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जल संरक्षण के बिना खेती नामुमकिन : डॉ. गोयल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Jun 2021 12:54 AM IST
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Farming impossible without water conservation, Yamunanagar
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। गांव मुस्ताफाबाद में कृषि विज्ञान केंद्र दामला की ओर से सोमवार को जल संरक्षण अभियान के अंतर्गत किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती के साथ साथ जल संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ. एनके गोयल ने बताया कि यदि जल संरक्षण के बारे में नहीं सोचा गया तो खेती करना नामुमकिन हो जाएगी। उन्होंने बताया कि जल संरक्षण के लिए किसानों को खेत समतल अवश्य करना चाहिए। खेत में जल की क्षमता को बढ़ाने के लिए फसल अवशेषों को मिलाना चाहिए। हरी खाद तैयार कर खेत में मिलाएं और बूंद-बूंद सिंचाई विधि का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए। उन्होंने बताया कि धान की कटाई उपरांत उसके खड़े फानों में गेहूं की बिजाई करने से जल संरक्षण को बढ़ावा तो मिलता ही है साथ ही साथ खेत की उर्वरा शक्ति भी बनी रहती है।
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प्रशिक्षण सहायक करण सिंह सैनी ने किसानों को सब्जियों में जल संरक्षण, महत्व तथा सब्जियों में पाए जाने वाले लाभकारी गुणों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि आज के रासायनिक युग में सब्जियां बहुत ही जहरीली हो चुकी हैं, जिसका परिणाम कैंसर जैसी बीमारियों को बढ़ावा देना बन गया है। उन्होंने फसल, सब्जियों में अच्छी जल निकासी बनाए रखने की भी सलाह दी। इस अवसर पर ग्राम मुस्तफाबाद के लगभग 50 प्रगतिशील किसान व किसान महिलाएं मौजूद रहीं।
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पानी बचाने के लिए करने होंगे प्रयास : अरोड़ा
यमुनानगर। डीसी गिरीश अरोड़ा ने जिलेवासियों से अपील की है कि वह पानी का महत्व समझें और पानी का दुरुपयोग न करें। पानी का दुरुपयोग भू-जलस्तर को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि नालियों और सड़कों पर व्यर्थ पानी बहने से गंदगी बढ़ती है। गर्मी के दिनों में पानी की बचत पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा राज्य में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। धान की खेती करने पर ज्यादा पानी की खपत होती है। यहीं कारण है कि भूजल स्तर बड़ी तेजी से नीचे जा रहा है। एक किलो चावल की पैदावार करने में करीब पांच हजार लीटर पानी की जरूरत पड़ती है। भू-जलस्तर बढ़ाने के लिए सरकार ने अब धान के बजाय दूसरी फसलों की पैदावार के लिए किसानोें को प्रेरित कर रही है। कपास, मक्का, दलहन, मूंगफली, तिल, ग्वार, अरंड, सब्जियां व फल की फसल पर सरकार प्रति एकड़ सात हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दे रही है। संवाद
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