है। इसकी ओर ध्यान नहीं दिया जाता। यह हमारे सोचने, समझने, महसूस करने व कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करता है। सही समय पर उपचार कर इससे निजात पाई जा सकती है। प्राध्यापिका डोली मेहता ने कहा कि व्यक्ति अपनी जरूरतों को पूरा करने में इतना व्यस्त रहता है कि वह अपने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाता और तनाव का शिकार हो जाता है। तनाव को कम करने का सबसे अच्छा तरीका अपने समय का बेहतर प्रबंधन करना है। कार्यों की प्राथमिकता की सूची बनाएं और सभी कार्यों को एक ही दिन में पूरा करने का दबाव महसूस न करें। कार्यक्रम को सफल बनाने में मनोविज्ञान की प्राध्यापिका मीनाक्षी सैनी, रत्ना सरेवाल मौजूद रहे।
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नुक्कड़ नाटक से बताया- उचित उपचार से ठीक हो सकता मानसिक रोगी
नुक्कड़ नाटक से छात्राओं ने बताया कि किशोरावस्था में छात्र विभिन्न समस्याओं से जूझते हैं जैसे कि अच्छे अंक लाना, शादी का दबाव, माता-पिता से विचार न मिलना, अकेलापन महसूस होना, ऐसा लगना कि उन्हें समझने वाला कोई नहीं, आंतरिक दबाव, आंतरिक अंतरद्वंद्व व बॉडी शेमिंग आदि। इन समस्याओं के कारण वह मनोव्याधि का शिकार हो जाता हैं, जैसे तनाव, अवसाद, चिंता, नशा आदि। समाज में आज भी मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित अंधविश्वास है। नाटक के जरिए बताया कि मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्तियों को उचित उपचार के द्वारा और सहारा देकर बेहतर किया जा सकता है।
सांझी प्रतियोगिता में बीए द्वितीय वर्ष के नीशू प्रथम
-जगाधरी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज में आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। जगाधरी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज में वाणिज्य कला की विभागाध्यक्ष सीमा जैन की देखरेख में सांझी प्रतियोगिता हुई। इसमें बीए, बीसीए व बीकॉम के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में बीए द्वितीय वर्ष से नीशू पहले, साहिल खान दूसरे, काजल तृतीय स्थान पर रहे। सांत्वना पुरस्कार बीए प्रथम वर्ष के परविता को दिया गया। कॉलेज प्राचार्य डॉ. पीके वाजपेयी ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य सांझी कला को बढ़ावा देना रहा। डॉ. बाजपेयी ने सीमा जैन को भविष्य में भी इस प्रकार की प्रतियोगिता करते रहने के लिए कहा। सीमा जैन ने कहा कि सांझी कला वर्तमान में कम हो रही है, इसलिए इसके प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए प्रतियोगिता की गई। प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका डॉ. सीमा गुप्ता व प्रो. हेमराज कोशिश ने निभाई।
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स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में 50 से अधिक छात्राओं ने हिस्सा लिया। इसमें बीए द्वितीय वर्ष में साइकोलॉजी ऑनर्स की कुशमदीप ने प्रथम, बीए तृतीय वर्ष की हरजोत ने द्वितीय व बीएससी फैशन डिजाइनिंग द्वितीय वर्ष की रमनप्रीत ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। साइकोलॉजी ऑनर्स प्रथम वर्ष की शगुन व ओजस्वी को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। साथ ही द्वितीय वर्ष की सुपरनीति व रीतिक को विशिष्ट पुरस्कार मिला। डॉ. मीनू जैन ने विजेताओं को पुरस्कृत कर बताया जैसे सांस लेना जरूरी है, वैसे ही मानसिक स्वास्थ्य का महत्व है।
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शालिनी छाबड़ा ने बताया कि स्वास्थ्य जीवन के हर चरण अर्थात बचपन, किशोरावस्था, वयस्क व बुढ़ापे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मानसिक रोगियों की बड़ी संख्या के बावजूद भी अब तक समाज में लोग इसके प्रति जागरूक नहीं है। आज भी मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा की जाती है। इसकी ओर ध्यान नहीं दिया जाता। यह हमारे सोचने, समझने, महसूस करने व कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करता है। सही समय पर उपचार कर इससे निजात पाई जा सकती है। प्राध्यापिका डोली मेहता ने कहा कि व्यक्ति अपनी जरूरतों को पूरा करने में इतना व्यस्त रहता है कि वह अपने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाता और तनाव का शिकार हो जाता है। तनाव को कम करने का सबसे अच्छा तरीका अपने समय का बेहतर प्रबंधन करना है। कार्यों की प्राथमिकता की सूची बनाएं और सभी कार्यों को एक ही दिन में पूरा करने का दबाव महसूस न करें। कार्यक्रम को सफल बनाने में मनोविज्ञान की प्राध्यापिका मीनाक्षी सैनी, रत्ना सरेवाल मौजूद रहे।
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नुक्कड़ नाटक से बताया- उचित उपचार से ठीक हो सकता मानसिक रोगी
नुक्कड़ नाटक से छात्राओं ने बताया कि किशोरावस्था में छात्र विभिन्न समस्याओं से जूझते हैं जैसे कि अच्छे अंक लाना, शादी का दबाव, माता-पिता से विचार न मिलना, अकेलापन महसूस होना, ऐसा लगना कि उन्हें समझने वाला कोई नहीं, आंतरिक दबाव, आंतरिक अंतरद्वंद्व व बॉडी शेमिंग आदि। इन समस्याओं के कारण वह मनोव्याधि का शिकार हो जाता हैं, जैसे तनाव, अवसाद, चिंता, नशा आदि। समाज में आज भी मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित अंधविश्वास है। नाटक के जरिए बताया कि मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्तियों को उचित उपचार के द्वारा और सहारा देकर बेहतर किया जा सकता है।
सांझी प्रतियोगिता में बीए द्वितीय वर्ष के नीशू प्रथम
-जगाधरी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज में आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। जगाधरी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज में वाणिज्य कला की विभागाध्यक्ष सीमा जैन की देखरेख में सांझी प्रतियोगिता हुई। इसमें बीए, बीसीए व बीकॉम के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में बीए द्वितीय वर्ष से नीशू पहले, साहिल खान दूसरे, काजल तृतीय स्थान पर रहे। सांत्वना पुरस्कार बीए प्रथम वर्ष के परविता को दिया गया। कॉलेज प्राचार्य डॉ. पीके वाजपेयी ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य सांझी कला को बढ़ावा देना रहा। डॉ. बाजपेयी ने सीमा जैन को भविष्य में भी इस प्रकार की प्रतियोगिता करते रहने के लिए कहा। सीमा जैन ने कहा कि सांझी कला वर्तमान में कम हो रही है, इसलिए इसके प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए प्रतियोगिता की गई। प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका डॉ. सीमा गुप्ता व प्रो. हेमराज कोशिश ने निभाई।

डीएवी गर्ल्स कॉलेज में प्रतिभागियों के लिखे स्लोगन का अवलोकन करता स्टाफ।- फोटो : Yamuna Nagar