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Yamuna Nagar News: स्वस्थ रहने के लिए मस्तिष्क को दें आराम
Mon, 22 Jul 2024 04:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 22 Jul 2024 04:09 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। आप बिस्तर पर लेट कर टीवी या मोबाइल देख रहे हों या फिर कुर्सी पर बैठ कर कंप्यूटर पर काम कर रहे हों। इस क्रिया से आपके शरीर को तो आराम मिलता है लेकिन मस्तिष्क को नहीं। लोग सोचते हैं कि हम कोई काम नहीं कर रहे हैं तो हमारा मस्तिष्क भी काम नहीं कर रहा। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।
मस्तिष्क को आराम नहीं मिलने के कारण ही न्यूरो के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। जिस कारण लोग टेंशन, नींद न आना, बेचैनी समेत अन्य बीमारियों का सामना कर रहे हैं। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी मनोचिकित्सकों के पास बड़ी संख्या में इन बीमारियों के मरीज पहुंच रहे हैं। कुछ लोग तो ऐसी खराब हालत में आते हैं कि उन्हें अस्पताल में भर्ती तक करना पड़ जाता है।
स्वास्थ्य विभाग के डिस्ट्रिक्ट मेंटल हेल्थ के मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर नवीन शर्मा ने बताया कि मस्तिष्क को आराम न मिलने की बड़ी वजह लोगों की दिनचर्या में बड़ा बदलाव आना है। लोगों ने अपनी दिनचर्या को काफी व्यस्त बना लिया है। शरीर को स्वास्थ्य रखने के लिए तो लोग दवा ले रहे हैं, जिम में जाते हैं परंतु मस्तिष्क के स्वास्थ्य को लेकर लोग बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।
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बदलते लाइफ स्टाइल की वजह से लोगों की जरूरतें दिन प्रतिदिन बढ़ रही हैं। साथ ही मोबाइल, कंप्यूटर व टीवी पर ऑन स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है। इससे मस्तिष्क को आराम करने का समय नहीं मिल रहा। जब तक हम कंप्यूटर या मोबाइल पर काम कर रहे होते हैं तो हमारा मस्तिष्क तेजी से अपना काम कर रहा होता है। खासकर आजकल जो 15 से 20 सेकेंड की रील सोशल मीडिया पर आ रही हैं यह लोगों का ध्यान बहुत ज्यादा भंग कर रही हैं।
डॉ. शर्मा ने बताया कि अब स्क्रीन टाइम कम करने की बहुत ज्यादा जरूरत है। डिजिटल युग में कंप्यूटर पर काम ज्यादा करते हैं तो कुछ देर आंखों को बंद करके बैठना चाहिए। बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें। संगीत मन को सुकून देता है। संगीत को सुनना चाहिए न की देखना। काफी लोग मोबाइल पर वीडियो गीत चलाकर बैठ जाते हैं। संगीत को यदि आंख बंद करके सुनेंगे तो यह मस्तिष्क के लिए ज्यादा अच्छा रहता है। संभव हो सके तो सुबह के समय थोड़ी देर योग जरूर करें।
दोस्तों के साथ समय जरूर बिताएं : डॉ. शर्मा
डॉ. नवीन शर्मा ने बताया कि मेलजोल कम होने से लोगों का सामाजिक दायरा भी कम होता जा रहा है। यदि किसी रिश्तेदार से भी मिलने जा रहे हैं तो उनसे बात करने के बजाया हम मोबाइल में व्यस्त हो जाते हैं। करीब 70 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो अपने मस्तिष्क को ठीक से आराम नहीं देते। पहले लोग ट्रेन या बस से सफर करते थे तो साथ बैठे लोगों को अपना दोस्त बना लेते थे। अब ट्रेन व बसों में भी मोबाइल देख कर समय बीता रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि दोस्तों के साथ अपना समय जरूर बिताएं। खेल भी खेलना जरूरी हैं। खासकर बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने की बहुत ज्यादा जरूरत है। अक्सर हम देखते हैं कि बच्चों से यदि मोबाइल छीन लें तो वह गुस्सा करते हैं या फिर चिड़चिड़े हो जाते हैं।
