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नंबरदारों से स्वास्थ्य प्रमाणपत्र मांगना गलत : नैन
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गुहला-चीका। ताऊ देवी लाल पार्क चीका में शनिवार को नंबरदारों की बैठक हुई। इस बैठक में नंबरदारों की मांगों पर चर्चा की गई।
इस मौके पर नंबरदार एसोसिएशन के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट जीवन सिंह नैन ने कहा कि नैन ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 75 साल से अधिक उम्र के नंंबरदारों को हटाने व 60 वर्ष से अधिक उम्र के नंबरदारों का मेडिकल सर्टिफिकेट मांगना और नए नंबरदारों की नियुक्ति पर रोक लगाना गलत कदम है। इसके लेकर जल्द ही प्रदेश के नंबरदारों की बैठक बुलाकर आगामी रणनीति बनाई जाएगी।
उनके अनुसार नंबरदारी प्रथम राजा हर्षवर्धन के समय से चली आ रही है। नंबरदार प्रशासन की आंख और कान होते हैं। रजिस्ट्री और इंतकाल के समय बाशिंदों की सही पहचान करना नंबरदार का कर्तव्य है। गलत वारिस इंतकाल में दर्ज होने से जहां संपत्ति के लेकर विवाद पैदा होते है।
नैन ने कहा कि नंबरदारों के साथ कई सामाजिक मान्यताएं और परंपराएं भी जुड़ी है। ग्रामीण आंचल में धार्मिक अनुष्ठान और मांगलिक कार्य के लिए आज भी नंबरदारों को प्राथमिकता दी जाती है, ऐसे में हर एक नंबरदार का फर्ज बनता है कि वह अपने पद की मर्यादा के अनुरूप कार्य करें।
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बैठक में जगदीश हरिगढ़, नफे सिंह, रघुवीर सिंह, रमेश, बलबीर सिंह, सतपाल हरिगढ़ व गुरमेल बदसुई भी मौजूद रहे।
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इस मौके पर नंबरदार एसोसिएशन के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट जीवन सिंह नैन ने कहा कि नैन ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 75 साल से अधिक उम्र के नंंबरदारों को हटाने व 60 वर्ष से अधिक उम्र के नंबरदारों का मेडिकल सर्टिफिकेट मांगना और नए नंबरदारों की नियुक्ति पर रोक लगाना गलत कदम है। इसके लेकर जल्द ही प्रदेश के नंबरदारों की बैठक बुलाकर आगामी रणनीति बनाई जाएगी।
उनके अनुसार नंबरदारी प्रथम राजा हर्षवर्धन के समय से चली आ रही है। नंबरदार प्रशासन की आंख और कान होते हैं। रजिस्ट्री और इंतकाल के समय बाशिंदों की सही पहचान करना नंबरदार का कर्तव्य है। गलत वारिस इंतकाल में दर्ज होने से जहां संपत्ति के लेकर विवाद पैदा होते है।
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नैन ने कहा कि नंबरदारों के साथ कई सामाजिक मान्यताएं और परंपराएं भी जुड़ी है। ग्रामीण आंचल में धार्मिक अनुष्ठान और मांगलिक कार्य के लिए आज भी नंबरदारों को प्राथमिकता दी जाती है, ऐसे में हर एक नंबरदार का फर्ज बनता है कि वह अपने पद की मर्यादा के अनुरूप कार्य करें।
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बैठक में जगदीश हरिगढ़, नफे सिंह, रघुवीर सिंह, रमेश, बलबीर सिंह, सतपाल हरिगढ़ व गुरमेल बदसुई भी मौजूद रहे।