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स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया को दी मात
अमर उजाला ब्यूरो, यमुनानगर
Updated Fri, 24 Jul 2015 12:13 AM IST
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स्वास्थ्य विभाग बिना फौज के ही मलेरिया से जंग जीतने में कामयाब हो रहा है। जिले में इस साल मलेरिया के केसों में जबरदस्त कमी आई है। कम स्टाफ होने के बावजूद विभाग ने पांच साल में मलेरिया पर काफी हद तक अंकुश लगाया है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इस साल 15 जुलाई तक जिले में मलेरिया के 132 केस सामने आए हैं, जबकि बीते वर्ष मलेरिया के 559 केस थे। वहीं वर्ष 2013 में मलेरिया पीड़ितों की संख्या 1538, वर्ष 2012 में 3659 और वर्ष 2011 में जिले में मलेरिया पीड़ितों की संख्या 5212 थी।
दूसरे व्यक्ति तक मलेरिया फैलने से रोका
मलेरिया रोग मच्छर के काटने से होता है। मलेरिया पीड़ित से यह बीमारी दूसरे तक पहुंच जाती है। ऐसे में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक इस रोग को पहुंचने से रोकना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती थी। इसमें स्टाफ की कमी सबसे बड़ा रोड़ा बनी।
विभाग ने इस ओर गंभीरता से ध्यान दिया और मलेरिया पीड़ित की पहचान होने के बाद उस मरीज का तब तक इलाज जारी रखा गया, जब तक उसमें मलेरिया का प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हो गया। इस तरह मलेरिया पीड़ित से दूसरे व्यक्ति तक मलेरिया की पहुंच को रोका गया। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को मलेरिया के प्रति जागरूक करने की मुहिम चलाई। इसके तहत लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक किया गया।
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विभाग में न अधिकारी न पर्याप्त कर्मचारी
मलेरिया विभाग में करीब 170 अधिकारियों और कर्मचारियों की पोस्ट हैं, जिसमें से डेढ़ साल से करीब 85 प्रतिशत पद खाली हैं। मलेरिया की रोकथाम में मल्टी पर्पस हेल्थ वर्करों की अहम भूमिका होती है। जिले में एमपीएचडब्ल्यू की 99 पोस्ट हैं, जिनमें 87 खाली पड़ी हैं। मल्टी पर्पस हेल्थ सुपरवाइजर की 26 पोस्ट हैं, जिनमें 21 खाली पड़ी हैं। वहीं जिले में एक भी सीनियर मलेरिया इंस्पेक्टर नहीं है और इसकी सभी छह पोस्ट खाली हैं। इसी प्रकार लैब टेक्नीशियन की 15 में से सात पोस्ट खाली हैं। फील्ड वर्कर की 27 पोस्ट में से 18 खाली पड़ी हैं।
पीड़ित को दिया कंपलीट ट्रीटमेंट : डॉ वीके जैन
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. वीके जैन ने जनवरी, 2014 से डिस्ट्रिक्ट मलेरिया इंचार्ज का पद संभाला है। डॉ. जैन ने बताया कि मलेरिया पर काबू पाने के लिए उन्होेंने रणनीति तैयार की। सबसे पहले मलेरिया को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचने से रोका। मलेरिया प्रभावित व्यक्ति का पता चलते ही फौरन उसका पूरा ट्रीटमेंट शुरू किया गया। इसमें बड़ी कामयाबी मिली और एक से दूसरे व्यक्ति तक मलेरिया पहुंचने में भारी कमी आई।
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दूसरे व्यक्ति तक मलेरिया फैलने से रोका
मलेरिया रोग मच्छर के काटने से होता है। मलेरिया पीड़ित से यह बीमारी दूसरे तक पहुंच जाती है। ऐसे में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक इस रोग को पहुंचने से रोकना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती थी। इसमें स्टाफ की कमी सबसे बड़ा रोड़ा बनी।
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विभाग ने इस ओर गंभीरता से ध्यान दिया और मलेरिया पीड़ित की पहचान होने के बाद उस मरीज का तब तक इलाज जारी रखा गया, जब तक उसमें मलेरिया का प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हो गया। इस तरह मलेरिया पीड़ित से दूसरे व्यक्ति तक मलेरिया की पहुंच को रोका गया। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को मलेरिया के प्रति जागरूक करने की मुहिम चलाई। इसके तहत लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक किया गया।
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विभाग में न अधिकारी न पर्याप्त कर्मचारी
मलेरिया विभाग में करीब 170 अधिकारियों और कर्मचारियों की पोस्ट हैं, जिसमें से डेढ़ साल से करीब 85 प्रतिशत पद खाली हैं। मलेरिया की रोकथाम में मल्टी पर्पस हेल्थ वर्करों की अहम भूमिका होती है। जिले में एमपीएचडब्ल्यू की 99 पोस्ट हैं, जिनमें 87 खाली पड़ी हैं। मल्टी पर्पस हेल्थ सुपरवाइजर की 26 पोस्ट हैं, जिनमें 21 खाली पड़ी हैं। वहीं जिले में एक भी सीनियर मलेरिया इंस्पेक्टर नहीं है और इसकी सभी छह पोस्ट खाली हैं। इसी प्रकार लैब टेक्नीशियन की 15 में से सात पोस्ट खाली हैं। फील्ड वर्कर की 27 पोस्ट में से 18 खाली पड़ी हैं।
पीड़ित को दिया कंपलीट ट्रीटमेंट : डॉ वीके जैन
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. वीके जैन ने जनवरी, 2014 से डिस्ट्रिक्ट मलेरिया इंचार्ज का पद संभाला है। डॉ. जैन ने बताया कि मलेरिया पर काबू पाने के लिए उन्होेंने रणनीति तैयार की। सबसे पहले मलेरिया को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचने से रोका। मलेरिया प्रभावित व्यक्ति का पता चलते ही फौरन उसका पूरा ट्रीटमेंट शुरू किया गया। इसमें बड़ी कामयाबी मिली और एक से दूसरे व्यक्ति तक मलेरिया पहुंचने में भारी कमी आई।