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यमुनानगर। आप बिस्तर पर लेट कर टीवी या मोबाइल देख रहे हों या फिर कुर्सी पर बैठ कर कंप्यूटर पर काम कर रहे हों। इस क्रिया से आपके शरीर को तो आराम मिलता है लेकिन मस्तिष्क को नहीं। लोग सोचते हैं कि हम कोई काम नहीं कर रहे हैं तो हमारा मस्तिष्क भी काम नहीं कर रहा। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।
मस्तिष्क को आराम नहीं मिलने के कारण ही न्यूरो के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। जिस कारण लोग टेंशन, नींद न आना, बेचैनी समेत अन्य बीमारियों का सामना कर रहे हैं। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी मनोचिकित्सकों के पास बड़ी संख्या में इन बीमारियों के मरीज पहुंच रहे हैं। कुछ लोग तो ऐसी खराब हालत में आते हैं कि उन्हें अस्पताल में भर्ती तक करना पड़ जाता है।
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स्वास्थ्य विभाग के डिस्ट्रिक्ट मेंटल हेल्थ के मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर नवीन शर्मा ने बताया कि मस्तिष्क को आराम न मिलने की बड़ी वजह लोगों की दिनचर्या में बड़ा बदलाव आना है। लोगों ने अपनी दिनचर्या को काफी व्यस्त बना लिया है। शरीर को स्वास्थ्य रखने के लिए तो लोग दवा ले रहे हैं, जिम में जाते हैं परंतु मस्तिष्क के स्वास्थ्य को लेकर लोग बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।
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बदलते लाइफ स्टाइल की वजह से लोगों की जरूरतें दिन प्रतिदिन बढ़ रही हैं। साथ ही मोबाइल, कंप्यूटर व टीवी पर ऑन स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है। इससे मस्तिष्क को आराम करने का समय नहीं मिल रहा। जब तक हम कंप्यूटर या मोबाइल पर काम कर रहे होते हैं तो हमारा मस्तिष्क तेजी से अपना काम कर रहा होता है। खासकर आजकल जो 15 से 20 सेकेंड की रील सोशल मीडिया पर आ रही हैं यह लोगों का ध्यान बहुत ज्यादा भंग कर रही हैं।
डॉ. शर्मा ने बताया कि अब स्क्रीन टाइम कम करने की बहुत ज्यादा जरूरत है। डिजिटल युग में कंप्यूटर पर काम ज्यादा करते हैं तो कुछ देर आंखों को बंद करके बैठना चाहिए। बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें। संगीत मन को सुकून देता है। संगीत को सुनना चाहिए न की देखना। काफी लोग मोबाइल पर वीडियो गीत चलाकर बैठ जाते हैं। संगीत को यदि आंख बंद करके सुनेंगे तो यह मस्तिष्क के लिए ज्यादा अच्छा रहता है। संभव हो सके तो सुबह के समय थोड़ी देर योग जरूर करें।
दोस्तों के साथ समय जरूर बिताएं : डॉ. शर्मा
डॉ. नवीन शर्मा ने बताया कि मेलजोल कम होने से लोगों का सामाजिक दायरा भी कम होता जा रहा है। यदि किसी रिश्तेदार से भी मिलने जा रहे हैं तो उनसे बात करने के बजाया हम मोबाइल में व्यस्त हो जाते हैं। करीब 70 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो अपने मस्तिष्क को ठीक से आराम नहीं देते। पहले लोग ट्रेन या बस से सफर करते थे तो साथ बैठे लोगों को अपना दोस्त बना लेते थे। अब ट्रेन व बसों में भी मोबाइल देख कर समय बीता रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि दोस्तों के साथ अपना समय जरूर बिताएं। खेल भी खेलना जरूरी हैं। खासकर बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने की बहुत ज्यादा जरूरत है। अक्सर हम देखते हैं कि बच्चों से यदि मोबाइल छीन लें तो वह गुस्सा करते हैं या फिर चिड़चिड़े हो जाते हैं।