{"_id":"6a9dc8d94f2b5b8fe7061000","slug":"the-sadhvi-shared-profound-secrets-of-life-with-the-congregation-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1020-162460-2026-09-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: साध्वी ने संगत को बताए जीवन के गूढ़ रहस्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: साध्वी ने संगत को बताए जीवन के गूढ़ रहस्य
Mon, 07 Sep 2026 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 07 Sep 2026 01:41 AM IST
विज्ञापन
प्रवचन करतीं साध्वीं। संस्थान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग हुआ। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मीना भारती जीव के गूढ़ रहस्य बताए। प्रवचन में उन्होंने मानव जीवन से जुड़े पहलुओं को उजागर करते हुए जन्म और मृत्यु को जीवन के दो शाश्वत सत्य बताया।
उन्होंने कहा कि जन्म व मृत्यु से कोई भी प्राणी अछूता नहीं है। मनुष्य जन्म लेकर संसार में आता है और एक निश्चित समय के बाद भौतिक शरीर का त्याग कर देता है। परंतु मनुष्य का अस्तित्व केवल जन्म से मृत्यु तक सीमित नहीं है। साध्वी ने कहा कि अध्यात्म ने सदैव मनुष्य को इस गहन प्रश्न का उत्तर खोजने के लिए प्रेरित किया है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को आत्मा के इसी शाश्वत स्वरूप का बोध करवाते हैं। साध्वी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि है कि आत्मा न जन्म लेती है और न ही मृत्यु को प्राप्त होती है। मनुष्य की सबसे बड़ी भूल यह है कि वह स्वयं को शरीर मानकर जीता है। इसी देहाभिमान के कारण जन्म का आनंद और मृत्यु का भय उसे प्रभावित करता है। ब्रह्मज्ञान मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप उस शाश्वत आत्मतत्त्व का प्रत्यक्ष बोध करवाने की दिशा में ले जाता है।
साध्वी ने कहा कि केवल पुस्तकीय ज्ञान या धार्मिक चर्चाओं से आत्मतत्त्व का साक्षात्कार संभव नहीं है। गुरु के मार्गदर्शन में की गई ध्यान-साधना एवं भक्ति मनुष्य को जन्म व मृत्यु के भयावह चक्र से बाहर निकाल देती है। भक्ति केवल व्रत उपवास एवं पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है अपितु ब्रह्म ज्ञान के द्वारा आत्म साक्षात्कार कर परमात्मा के प्रति प्रेम और समर्पण की अनुभूति है। सद्गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक है। यही ज्ञान हमें बाहरी पहचान से ऊपर उठाकर शाश्वत अस्तित्व का बोध करवाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग हुआ। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मीना भारती जीव के गूढ़ रहस्य बताए। प्रवचन में उन्होंने मानव जीवन से जुड़े पहलुओं को उजागर करते हुए जन्म और मृत्यु को जीवन के दो शाश्वत सत्य बताया।
उन्होंने कहा कि जन्म व मृत्यु से कोई भी प्राणी अछूता नहीं है। मनुष्य जन्म लेकर संसार में आता है और एक निश्चित समय के बाद भौतिक शरीर का त्याग कर देता है। परंतु मनुष्य का अस्तित्व केवल जन्म से मृत्यु तक सीमित नहीं है। साध्वी ने कहा कि अध्यात्म ने सदैव मनुष्य को इस गहन प्रश्न का उत्तर खोजने के लिए प्रेरित किया है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को आत्मा के इसी शाश्वत स्वरूप का बोध करवाते हैं। साध्वी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि है कि आत्मा न जन्म लेती है और न ही मृत्यु को प्राप्त होती है। मनुष्य की सबसे बड़ी भूल यह है कि वह स्वयं को शरीर मानकर जीता है। इसी देहाभिमान के कारण जन्म का आनंद और मृत्यु का भय उसे प्रभावित करता है। ब्रह्मज्ञान मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप उस शाश्वत आत्मतत्त्व का प्रत्यक्ष बोध करवाने की दिशा में ले जाता है।
विज्ञापन
साध्वी ने कहा कि केवल पुस्तकीय ज्ञान या धार्मिक चर्चाओं से आत्मतत्त्व का साक्षात्कार संभव नहीं है। गुरु के मार्गदर्शन में की गई ध्यान-साधना एवं भक्ति मनुष्य को जन्म व मृत्यु के भयावह चक्र से बाहर निकाल देती है। भक्ति केवल व्रत उपवास एवं पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है अपितु ब्रह्म ज्ञान के द्वारा आत्म साक्षात्कार कर परमात्मा के प्रति प्रेम और समर्पण की अनुभूति है। सद्गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक है। यही ज्ञान हमें बाहरी पहचान से ऊपर उठाकर शाश्वत अस्तित्व का बोध करवाता है।

प्रवचन करतीं साध्वीं। संस्थान
विज्ञापन