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Yamuna Nagar News: पशु मंडी में उम्मीद से कम पहुंचे घोड़े और खच्चर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Nov 2024 03:46 AM IST
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Horses and mules arrived at the cattle market less than expected
बिलासपुर। बिलासपुर-चौराही मार्ग पर लगी घोड़ा व खच्चर मंडी में पशुपालक अपने पशुओं को लेकर पहुंचने लगे हैं। बुधवार को काफी संख्या में पशुपालक अपने घोड़े व खच्चर लेकर आए। हालांकि अभी तक कोई ऐसा घोड़ा मंडी में नहीं आया है जिसकी कीमत लाखों रुपये में हो। माना जा रहा है कि आज वीरवार को ऐसे घोड़े मंडी में पहुंच सकते हैं।
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जानकारी के अनुसार राजस्थान के पुष्कर की तर्ज पर खच्चर मंडी में पशुपालक अपने पशुओं की खरीद फरोख्त के साथ साथ नस्ल सुधार के लिए आते हैं। पिछले साल अंतिम समय में खच्चर मंडी लगाने के निर्णय आने से केवल कुछ ही पशु पालक मंडी में पहुंचे है, लेकिन इस बार खच्चर मंडी में अच्छी नस्ल के पशु पहुंच रहे है। मेले के तीसरे दिन तक मंडी में दस से अधिक पशुओं की बिक्री हो सकी। पशुपालकों का कहना है कि इस बार मेले में अनुमान के मुताबिक बहुत कम संख्या में पशु पालक अपने पशुओं का लेकर पहुंचे है। मंडी में अभी तक कोई बड़ी नस्ल का घोडा, खच्चर व गधा नही पहुंचा जो कि बाहर से आने वाले व्यापारियों को भी आकर्षित कर सके। दुकानदार राजकर्ण ने बताया कि मेले इस बार अधिकतर पशुपालक अन्य राज्यों में आयोजित होने वाले पशु मेले में जा चुके हैं। तीसरे दिन मंडी में 300 से अधिक घोड़े व खच्चर पहुंचे है। पशु पालकों का कहना है कि पिछले साल को छोड़ इससे पूर्व के सालों में खच्चर मंडी नहीं लगने से इस बार भी पशु पालक ज्यादा नहीं पहुंचे।
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नस्ल सुधार में भागीदारी रखता है खच्चर मंडी
कपालमोचन मेले के दौरान लगने वाले पशु मेले नस्ल सुधार को लेकर भी आगे रहा है। मेले में अन्य प्रदेशों से आने वाले पशुपालक अपने पशुओं के माध्यम से अन्य पशुपालकों के नस्ल में सुधार करने का कार्य भी करते है। इसके लिए वह अच्छे खासे पैसों की कमाई करके जाते है। घोड़े के व्यापार करने वाले राजेंद्र कुमार ने बताया कि नस्ल सुधार को लेकर पशु पालक 500 रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक लेते हैं। जिससे पशु पालकों को अच्छी कमाई भी होती है।
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