{"_id":"c56070e37bf649d233864f56ca76e5fa","slug":"justice-court-yamunanager","type":"story","status":"publish","title_hn":"नकली सीडी बेचने के आरोपी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नकली सीडी बेचने के आरोपी बरी
अमर उजाला ब्यूरो/यमुनानगर
Updated Tue, 25 Feb 2014 10:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट सौरभ गुप्ता की अदालत ने छह साल पहले नकली सीडी बेचने के दो आरोपियों को बरी कर दिया।
अधिवक्ता विरेंद्र सहगल ने बताया कि वर्ष 2008 में सुपर कैसेट इंडस्ट्रीज नोएडा की टीम ने यमुनानगर पुलिस के साथ मिलकर नकली सीडी, डीवीडी और एमपी थ्री बेचने वाले के खिलाफ कार्रवाई की थी।
सुपर कैसेट इंडस्ट्रीज नोएडा की टीम ने इंडस्ट्रियल एरिया से कमलेश और राजू से 682 सीडी, डीवीडी और एमपी थ्री बरामद की। कंपनी ने दावा किया था कि ये लोग कंपनी की नकली सीडी, डीवीडी और एमपी थ्री बेच रहे थे।
विरेंद्र सहगल ने बताया कि बरामद सीडी का मिलान असली सीडी के साथ नहीं कराया गया और न ही किसी तरह के लेबोरेटरी टेस्ट करवाए गए। मामले की तफ्तीश के दौरान पुलिस ने भी सीडी का असली सीडी से मिलान या फिर लेबोरेटरी टेस्ट नहीं करवाया।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता ने कबूल किया कि जांच अधिकारी ने कभी भी उनसे मिलान करने के लिए कंपनी की असली सीडी, डीवीडी और एमपी थ्री नहीं मांगी। दोनाें पक्षों को सुनने के बाद फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट सौरभ गुप्ता ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।
विज्ञापन
अधिवक्ता विरेंद्र सहगल ने बताया कि वर्ष 2008 में सुपर कैसेट इंडस्ट्रीज नोएडा की टीम ने यमुनानगर पुलिस के साथ मिलकर नकली सीडी, डीवीडी और एमपी थ्री बेचने वाले के खिलाफ कार्रवाई की थी।
सुपर कैसेट इंडस्ट्रीज नोएडा की टीम ने इंडस्ट्रियल एरिया से कमलेश और राजू से 682 सीडी, डीवीडी और एमपी थ्री बरामद की। कंपनी ने दावा किया था कि ये लोग कंपनी की नकली सीडी, डीवीडी और एमपी थ्री बेच रहे थे।
विज्ञापन
विरेंद्र सहगल ने बताया कि बरामद सीडी का मिलान असली सीडी के साथ नहीं कराया गया और न ही किसी तरह के लेबोरेटरी टेस्ट करवाए गए। मामले की तफ्तीश के दौरान पुलिस ने भी सीडी का असली सीडी से मिलान या फिर लेबोरेटरी टेस्ट नहीं करवाया।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता ने कबूल किया कि जांच अधिकारी ने कभी भी उनसे मिलान करने के लिए कंपनी की असली सीडी, डीवीडी और एमपी थ्री नहीं मांगी। दोनाें पक्षों को सुनने के बाद फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट सौरभ गुप्ता ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।