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Yamuna Nagar News: कपालमोचन मेले में ड्रोन व 200 सीसीटीवी से होगी निगरानी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Nov 2023 12:39 AM IST
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Kapalmochan fair will be monitored with drones and 200 CCTVs
अंतरराज्यीय प्रसिद्ध ऐतिहासिक कपाल मोचन मेला 140 एकड़ भूमि में लगेगा। पूरे मेले पर निगरानी रखने के लिए ड्रोन उड़ाया जाएगा और 200 से अधिक सीसीटीवी लगाए जाएंगे। मेला हर बार की तरह इस बार भी चार सेक्टर में ही लगेगा जोकि 23 से 27 नवंबर तक भरेगा। मेला आरंभ होने में 17 दिन शेष हैं। बता दें मेले का आयोजन बिलासपुर में कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर होता है। इसकी तैयारियों को लेकर प्रशासन ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है। यहां बने ऋणमोचन, कपालमोचन और सूरजकुंड सरोवर हैं जिनकी सफाई कराई जा चुकी है।
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बता दें यह अंतरराज्यीय मेला है जिसमें तकरीबन पंजाब के सबसे ज्यादा श्रद्धालु यहां माथा और स्नान करने के लिए पहुंचते हैं। पिछली बार की तुलना के अनुसार इस बार 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। चूंकि इस बार धान का सीजन भी समय खत्म हो चुका और अब किसान गेहूं की बिजाई में जुट गए हैं। ऐसे में मेले के समय तक किसान भी फ्री हो जाएंगे। यही कारण है इस बार मेले में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ सकती है।
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बता दें कपाल मोचन तीर्थ स्थल 126 एकड़ में बसा हुआ है। जिसमें ऋणमोचन, कपालमोचन और सूरजकुंड सरोवर हैं, जिनमें श्रद्धालु बारी-बारी से स्नान करते हैं। वहीं इन सरोवरों के चारों तरफ पहली बार स्थाई लाइटें लगाई जाएंगी, जबकि हर साल किराये पर अस्थाई लाइटें लगाई जाती थी। वहीं मेले के दौरान कपाल मोचन स्थल को रंगबिरंगी लाइटों से सजाया जाता है। हालांकि मेला लगने में समय है, मगर यहां जो-जो खामियां हैं उन्हें अभी से दुरुस्त किया जा रहा है।
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कपाल मोचन भारत के पवित्र स्थलों में से एक है। मान्यता के अनुसार कपाल मोचन स्थित सोम सरोवर में स्नान करने से भगवान शिव ब्रह्मदोष से मुक्त हुए थे। इसी वजह से हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर यहां मेला लगता है जिसमें लाखों लोग पाप मुक्ति के लिए सरोवर में स्नान करने पहुंचते हैं। यह कपाल मोचन मेला के नाम से विख्यात है। वहीं पौराणिक तथ्यों के अनुसार 1679 ईस्वी में भंगनी की लड़ाई के बाद पांवटा साहिब के रास्ते पर गुरु गोबिंद सिंह जी ने भी इस जगह का दौरा किया था। वह 52 दिन तक रुके और पूजा करते थे उनके सैनिक अपने हथियार साफ करते थे और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए उन्हें परीक्षण करते थे। उन्होंने कपाल मोचन के मुख्य पुजारी को स्मृति चिन्ह के रूप में अपने हस्ताक्षर की तांबे की थाली दी। द्रोपदी और पांच पांडवों ने भी इस पवित्र स्थान का भ्रमण किया था।


मेले का मास्टर प्लान तैयार किया जा चुका है। इसी के दौरान मेला स्थल पर तैयारियां शुरू की जा रही है। इसको लेकर विभागों के कर्मचारी व अधिकारियों की ड्यूटियां भी निर्धारित की जाएंगी। मेला 140 एकड़ में लगाया जाएगा। पूरे एरिया पर निगरानी रखने के लिए ड्रोन उड़ाया जाएगा और सीसीटीवी भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा सरावरों पर स्थाई लाइटोंं का प्रबंध किया गया है।
-जसपाल सिंह गिल, एसडीएम बिलासपुर।
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