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Yamuna Nagar News: वोट और चौधर के चक्कर में 500 तालाबों पर करवा दिए अवैध कब्जे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 15 Apr 2026 02:05 AM IST
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In the pursuit of votes and political dominance, illegal encroachments were facilitated on 500 ponds.
व्यासपुर में तालाब में मिट्टी डाल कर बनाया गया पंपिंग स्टेशन व कमरा। संवाद
यमुनानगर। तालाबों पर बढ़ते अवैध कब्जों ने प्रशासन और पर्यावरण दोनों के लिए चिंता खड़ी कर दी है। जिले के करीब 800 तालाबों में से करीब 500 पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। एक ओर सरकार जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अमृत सरोवर योजना के तहत तालाबों का जीर्णोद्धार कर रही है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में तालाबों पर कब्जे व अतिक्रमण इस मुहिम को कमजोर कर रहा है।
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कई मामलों में सरपंचों ने वोट बैंक की राजनीति के चलते कब्जों को अनदेखा कर दिया। उनकी सोच यह होती है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद अगला सरपंच इस समस्या से निपटेगा। इसी लापरवाही का परिणाम है कि आज यह समस्या 500 तालाबों तक पहुंच गई है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति यह है कि कई गांवों में तालाबों का अस्तित्व केवल कागजों तक सीमित रह गया है। जमीन पर जहां कभी तालाब हुआ करते थे, वहां अब केवल गड्ढे या फिर पक्के निर्माण दिखाई देते हैं। तालाबों की नियमित सफाई और रखरखाव न होने के कारण लोग धीरे-धीरे उनमें कूड़ा, मिट्टी और गोबर डालते रहते हैं। इससे तालाब भरने लगते हैं और फिर उसी जमीन पर कब्जा कर लिया जाता है।
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हालांकि तालाबों को कब्जा मुक्त करवाना प्रशासन के लिए इतना आसान भी नहीं है। निशानदेही के दौरान कई जगहों पर कब्जाधारियों द्वारा विरोध किया जा रहा है। उन्हें डर है कि यदि जमीन की पहचान हो गई तो उनका अवैध निर्माण हटाया जा सकता है। इससे प्रशासनिक टीमों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जनस्वास्थ्य विभाग ने तालाब में बना दिया पंपिंग स्टेशन : तालाबों पर कब्जा केवल आम आदमी ही नहीं बल्कि अधिकारियों की लापरवाही भी उजागर हो रही है। व्यासपुर में छछरौली मोड़ पर डेहा बस्ती के पास जो तालाब है उसके अंदर मिट्टी का भराव करके जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग साढौरा ने पंपिंग स्टेशन बनवा दिया। इतना ही नहीं स्टेशन के पास पक्का कमरा भी बनाया गया है।

दरअसल व्यासपुर की गलियों व सड़कों पर कुछ साल पहले सीवरेज लाइन डाली गई थी। सीवरेज पानी को ट्रीट करने के लिए साढौरा मार्ग पर ककड़ौनी के पास एसटीपी बनाया जा रहा है। तालाब में लगाए गए पंपिंग स्टेशन से एसटीपी तक गंदा पानी पहुंचाया जाएगा। तालाब को बंद करके यहां लाखों रुपये से पंपिंग स्टेशन लगा दिया गया और जल संरक्षण का दावा करने वाले किसी अधिकारी ने ऐसा करने से रोका तक नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि तालाब केवल जल स्रोत ही नहीं, बल्कि भूजल स्तर बनाए रखने, पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता के लिए भी जरूरी हैं। यही वजह है कि जिले में पानी का जलस्तर हर साल एक से डेढ़ फीट नीचे जा रहा है। संवाद
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