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छत पर बागवानी करने के लिए प्रेरित किया
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। गुरु नानक महिला महाविद्यालय के सिविक क्लब व आत्मनिर्भर क्लब की ओर से ऑनलाइन व्याख्यान करवाया गया। एक सोच नई सोच संस्था के सहयोग से करवाए गए मुख्य वक्ता पूर्व जिला उद्यान अधिकारी डॉ. रमेश पाल सैनी ने छात्राओं को छत पर बागवानी करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि छत पर बागवानी में सबसे ज्यादा रोजगार के अवसर हैं। वहीं इससे हम शहर को साफ व सुंदर बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि रसोई के व्यर्थ पदार्थों से खाद तैयार कर छत पर की जा रही बागवानी में प्रयोग कर सकते हैं। छत पर बागवानी से धरती का तापमान नियंत्रित किया जा सकता है। इससे घर में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध वायु भी प्राप्त होगी। वहीं उत्पादक को ताजे फल व सब्जियां प्राप्त होती हैं। जिससे शरीर स्वस्थ रहेगा व शारीरिक व्यायाम भी होगा।
उन्होंने बताया कि छत पर बागवानी योग करने के ही समान है। योग से केवल शरीर स्वस्थ रख सकते हैं। जबकि इस बागवानी से शरीर के साथ पर्यावरण को स्वस्थ व स्वच्छ रख सकते हैं। इसमें प्लास्टिक की पुरानी बोतलें, पेंट की बाल्टियां, व्यर्थ पदार्थों, थर्माकोल का इस्तेमाल कर बहुत कम कीमत पर बागवानी शुरू की जा सकती है। इससे वर्षा के जल का भी सही प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इससे बागवानी विभाग की योजनाओं का लाभ भी लिया जा सकता है। कार्यक्रम में डॉ. मीनाक्षी गुप्ता, डॉ. आरती सिंह, डॉ. प्रभजोत कौर, नेहा व संस्था निदेशक शशि गुप्ता सहित अन्य उपस्थित रहे।
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यमुनानगर। गुरु नानक महिला महाविद्यालय के सिविक क्लब व आत्मनिर्भर क्लब की ओर से ऑनलाइन व्याख्यान करवाया गया। एक सोच नई सोच संस्था के सहयोग से करवाए गए मुख्य वक्ता पूर्व जिला उद्यान अधिकारी डॉ. रमेश पाल सैनी ने छात्राओं को छत पर बागवानी करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि छत पर बागवानी में सबसे ज्यादा रोजगार के अवसर हैं। वहीं इससे हम शहर को साफ व सुंदर बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि रसोई के व्यर्थ पदार्थों से खाद तैयार कर छत पर की जा रही बागवानी में प्रयोग कर सकते हैं। छत पर बागवानी से धरती का तापमान नियंत्रित किया जा सकता है। इससे घर में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध वायु भी प्राप्त होगी। वहीं उत्पादक को ताजे फल व सब्जियां प्राप्त होती हैं। जिससे शरीर स्वस्थ रहेगा व शारीरिक व्यायाम भी होगा।
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उन्होंने बताया कि छत पर बागवानी योग करने के ही समान है। योग से केवल शरीर स्वस्थ रख सकते हैं। जबकि इस बागवानी से शरीर के साथ पर्यावरण को स्वस्थ व स्वच्छ रख सकते हैं। इसमें प्लास्टिक की पुरानी बोतलें, पेंट की बाल्टियां, व्यर्थ पदार्थों, थर्माकोल का इस्तेमाल कर बहुत कम कीमत पर बागवानी शुरू की जा सकती है। इससे वर्षा के जल का भी सही प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इससे बागवानी विभाग की योजनाओं का लाभ भी लिया जा सकता है। कार्यक्रम में डॉ. मीनाक्षी गुप्ता, डॉ. आरती सिंह, डॉ. प्रभजोत कौर, नेहा व संस्था निदेशक शशि गुप्ता सहित अन्य उपस्थित रहे।
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