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Yamuna Nagar News: जमीन रेलवे की तो निगम कैसे वसूल रहा किराया
Mon, 01 Apr 2024 06:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 01 Apr 2024 06:51 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एक ओर नगर निगम अफसर मीराबाई बाजार की जमीन को कागजों में रेलवे की बता रहे हैं। साथ ही यहां बनी दुकानों का किराया अभी भी नगर निगम की ओर से वसूला जा रहा है। फरवरी-2024 में अदा किए किराये की रसीद दिखाते हुए दुकानदार नगर निगम पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगा रहे हैं। मामले में निगम के क्षेत्रीय काराधन अधिकारी (जेडटीओ) नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं।
मीराबाई बाजार की जमीन कागजों में रेलवे की है, यह बात मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना के आने पर पता चरी। जून-2021 में यह योजना शुरू हुई तो बाजार से भी करीब 60 किरायेदारों ने आवेदन किया। योजना के तहत नगर निगम की दुकानों के 20 या उससे अधिक वर्ष पुराने किरायेदारों होने के नाते कलेक्टर रेट पर दुकानों का मालिकाना हक दिया जाना था। आवेदन कर किरायेदारों ने दुकानों की रजिस्ट्री अपने नाम करने की भी तैयारी कर ली थी। ऐन मौके पर अफसरों ने बाजार की जमीन कागजों में रेलवे की होने की बात कह दी।
मीराबाई बाजार एसोसिएशन के प्रेस प्रवक्ता एवं दुकानदार राजकुमार शर्मा ने बताया कि योजना लाभ न देने का कारण निगम अफसरों ने बाजार की जमीन कागजों में रेलवे की होना बताया था। तब बाजार की दुकानों के किरायेदारों की मांग पर आश्वासन मिला था कि जमीन का विवाद सुलझने तक नगर निगम की ओर से दुकानों का किराया नहीं वसूला जाएगा, पर विवाद के सवा साल में लगातार किराया वसूल किया जा रहा है।
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फरवरी-2024 में अदा किए किराये की रसीद भी किरायेदारों के पास है। यह नगर निगम की दोहरी नीति है, क्योंकि एक ओर जमीन रेलवे की बताकर योजना लाभ नहीं दिया जा रहा, वहीं दूसरी ओर पहले जैसे किराया भी वसूला जा रहा है। उनकी मांग है कि जमीन विवाद जब तक नहीं सुलझता, तब तक किराया माफ रहे। साथ ही आवेदन करने वाले किरायेदारों को दुकानों का मालिकाना हक दिलाया जाए। उधर, मामले में निगम के क्षेत्रीय काराधन अधिकारी (जेडटीओ) अजय वालिया का कहना है कि इस बारे में पता कर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।
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यमुनानगर। एक ओर नगर निगम अफसर मीराबाई बाजार की जमीन को कागजों में रेलवे की बता रहे हैं। साथ ही यहां बनी दुकानों का किराया अभी भी नगर निगम की ओर से वसूला जा रहा है। फरवरी-2024 में अदा किए किराये की रसीद दिखाते हुए दुकानदार नगर निगम पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगा रहे हैं। मामले में निगम के क्षेत्रीय काराधन अधिकारी (जेडटीओ) नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं।
मीराबाई बाजार की जमीन कागजों में रेलवे की है, यह बात मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना के आने पर पता चरी। जून-2021 में यह योजना शुरू हुई तो बाजार से भी करीब 60 किरायेदारों ने आवेदन किया। योजना के तहत नगर निगम की दुकानों के 20 या उससे अधिक वर्ष पुराने किरायेदारों होने के नाते कलेक्टर रेट पर दुकानों का मालिकाना हक दिया जाना था। आवेदन कर किरायेदारों ने दुकानों की रजिस्ट्री अपने नाम करने की भी तैयारी कर ली थी। ऐन मौके पर अफसरों ने बाजार की जमीन कागजों में रेलवे की होने की बात कह दी।
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मीराबाई बाजार एसोसिएशन के प्रेस प्रवक्ता एवं दुकानदार राजकुमार शर्मा ने बताया कि योजना लाभ न देने का कारण निगम अफसरों ने बाजार की जमीन कागजों में रेलवे की होना बताया था। तब बाजार की दुकानों के किरायेदारों की मांग पर आश्वासन मिला था कि जमीन का विवाद सुलझने तक नगर निगम की ओर से दुकानों का किराया नहीं वसूला जाएगा, पर विवाद के सवा साल में लगातार किराया वसूल किया जा रहा है।
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फरवरी-2024 में अदा किए किराये की रसीद भी किरायेदारों के पास है। यह नगर निगम की दोहरी नीति है, क्योंकि एक ओर जमीन रेलवे की बताकर योजना लाभ नहीं दिया जा रहा, वहीं दूसरी ओर पहले जैसे किराया भी वसूला जा रहा है। उनकी मांग है कि जमीन विवाद जब तक नहीं सुलझता, तब तक किराया माफ रहे। साथ ही आवेदन करने वाले किरायेदारों को दुकानों का मालिकाना हक दिलाया जाए। उधर, मामले में निगम के क्षेत्रीय काराधन अधिकारी (जेडटीओ) अजय वालिया का कहना है कि इस बारे में पता कर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।