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Yamuna Nagar News: घट स्थापना आज, मां के जयकारों से गूंजेंगे मंदिर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Apr 2024 04:03 AM IST
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Ghat Sthapana today, temples will echo with the praises of Mother Goddess

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जगाधरी। चैत्र माह की प्रतिपदा के साथ नौ देवियों की पूजा का उत्सव नवरात्रि पर्व व भारतीय नववर्ष का शुभारंभ आज से हो गया है। मंगलवार को पहले नवरात्रि पर घट स्थापना कर मां शैलपुत्री की पूजा व व्रत किया जाएगा।
इसी के चलते जिले के तमाम दुर्गा मंदिरों को आकर्षक लाइटिंग व फूलों के साथ सजाया गया है। मंदिरों के बाहर प्रशाद की दुकानें सज गईं है और लोगों ने आज से अपनी श्रद्धा अनुसार व्रत की तैयारी भी कर ली है।श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इस दौरान बाजार में भी हलचल नजर आई। तमाम दुर्गा मंदिरों में आज से मां के जयकारों की गूंज रहेगी।
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नवरात्र की पूर्व संध्या पर लोगों ने घरों, प्रतिष्ठानों की सफाई कर मां की चौकी स्थापित करने की तैयारियां कीं। इस बार चैत्र नवरात्रि नौ से 17 अप्रैल तक रहेंगे। पहले दिन घट स्थापना के साथ मां के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है। मां का यह स्वरूप भक्तों को सुख, समृद्धि, शांति, वैभव व कीर्ति का वरदान देती हैं।
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ज्योतिषाचार्य पंडित महेश शांडिल्य ने बताया कि मां की विधि विधान से पूजा करने पर भक्तों के सर्व मनोरथ पूर्ण होते हैं और सभी पापों कर्मों का नाश होता है। मां की कृपा से भक्त धर्म के मार्ग पर चलकर मोक्ष प्राप्त करता है।





ऐसे करें घट स्थापना व मां शैलपुत्री की पूजा
पंडित महेश शांडिल्य ने बताया कि घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह छह बजकर दो मिनट से 10 बजकर 16 मिनट तक होगा। घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस दौरान मिट्टी का घड़ा मुहूर्त के अनुसार घर के ईशान कोण में स्थापित करना चाहिए। घट में पहले थोड़ी मिट्टी डालें और फिर जौं डालें। इसके बाद पूजन करें। जहां घट स्थापित करने से वह स्थान साफ कर वहां गंगा जल छिड़क कर शुद्ध करें। इसके बाद एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। फिर मां दुर्गा का चित्र या मूर्ति अब एक तांबे के कलश में जल भरें और उसके ऊपरी भाग पर लाल कलावा बांधें। कलश में सिक्का, अक्षत, सुपारी, लौंग का जोड़ा, दूर्वा घास डालें। कलश के ऊपर आम के पत्ते रखें और उस पर नारियल लाल कपड़े से लपेटकर रखें। कलश के आसपास फल, मिठाई और प्रसाद रखे। कलश स्थापना पूरी कर मां की पूजा करें।







ऐसा है मां शैलपुत्री का स्वरूप
पंडित महेश शांडिल्य ने बताया कि मां शैलपुत्री मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप है। जो बेहद ममता व करुणामय है। मां शैलपुत्री की सवारी वृषभ है। मां के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल पुष्प है। मां के मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है। मां शैलपुत्री चंद्रमा को दर्शाती हैं। इसलिए इनकी पूजा व मंत्र जाप से चंद्रमा संबंधित दोष भी दूर होते हैं। मां दुर्गा के इस स्वरूप को शैल के समान यानी सफेद वस्तुएं प्रिय हैं। ऐसे में मां को सफेद वस्त्रों के साथ भोग में भी सफेद मिष्ठान और घी अर्पित किए जाते हैं। इससे माता रानी प्रसन्न होती हैं। मां शैलपुत्री का पूजन करने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है।
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