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Yamuna Nagar News: कोच के बगैर कैसे सीखें क्रिकेट की बारीकियां
Mon, 03 Jun 2024 03:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 03 Jun 2024 03:39 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। टी-20 क्रिकेट विश्वकप को लेकर खिलाड़ियों व खेल प्रेमियों का खुमार दिखने लगा है। टीवी, मोबाइल पर विश्वकप में भारतीय टीम के मैच देखने का उत्साह है, वहीं किशोर व युवा खिलाड़ियों को मलाल है कि जिले में सरकारी स्तर पर क्रिकेट कोच नहीं है। कोच के बिना जिले की क्रिकेट खेल प्रतिभाएं गलियों तक सिमट रही हैं।
खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग के अंतर्गत सरकारी स्तर पर जिले में सात साल से क्रिकेट कोच नहीं है। यह पद वर्ष 2015 से रिक्त पड़ा है। इससे क्रिकेट के प्रशिक्षण के लिए आर्थिक सक्षम खिलाड़ी जिले में बनी निजी अकादमियों या दूसरे जिलों व राज्यों का रुख कर रहे हैं। जबकि आर्थिक कमजोर युवा चाहकर भी क्रिकेट खेल का प्रशिक्षण नहीं ले पा रहे हैं। दूसरी ओर तेजली खेल परिसर में बने क्रिकेट के पिच व मैदान के हालात भी लगातार बिगड़ रहे हैं, जहां काफी ऊंचे घास व झाड़ लग गए हैं, जिनमें पशु चरते नजर आते हैं।
सरकारी कोच न होने से छोड़ दिया खेल
राजकुमार ने कहा कि जिले में सात वर्षों से क्रिकेट खेल का सरकारी कोच नहीं हैं। खेल से जुड़े 10 वर्ष हो गए हैं, तब से अपने स्तर पर अभ्यास कर अलग-अलग स्तर पर प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं। कोच की कमी में बेहतर प्रदर्शन नहीं हो पाता। निजी अकादमियों व दूसरे जिलों व राज्यों में खेल प्रशिक्षण पर अधिक खर्च देख खेलना छोड़ दिया है।
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निजी कोच से प्रशिक्षण नहीं आया काम
आनंद शर्मा ने कहा कि सरकारी स्तर पर क्रिकेट कोच न देख निजी कोच से खेल प्रशिक्षण लिया। लेकिन कई वर्ष बाद भी खेल में आगे नहीं बढ़ पाया, इसलिए खेलने छोड़ दिया। अभी टी-20 क्रिकेट विश्वकप देख फिर से आसपास क्रिकेट खेल रहे हैं। पर खेल में उस जैसे अन्य खिलाड़ी क्रिकेट में भविष्य बना सके, इसके लिए सरकारी स्तर पर कोच होना जरूरी है।
आचार संहिता हटने के बाद कोचों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया होगी। इसके बाद खिलाड़ियों की समस्या का समाधान हो जाएगा। - राजेंद्र पाल गुप्ता, डिप्टी डायरेक्टर खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग।
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यमुनानगर। टी-20 क्रिकेट विश्वकप को लेकर खिलाड़ियों व खेल प्रेमियों का खुमार दिखने लगा है। टीवी, मोबाइल पर विश्वकप में भारतीय टीम के मैच देखने का उत्साह है, वहीं किशोर व युवा खिलाड़ियों को मलाल है कि जिले में सरकारी स्तर पर क्रिकेट कोच नहीं है। कोच के बिना जिले की क्रिकेट खेल प्रतिभाएं गलियों तक सिमट रही हैं।
खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग के अंतर्गत सरकारी स्तर पर जिले में सात साल से क्रिकेट कोच नहीं है। यह पद वर्ष 2015 से रिक्त पड़ा है। इससे क्रिकेट के प्रशिक्षण के लिए आर्थिक सक्षम खिलाड़ी जिले में बनी निजी अकादमियों या दूसरे जिलों व राज्यों का रुख कर रहे हैं। जबकि आर्थिक कमजोर युवा चाहकर भी क्रिकेट खेल का प्रशिक्षण नहीं ले पा रहे हैं। दूसरी ओर तेजली खेल परिसर में बने क्रिकेट के पिच व मैदान के हालात भी लगातार बिगड़ रहे हैं, जहां काफी ऊंचे घास व झाड़ लग गए हैं, जिनमें पशु चरते नजर आते हैं।
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सरकारी कोच न होने से छोड़ दिया खेल
राजकुमार ने कहा कि जिले में सात वर्षों से क्रिकेट खेल का सरकारी कोच नहीं हैं। खेल से जुड़े 10 वर्ष हो गए हैं, तब से अपने स्तर पर अभ्यास कर अलग-अलग स्तर पर प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं। कोच की कमी में बेहतर प्रदर्शन नहीं हो पाता। निजी अकादमियों व दूसरे जिलों व राज्यों में खेल प्रशिक्षण पर अधिक खर्च देख खेलना छोड़ दिया है।
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निजी कोच से प्रशिक्षण नहीं आया काम
आनंद शर्मा ने कहा कि सरकारी स्तर पर क्रिकेट कोच न देख निजी कोच से खेल प्रशिक्षण लिया। लेकिन कई वर्ष बाद भी खेल में आगे नहीं बढ़ पाया, इसलिए खेलने छोड़ दिया। अभी टी-20 क्रिकेट विश्वकप देख फिर से आसपास क्रिकेट खेल रहे हैं। पर खेल में उस जैसे अन्य खिलाड़ी क्रिकेट में भविष्य बना सके, इसके लिए सरकारी स्तर पर कोच होना जरूरी है।
आचार संहिता हटने के बाद कोचों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया होगी। इसके बाद खिलाड़ियों की समस्या का समाधान हो जाएगा। - राजेंद्र पाल गुप्ता, डिप्टी डायरेक्टर खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग।