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Yamuna Nagar News: कई जगह शुरू नहीं हो सके बाढ़ से बचाव के काम, 30 तक कैसे होंगे पूरे

Tue, 02 Jun 2026 01:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 02 Jun 2026 01:59 AM IST
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Flood relief operations could not commence in several areas; how will they be completed by the 30th?
टापू कमालपुर में पिछले साल बाढ़ के दौरान हुआ भूमि कटाव। आर्काइ‍व
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिले में इस बार सिंचाई विभाग की ओर से कराए जा रहे बाढ़ बचाव कार्यों की धीमी रफ्तार ने यमुना, सोम और पथराला नदियों से सटे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने सभी बाढ़ बचाव कार्य 30 जून तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए समय पर कार्य पूरे होने की संभावना कम दिखाई दे रही है।
जिले में यमुना, सोम और पथराला नदियों के करीब 152 किलोमीटर क्षेत्र में 18 प्रमुख स्थानों पर बाढ़ बचाव कार्य किए जाने हैं। हथनीकुंड बैराज से गुमथला तक यमुना नदी की लंबाई करीब 70 किलोमीटर है। सोम नदी 42 किलोमीटर और पथराला नदी लगभग 40 किलोमीटर क्षेत्र में बहती है।
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सबसे अधिक चिंता टापू कमालपुर गांव के लोगों को सता रही है। पिछले वर्ष आई बाढ़ के दौरान यमुना नदी का पानी गांव की आखिरी आबादी से महज 60 फीट की दूरी तक पहुंच गया था। गांव के विकास राणा व अन्य का कहना है कि यदि इस बार समय रहते मजबूत सुरक्षा प्रबंध नहीं किए गए तो गांव को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ सकता है।
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टापू कमालपुर में अभी तक केवल पत्थरों की आपूर्ति का कार्य चल रहा है। जहां कटाव हुआ था, वहां कुछ मीटर क्षेत्र में ही पत्थर लगाए गए हैं। अधिकांश पत्थर अभी पैमाइश के लिए रखे गए हैं। जब तक पैमाइश पूरी नहीं होगी, तब तक निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सकेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर कब पैमाइश पूरी होगी और कब बचाव कार्य शुरू होंगे।
ग्रामीणों ने पत्थरों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ट्रकों में बड़े पत्थरों के साथ छोटे आकार के पत्थर भी लाए जा रहे हैं और उन्हें भी निर्माण में शामिल किया जा रहा है। बाढ़ के तेज बहाव में छोटे पत्थर तो दूर, कई बार बड़े पत्थर भी बह जाते हैं। ऐसे में कमजोर सामग्री का उपयोग भविष्य में नुकसान का कारण बन सकता है।
जिले में इस वर्ष यमुना नदी, सोम नदी और अन्य बरसाती नदियों पर बाढ़ से बचाव के लिए 37 राहत एवं सुरक्षा कार्य प्रस्तावित हैं। इन कार्यों पर 47 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जानी है। इनमें स्टोन स्टड, स्टोन पिचिंग, बंध निर्माण और पंप हाउस जैसे कार्य शामिल हैं।
यहां बाढ़ का सबसे ज्यादा खतरा

जिले के मालीमाजरा, नवाजपुर, लाक्कड़, लेदी, बेलगढ़, टापू कमालपुर, औधरी, लापरा, बीबीपुर, मांडेवाला, खानूवाला, आंबवाली, टिब्बड़ियां, काटरवाली, रामपुर गेंडा, रणजीतपुर, भंगेड़ा, मलिकपुर, मुजाफत, नगली, प्रलादपुर, पौबारी, संधाला, संधाली, लालछप्पर, मॉडल टाउन करेहड़ा, उन्हेड़ी और गुमथला सहित दर्जनों गांव हर वर्ष बाढ़ के खतरे से प्रभावित होते हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों के निवासी रमेश कुमार, तेजिंद्र, रामबीर, जसवंत का कहना है कि यदि मानसून से पहले सभी कार्य पूरे नहीं हुए तो पिछले वर्षों की तरह एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से कार्यों में तेजी लाने की मांग की है ताकि समय रहते गांवों और कृषि भूमि को सुरक्षित किया जा सके।

सिंचाई विभाग की तरफ से बाढ़ बचाव राहत कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। कुछ कार्य अगले सप्ताह तक पूरे हो जाएंगे। जो बचेंगे वह भी समय पर पूरे कर लिए जाएंगे। -राहिल सैनी, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।

टापू कमालपुर में पिछले साल बाढ़ के दौरान हुआ भूमि कटाव। आर्काइव

टापू कमालपुर में पिछले साल बाढ़ के दौरान हुआ भूमि कटाव। आर्काइव

टापू कमालपुर में पिछले साल बाढ़ के दौरान हुआ भूमि कटाव। आर्काइव

टापू कमालपुर में पिछले साल बाढ़ के दौरान हुआ भूमि कटाव। आर्काइव

टापू कमालपुर में पिछले साल बाढ़ के दौरान हुआ भूमि कटाव। आर्काइव

टापू कमालपुर में पिछले साल बाढ़ के दौरान हुआ भूमि कटाव। आर्काइव

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