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Yamuna Nagar News: 2.98 लाख का मेडिक्लेम खारिज करने पर लगाया जुर्माना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 28 Aug 2026 02:14 AM IST
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Fine imposed for rejecting a mediclaim of rs 2.98 lakh.
करनाल। स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेने के बाद इलाज पर खर्च हुए 2,98,076 रुपये का क्लेम खारिज करना बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से क्लेम खारिज करने को अवैध करार देते हुए बीमाधारक के पक्ष में फैसला सुनाया है।
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आयोग ने कंपनी को उपचार की पूरी राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के साथ मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के 25 हजार रुपये समेत मुकदमे के खर्च के 11 हजार रुपये अलग से देने के आदेश दिए हैं। भुगतान आदेश की प्रति मिलने के 45 दिन के भीतर करना होगा। फैसला आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह, सदस्य नीरू अग्रवाल और सदस्य सरबजीत कौर की पीठ ने सुनाया है।
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मामला 65 वर्षीय मुरारी लाल जैन की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने कैनरा बैंक के खाताधारकों के लिए उपलब्ध ग्रुप मेडिक्लेम योजना के तहत बजाज एलियांज की 5 लाख रुपये की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। इसके लिए उन्होंने 21,738 रुपये प्रीमियम जमा कराया था। पॉलिसी 6 जून 2023 से 5 जून 2024 तक प्रभावी थी।
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13 अगस्त 2023 को मुरारी लाल शौचालय से निकलते समय फिसलकर घायल हो गए। तेज दर्द और चलने में परेशानी के बाद उन्हें नई दिल्ली के सेहगल नियो अस्पताल में भर्ती कराया गया। 14 अगस्त को उनके दाहिने कूल्हे का ऑपरेशन हुआ और 16 अगस्त को छुट्टी दे दी गई। अस्पताल बीमा कंपनी के कैशलेस पैनल में नहीं था, इसलिए उन्होंने इलाज पर 2,98,076 रुपये अपनी जेब से खर्च किए। इसके बाद मूल बिल और मेडिकल दस्तावेजों के साथ बीमा कंपनी में क्लेम दाखिल किया।
कंपनी की दलील
कंपनी ने क्लेम की जांच कराई और आरोप लगाया कि मुरारी लाल को लंबे समय से हाइपरटेंशन था और वर्ष 2001 में उनका दाहिना हिप रिप्लेसमेंट हो चुका था। कंपनी के अनुसार यह जानकारी पॉलिसी लेते समय प्रस्ताव फॉर्म में नहीं दी गई थी। इसी आधार पर क्लेम खारिज कर दिया गया। कंपनी ने पॉलिसी की पूर्व बीमारी से संबंधित प्रतीक्षा अवधि का भी हवाला दिया। आयोग ने कंपनी की दलील स्वीकार नहीं की। आयोग ने कहा कि कंपनी यह प्रमाणित नहीं कर सकी कि वर्ष 2001 में बीमाधारक का उपचार हुआ था। क्लेम को केवल अनुमान और धारणा के आधार पर खारिज किया गया।


पॉलिसी जारी करने से पहले करवानी थी जांच
फैसले में आयोग ने यह भी टिप्पणी की कि पॉलिसी रिकॉर्ड के अनुसार मुरारी लाल की जन्मतिथि 5 अगस्त 1958 थी और पॉलिसी लेते समय उनकी उम्र 64 वर्ष से अधिक थी। आयोग ने कहा कि ऐसे मामलों में आईआरडीएआई के दिशानिर्देशों के अनुसार बीमा कंपनी को पॉलिसी जारी करने से पहले मेडिकल जांच करानी चाहिए थी। मेडिकल जांच कराए बिना पॉलिसी जारी करने के बाद पूर्व बीमारी नहीं बताने के आधार पर क्लेम खारिज करना उचित नहीं माना जा सकता।
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