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Yamuna Nagar News: पांच मंडियों में किसानों ने किया प्रदर्शन, मार्केट कमेटी कार्यालय पर लगाए ताले

Thu, 15 Oct 2026 02:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Thu, 15 Oct 2026 02:54 AM IST
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Farmers staged protests at five market yards and locked the market committee offices.
मार्केट कमेटी कार्यालय के बाहर नारेबाजी कर धरने पर बैठे किसान। संवाद
जगाधरी। धान खरीद में अनियमितता, उठान की धीमी गति, पोर्टल पेचिदगियां, मंड़ियों की समस्याओं को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से बुधवार को प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन जगाधरी, व्यासपुर, छछरौली, रादौर और साढौरा मंडी में बुलाया गया। इस दौरान संयुक्त मोर्चा के बैनर तले किसानों ने सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक पांचों मंडियों के मार्केट कमेटी कार्यालयों पर ताले लगा दिए। कार्यालयों पर ताला लगाकर किसानों ने वहीं धरना दिया। प्रदर्शन को देखते हुए सभी मंडियों में भारी पुलिस बल तैनात रहा। एक बजे किसानों ने ताला खोकर अपना प्रदर्शन समाप्त किया। जगाधरी अनाज मंडी में मार्केट कमेटी चेयरमैन विपुल गर्ग और राकेश त्यागी किसानों से मिलने पहुंचे। उन्होंने पदाधिकारियों से बात की और समाधान करवाने का आश्वासन दिया।
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किसानों ने खरीद प्रक्रिया सुचारु करने, गेट पास और पोर्टल संबंधी समस्याओं का समाधान करने तथा मंडियों में धान का उठान तेज करने की मांग उठाई। धान का भाव 3100 और गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की। खरीद प्रक्रिया की बाधाओं के कारण फसल बेचने के लिए किसानों को इंतजार करना पड़ रहा है। बेमौसम बारिश से खुले में पड़ी धान भीगने से नुकसान की आशंका बनी हुई है।
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भारतीय किसान यूनियन टिकैत के पदाधिकारी हरपाल सुढ़ैल ने कहा कि धान खरीद में नमी समेत अन्य शर्तें किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। गेट पास जारी होने और पोर्टल वेरिफिकेशन में दिक्कतों से खरीद प्रभावित हो रही है। बारिश के कारण खुले में रखी धान की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है, इसका किसानों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिलना चाहिए। मंडियों में खरीद और उठान की व्यवस्था में तेजी लाने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। इस दौरान यूनियन के प्यारेलाल तंवर, एआईकेएस जिला प्रधान हरभजन सिंह संधू, नायब सिंह, मान सिंह सहित अन्य पदाधिकारी व किसान मौजूद रहे। वहीं, मंडियों में पुलिस बल भी तैनात रहा।
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उधर, व्यासपुर में भारतीय किसान यूनियन व अखिल भारतीय किसान यूनियन के संयुक्त आह्वान पर किसानों ने मार्केट कमेटी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन कर विभाग व सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर रोष प्रकट किया। किसान यूनियन के प्रधान सुभाष हड़तौल व गुरभजन सिंह ने कहा कि मौजूदा समय में जिन किसानों को पंजीकरण रह गया, वह किया जाए। भविष्य में पोटर्ल प्रणाली पूरी तरह से बंद की जाए। जिन किसानों ने पॉपुलर के खेत में धान लगाया है, उनका पंजीकरण भी किया जाए। सरकार द्वारा प्रति एकड़ 27 क्विंटल की शर्त काे हटाकर इसे बढ़ाया जाए। धान में नमी मात्रा को 17 से बढ़ाकर 21 प्रतिशत तक किया जाए। मंडी में किसानों के द्वारा खरीदे धान का उठान 24 घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जाए। मंडी में धान लेकर आने वाले प्रत्येक किसान की फसल को तुरंत खरीद किया जाए। किसानों के प्रदर्शन व मांगों को लेकर तहसीलदार मौके पर पहुंचे और किसानों की मांगे उच्च अधिकारियों से अवगत करवाने का आश्वासन दिया।
वहीं साढौरा में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भाकियू कार्यकर्ताओं ने साढ़े 11 बजे मार्केट कमेटी कार्यालय के मुख्य गेट पर हरा परना बांधकर गेट बंद कर दिया।सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और वहीं धरने पर बैठ गए। इससे मार्केट कमेटी का कामकाज कुछ समय के लिए ठप्प हो गया। मार्केट कमेटी सचिव राजीव चोपड़ा ने मौके पर पहुंचकर किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े रहे।

भाकियू हलका प्रधान सतपाल मानकपुर और खंड प्रधान जनक राज पांडो ने कहा कि सरकार ने धान की खरीद पर कई तरह की अनावश्यक शर्तें लगा दी हैं, जो पूरी करना असंभव है। 22 प्रतिशत से ज्यादा नमी वाली धान नहीं ली जा रही, जबकि बारिश से धान में हल्की नमी बढ़ गई है। मामूली काले दाने या हल्के पीलेपन के नाम पर पूरी ट्राली रिजेक्ट कर दी जा रही है। मिलर और सरकारी एजेंसी एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ रहे हैं और किसान मंडी में कई दिन तक खुले आसमान के नीचे अपनी फसल की रखवाली रहने को मजबूर है।जसपाल सिंह नौशहरा ने कहा कि किसान कर्ज लेकर फसल उगाता है, लेकिन जब बेचने का समय आता है तो उसे दर-दर भटकना पड़ता है। इस दौरान सुभाष शर्मा सफीलपुर, जसपाल सिंह नौशहरा, बलविन्द्र सिंह नम्बरदार, कर्ण भोगपुर, कुलदीप पाण्डो, संजू शामपुर, खेमचंद मानकपुर, मोहित सरावीं, कुलविन्द्र सिंह, संजू भी मौजूद रहे।
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