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Yamuna Nagar News: कोच बिना खिलाड़ी कैसे सीखें खेल की बारीकियां
Wed, 08 Oct 2025 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 08 Oct 2025 12:31 AM IST
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तेजली खेल परिसर। आर्काइव
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। खेल विभाग में कोचों की कमी जिले के खिलाड़ियों को खल रही है। जिले में अधिकतर खेलों के कोच नहीं है और खिलाड़ियों को कोचिंग के लिए दूसरे जिलों की दौड़ लगानी पड़ रही है। इससे खिलाड़ियों के अभिभावकों को जेब ढीली करनी पड़ रही है। आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ी चाहकर भी प्रतिभा नहीं निखार पा रहे हैं।
जिले में सरकारी स्तर पर 11 खेलों के कोच हैं। इनमें कुश्ती, फुटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन, कबड्डी, बॉक्सिंग, जूडो, भारोत्तोलन, तलवारबाजी, लॉन टेनिस व खो-खो शामिल हैं। इसके अलावा तेजली खेल परिसर में ही खेलो इंडिया का लघु शूटिंग केंद्र भी है, जहां शूटिंग स्पर्धा की कोचिंग मिल रही है। इसके अलावा क्रिकेट, स्केटिंग, एथलेटिक्स के कोच नहीं हैं।
अब सरकारी, निजी व पंचायत स्तर पर 30 खेल नर्सरियां भी शुरू हुई हैं। इन नर्सरियों में नि:शुल्क प्रशिक्षण व डाइट सुविधा लेने के लिए खिलाड़ियों की संख्या व आयु वर्ग निर्धारित है। ऐसे में जिन खेलों के कोच नहीं है और सरकारी नर्सरियों में चयनित न होने वालों सहित अधिक आयु वर्ग के खिलाड़ी जिले के निजी खेल संस्थानों में प्रशिक्षण लेने पर मजबूर हैं।
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कोच न होने के कारण शहर से लेकर गांवों में एक के बाद एक निजी खेल संस्थान फल-फूल रहे हैं। जिले में अनुमानित करीब 60 निजी खेल संस्थान हैं, इनमें करीब 3,000 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। ज्यादा परेशानी आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों को आ रही है, जो चाहकर भी निजी कोचिंग नहीं ले पा रहे।
खिलाड़ी शुभम, अभिषेक, रवीन ने बताया कि किशोर व युवा वर्ग में क्रिकेट व वॉलीबॉल का क्रेज है। दोनों खेलों के सरकारी स्तर पर कोच नहीं है। इन खेलों के कोच मिले तो निजी खेल संस्थानों में खिलाड़ियों को फीस न देनी पड़े। साथ ही सरकारी स्तर पर निशुल्क प्रशिक्षण व डाइट खर्च मिल सकता है। सरकार व विभाग को ऐसे खेलों के कोच देने चाहिए, जिनमें किशोर व युवा वर्ग का रुझान अधिक है।
अभिभावक बोले - बच्चों को डाइट खर्च नहीं मिल रहा
निजी संस्थानों में प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ियों के अभिभावक विजय कॉलोनी के विकास जैन, यमुना विहार के राजकुमार, मॉडल कॉलोनी निवासी प्रेम शर्मा, आईटीआई निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि सरकारी स्तर पर कोच मिले तो खिलाड़ियों को निशुल्क प्रशिक्षण मिलेगा, पर कई वर्षों से तेजली स्टेडियम में क्रिकेट, एथलेटिक्स जैसे ज्यादा मांग वाले खेलों के कोच भी नहीं हैं। खेल कोचों के अभाव में खिलाड़ी सरकार से मिलने वाले नि:शुल्क प्रशिक्षण के साथ डाइट खर्च की सुविधा से वंचित हैं। खेल विभाग को जिले में जिन खेलों के खिलाड़ी अधिक हैं, उनके कोच देने चाहिए।
