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Yamuna Nagar News: कागजों तक सिमटे गीला, सूखा कचरा अलग रखने के निर्देश
Sat, 11 Jan 2025 08:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 11 Jan 2025 08:15 PM IST
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यमुनानगर। स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है, जिसके लिए कभी भी केंद्रीय टीम शहर आ सकती है। हालांकि गत वर्ष के सर्वेक्षण में बिगड़ी रैंकिंग में सुधार के लिए नगर निगम अफसर खूब जोर लगा रहे हैं, पर कचरा संग्रहण के मामले में हालात नहीं बदल पाए हैं, जबकि यह स्वच्छ सर्वेक्षण का अहम बिंदु है।
इसके बाद भी स्थिति यह है कि गीला, सूखा, मेडिकल व अन्य कचरे को अलग-अलग रखने के निर्देश कागजों तक ही सीमित है।
धरातल पर अधिकांश घरों-दुकानों व अन्य भवनों में लोग एक ही डस्टबिन में हर तरह का कचरा इकट्ठा कर रहे हैं। जो लोग भवनों में कचरे को अलग-अलग रख रहे हैं, उनका कचरा भी टिपर वाहनों में मिक्स हो रहा है। ऐसा होते सरेआम देखा जा सकता है, वहीं निवर्तमान पार्षद भी ऐसे आरोप लगा रहे हैं।
बावजूद इसके नगर निगम अफसरों का इस ओर ध्यान नहीं है, जबकि मिक्स कचरे के संग्रहण व उठान किए जाने पर स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए आ रही केंद्रीय टीम की नजर पड़ती है तो शहर की स्वच्छ रैंकिंग बिगड़ सकती है।
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एमआरएफ न खाद, निस्तारण भी प्रभावित : मिक्स कचरे को अलग-अलग करने के लिए सभी वार्डों में एमआरएफ सेंटर नहीं बन पाए। इन सेंटर पर टिपर वाहनों में इकट्ठे किए कचरे को डंप कर गीला-सूखे व अन्य कचरे को अलग-अलग किया जाना है।
साथ ही कचरे के रियूज या रिसाइकिल की प्रक्रिया होनी है। गीले कचरे से खाद बनाने के साथ अन्य कचरे को अलग-अलग इस्तेमाल में लाया जाना है।
इसके बाद शेष कचरे को ठोस कचरा प्लांट भेजा जाना है, पर एमआरएफ न बनने से ऐसा नहीं हो रहा और मिक्स कचरा प्लांट पहुंचने से निस्तारण कार्य प्रभावित होता है।
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इसके बाद भी स्थिति यह है कि गीला, सूखा, मेडिकल व अन्य कचरे को अलग-अलग रखने के निर्देश कागजों तक ही सीमित है।
धरातल पर अधिकांश घरों-दुकानों व अन्य भवनों में लोग एक ही डस्टबिन में हर तरह का कचरा इकट्ठा कर रहे हैं। जो लोग भवनों में कचरे को अलग-अलग रख रहे हैं, उनका कचरा भी टिपर वाहनों में मिक्स हो रहा है। ऐसा होते सरेआम देखा जा सकता है, वहीं निवर्तमान पार्षद भी ऐसे आरोप लगा रहे हैं।
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बावजूद इसके नगर निगम अफसरों का इस ओर ध्यान नहीं है, जबकि मिक्स कचरे के संग्रहण व उठान किए जाने पर स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए आ रही केंद्रीय टीम की नजर पड़ती है तो शहर की स्वच्छ रैंकिंग बिगड़ सकती है।
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एमआरएफ न खाद, निस्तारण भी प्रभावित : मिक्स कचरे को अलग-अलग करने के लिए सभी वार्डों में एमआरएफ सेंटर नहीं बन पाए। इन सेंटर पर टिपर वाहनों में इकट्ठे किए कचरे को डंप कर गीला-सूखे व अन्य कचरे को अलग-अलग किया जाना है।
साथ ही कचरे के रियूज या रिसाइकिल की प्रक्रिया होनी है। गीले कचरे से खाद बनाने के साथ अन्य कचरे को अलग-अलग इस्तेमाल में लाया जाना है।
इसके बाद शेष कचरे को ठोस कचरा प्लांट भेजा जाना है, पर एमआरएफ न बनने से ऐसा नहीं हो रहा और मिक्स कचरा प्लांट पहुंचने से निस्तारण कार्य प्रभावित होता है।

-फोटो 58 : कार्यक्रम का शुभारंभ करते मुख्यातिथि डॉ. राजेश कुमार व साथ मौजूद प्राचार्य। स्रोत कॉ