फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   Farmers lost hope, got disappointed

किसानों की उम्मीद टूटी, हाथ लगी मायूसी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Feb 2022 12:54 AM IST
विज्ञापन
Farmers lost hope, got disappointed
फोटो: 31 से 35
विज्ञापन

किसानों उम्मीद टूटी, हाथ लगी मायूसी
किसान बोले : कर्ज माफी व एमएसपी पर सरकार ने साधी चुप्पी, बजट में किसानों का नहीं रखा ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए आम बजट से किसानों को निराशा हाथ लगी। किसान को उम्मीद थी कि सरकार किसानों को खुश करने के लिए उनकी कर्ज माफी, एमएसपी पर फसलों की खरीद या फिर डीजल सस्ती दर पर उपलब्ध कराने की घोषणा कर सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जिस कारण किसानों को मायूसी के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा। आम बजट को लेकर किसानों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी।
फोटो: 31
किसान विरोधी है बजट : हरपाल सिंह
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश संगठन सचिव हरपाल सुढल का कहना है कि लोकसभा में सरकार ने जो बजट पेश किया है उससे किसानों की झोली खाली रही। किसान कर्ज के बोझ तले दबा है, उम्मीद थी कि सभी किसानों का कर्जा माफ हो सकता है। डीजल का रेट 85 रुपये पर पहुंच गया है। ऐसे में बजट देख कर सभी किसानों को काफी निराशा हुई है। यह बजट पूरी तरह से किसान विरोधी है।
विज्ञापन

-----------
फोटो: 32
खाली रही किसानों की झोली : पिंटू राणा
भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष पिंटू राणा खानपुर का कहना है कि फसलों पर लागत मूल्य बढ़ता जा रहा है। यूरिया, डीजल, दवाइयां व कृषि उपकरण महंगे हो चुके हैं। किसान सालभर गर्मी, सर्दी व बरसात में खेत में काम करता है। फिर भी किसान को इतनी आमदनी नहीं हो पाती कि वह परिवार का गुजारा आसानी से कर सके। फसल का लाभकारी मूल्य भी आज किसान को नहीं मिल रहा। इस बजट से किसानों की झोली खाली रही।
विज्ञापन
विज्ञापन

---------
फोटो: 33
प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा दे रही सरकार : रामबीर चौहान
भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री रामबीर सिंह चौहान का कहना है कि सरकार ने पीपीपी मोड़ में नई योजनाएं शुरू करने की बात कही है। ऐसा करके सरकार प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा देना चाहती है। कम से कम किसान को फसल का इतना रेट तो दिया जाए कि उसका लागत मूल्य मिल जाए। अब खेती घाटे का सौदा बन गई है। सरकार को किसानों की चिंता बिल्कुल भी नहीं है।
---------------
फोटो: 34
किसानों पर ध्यान नहीं दिया : ईश्वर सिंह
गांव टोपरा कलां निवासी किसान ईश्वर सिंह का कहना है कि किसानों को फसलों के लिए खाद नहीं मिलता। बिजली के बिल लाखों रुपये में पहुंच गए हैं। अब तो खेती में किसान के लिए कुछ नहीं रह गया है। बजट से उम्मीद थी सरकार कर्जा माफ करेगी और फसलों के लिए मुफ्त में दवाइयां उपलब्ध कराने की घोषणा करेगी। परंतु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। एमएसपी लागू होगी या नहीं इस पर सरकार ने एक शब्द भी नहीं कहा।

-----------
फोटो: 35
झूठे सपने दिखा रही सरकार : ध्यान सिंह
गांव सुढैल निवासी किसान ध्यान सिंह का कहना है कि सरकार ने बजट में कहा है कि किसान आर्गेनिक खेती करें। इस खेती के लिए खेत को चार से पांच साल तक खाली छोड़ना होता है। उसमें कोई दवाई नहीं डाली जाती। यदि इतने साल खेत खाली छोड़ दिया तो किसान व उसका परिवार खाएगा क्या। या तो सरकार इतने साल में जितने की फसल होती है उसकी कीमत किसान को दे। ऐसे झूठे सपने किसानों को बजट में दिखाकर गुमराह करने की कोशिश की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed