साढ़े तैंतीस लाख मिले पर काम अब भी नहीं

यमुनानगर Updated Wed, 29 Jan 2014 12:40 AM IST
डी प्लान के तहत तेजली स्टेडियम की चहारदीवारी और टेनिस कोर्ट के लिए जारी पैसे को अधिकारी दबाए बैठे हैं। बजट जारी हुए तीन माह हो गए हैं।

लेकिन अभी तक किसी विभाग को निर्माण कार्य के लिए पैसा ट्रांसफर ही नहीं किया गया है। बजट होते हुए भी काम शुरू न होने से पता चलता है कि अधिकारियों में कार्य करने की इच्छाशक्ति नहीं है। फाइनेंशियल ईयर खत्म होने में दो माह ही शेष बचे हैं। लेकिन अभी तक डीआरडीए के अधिकारी जारी बजट से कार्य शुरू ही नहीं करा पाए हैं। अब अधिकारियों के पास दो माह का ही समय बचा है अगर वे इस बीच स्टेडियम की चहारदीवारी और टेनिस कोर्ट को बनवाने के लिए काम शुरू करा पाते हैं तो ठीक है नहीं तो मार्च के बाद बजट अधिकारियों के हाथ से निकल सकता है। बजट उच्चाधिकारियों के पास होने से खेल विभाग के अधिकारी भी कुछ नहीं बोल रहे हैं।


वे सिर्फ कह रहे हैं कि बजट से फरवरी माह तक काम शुरू हो जाता है तो अच्छा है। उसके बाद तो बजट लैप्स हो सकता है, वहीं एडीसी डॉ. एसएस सैनी का कहना है कि जल्द ही काम शुरू करा दिया जाएगा। बजट को लैप्स नहीं होने दिया जाएगा।

नहीं शुरू हो पाई टेंडर प्रक्रिया
तेजली स्टेडियम की टूटी चहारदीवारी को ठीक करने और टेनिस में बढ़ती खिलाड़ियों की संख्या को देखते हुए कोर्ट की जरूरत को महसूस किया गया। इसके लिए बजट की जरूरत थी। इसके लिए डी प्लान के तहत साढ़े 33 लाख रुपये तेजली खेल स्टेडियम के लिए जारी किए गए थे। इसमें 17 लाख रुपये में टेनिस कोर्ट तैयार किया जाना है और 16.50 लाख रुपये में स्टेडियम की चहारदीवारी होनी है। माना जा रहा था कि बजट जारी होते ही जल्द ही बजट नगर निगम, पीडब्लूडी या फिर खेल विभाग को ही निर्माण के लिए जारी कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब बजट को जारी हुए तीन माह हो गए हैं। निर्माण कार्य तो क्या शुरू होना था अभी तक टेंडर प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पाई है। इससे अधिकारियों की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस बजट की तरफ भी दिया जाए ध्यान

फरवरी मार्च माह में लोकसभा चुनावों की अधिसूचना जारी हो सकती है। इसको देखते हुए पिछले दिनों हुई डूडा की बैठक में डीसी ने जारी बजट से विकास कार्यों को फरवरी माह में हर हाल में शुरू करने के निर्देश दिए थे। लगता है कि यहां पर भी डीसी के निर्देशों का ही इंतजार है। खिलाड़ी प्रवीन कुमार और संदीप का कहना है कि एक तो सरकार की ओर से पहले ही यमुनानगर जिले के लिए कम बजट जारी किया जाता है दूसरा जो बजट जारी किया जाता है उसे अधिकारी खर्च करना नहीं चाहते। बजट जब खर्च करने के लिए जारी किया गया है तो उसे खर्च करने में आखिर लेटलतीफी क्याें की जा रही है। इससे तो लगता है या तो अधिकारी बजट को खर्च करना नहीं चाहते या फिर बजट में बड़ा गोलमाल करने की इच्छा है।

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