जिले में कई खेलों के कोच नहीं है। इसका असर खिलाड़ियों पर भी पड़ रहा है। कोच की मांग के बारे में मुख्यालय को सूचित किया गया है। जल्द कोच मिलने की उम्मीद है। -शिल्पा गुप्ता, जिला खेल अधिकारी, यमुनानगर।
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जगाधरी। खेल विभाग में कोचों की कमी जिले के खिलाड़ियों को खल रही है। जिले में अधिकतर खेलों के कोच नहीं है और खिलाड़ियों को कोचिंग के लिए दूसरे जिलों की दौड़ लगानी पड़ रही है। इससे खिलाड़ियों के अभिभावकों को जेब ढीली करनी पड़ रही है। आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ी चाहकर भी प्रतिभा नहीं निखार पा रहे हैं।
जिले में सरकारी स्तर पर 11 खेलों के कोच हैं। इनमें कुश्ती, फुटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन, कबड्डी, बॉक्सिंग, जूडो, भारोत्तोलन, तलवारबाजी, लॉन टेनिस व खो-खो शामिल हैं। इसके अलावा तेजली खेल परिसर में ही खेलो इंडिया का लघु शूटिंग केंद्र भी है, जहां शूटिंग स्पर्धा की कोचिंग मिल रही है। इसके अलावा क्रिकेट, स्केटिंग, एथलेटिक्स के कोच नहीं हैं।
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अब सरकारी, निजी व पंचायत स्तर पर 30 खेल नर्सरियां भी शुरू हुई हैं। इन नर्सरियों में नि:शुल्क प्रशिक्षण व डाइट सुविधा लेने के लिए खिलाड़ियों की संख्या व आयु वर्ग निर्धारित है। ऐसे में जिन खेलों के कोच नहीं है और सरकारी नर्सरियों में चयनित न होने वालों सहित अधिक आयु वर्ग के खिलाड़ी जिले के निजी खेल संस्थानों में प्रशिक्षण लेने पर मजबूर हैं।
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कोच न होने के कारण शहर से लेकर गांवों में एक के बाद एक निजी खेल संस्थान फल-फूल रहे हैं। जिले में अनुमानित करीब 60 निजी खेल संस्थान हैं, इनमें करीब 3,000 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। ज्यादा परेशानी आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों को आ रही है, जो चाहकर भी निजी कोचिंग नहीं ले पा रहे।
खिलाड़ी शुभम, अभिषेक, रवीन ने बताया कि किशोर व युवा वर्ग में क्रिकेट व वॉलीबॉल का क्रेज है। दोनों खेलों के सरकारी स्तर पर कोच नहीं है। इन खेलों के कोच मिले तो निजी खेल संस्थानों में खिलाड़ियों को फीस न देनी पड़े। साथ ही सरकारी स्तर पर निशुल्क प्रशिक्षण व डाइट खर्च मिल सकता है। सरकार व विभाग को ऐसे खेलों के कोच देने चाहिए, जिनमें किशोर व युवा वर्ग का रुझान अधिक है।
अभिभावक बोले - बच्चों को डाइट खर्च नहीं मिल रहा
निजी संस्थानों में प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ियों के अभिभावक विजय कॉलोनी के विकास जैन, यमुना विहार के राजकुमार, मॉडल कॉलोनी निवासी प्रेम शर्मा, आईटीआई निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि सरकारी स्तर पर कोच मिले तो खिलाड़ियों को निशुल्क प्रशिक्षण मिलेगा, पर कई वर्षों से तेजली स्टेडियम में क्रिकेट, एथलेटिक्स जैसे ज्यादा मांग वाले खेलों के कोच भी नहीं हैं। खेल कोचों के अभाव में खिलाड़ी सरकार से मिलने वाले नि:शुल्क प्रशिक्षण के साथ डाइट खर्च की सुविधा से वंचित हैं। खेल विभाग को जिले में जिन खेलों के खिलाड़ी अधिक हैं, उनके कोच देने चाहिए।
जिले में कई खेलों के कोच नहीं है। इसका असर खिलाड़ियों पर भी पड़ रहा है। कोच की मांग के बारे में मुख्यालय को सूचित किया गया है। जल्द कोच मिलने की उम्मीद है। -शिल्पा गुप्ता, जिला खेल अधिकारी, यमुनानगर।