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Yamuna Nagar News: पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को बंटवारे के बाद सरांवा में अलॉट हुई थी जमीन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 28 Dec 2024 01:29 AM IST
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Former PM Manmohan Singh was allotted land in Saranva after partition.
साढौरा। अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के जिला चकवाल के गाह गांव में जन्मे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बंटवारे के बाद भारत आने पर साढौरा के समीप सरांवा गांव में लगभग छह एकड़ खेती के लिए जमीन अलॉट हुई थी। उन्हें ये जमीन अविभाजित पंजाब की उनकी मलकियत की जमीन के बदले में अलॉट की गई थी। मनमोहन सिंह का परिवार बंटवारे के बाद अमृतसर बस गया था। उनके परिवार ने सरांवा गांव में अलॉट की गई जमीन पर कभी भी खुद खेती नहीं की थी। कुछ साल तक नौकर इस जमीन पर खेती करते रहे। कुछ समय बाद में उनके परिवार ने इस जमीन को बेच दिया।
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मनमोहन सिंह खुद कभी सरांवा तो नहीं आए लेकिन उनके रिश्ते के भाई 80 वर्षीय इंद्रजीत सिंह कोहली अब भी सरांवा में ही रहते हैं। सरांवा में ज्ञानी जी के नाम से प्रसिद्ध इंद्रजीत सिंह कोहली बीएसएनएल से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। मनमोहन सिंह की तरह ही इंद्रजीत सिंह की रगों में समाजसेवा व धर्म के प्रति आस्था का खून दौड़ता है। यही कारण है कि समाजसेवा के कारण इंद्रजीत सिंह ने अविवाहित ही रहने का निर्णय करके अपना समस्त जीवन समाज व धर्म को समर्पित किया हुआ है। इन दिनों वह चंडीगढ़ में रहने वाले अपने छोटे भाई हरिंद्र पाल सिंह और भाभी प्रीतपाल कौर के पास गए हुए हैं। मनमोहन सिंह के निधन के संबंध में इंद्रजीत सिंह से फोन पर बात हुई। उन्होंने बताया कि वह मनमोहन सिंह से मिलने कभी नहीं गए लेकिन दिल्ली में रहने वाले उनके बड़े भाई हरजीत सिंह कई बार मनमोहन सिंह से मिल चुके हैं।
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गौरतलब है कि जिला चकवाल के कई परिवारों को बंटवारे के बाद सरांवा गांव में जमीन अलॉट हुई थी। तब जिला चकवाल के कई परिवार साढौरा में आकर बस गए थे। जिन्हें आज भी चकवाल बिरादरी के नाम से जाना जाता है। इन्हीं में से एक बुजुर्ग विश्वामित्र ओबराय ने बताया कि अविभाजित भारत में मनमोहन सिंह के चक गाह से छह किलोमीटर दूरी पर उनका भी चक खड़क गांव था। विश्वामित्र ओबराय भी मनमोहन सिंह के निधन से अत्यंत गमगीन हैं।
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