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मंडियों में किसान और गेहूं की बेकद्री पर नहीं लगा ब्रेक
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
Updated Sun, 03 Apr 2016 12:52 AM IST
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यमुनानगर। मंडियों में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो गई है, लेकिन दो दिनों में मंडियों में गेहूं की आवक ना के बराबर होने से सरकारी खरीद नहीं हो पाई। किसान गेहूं की बालियों के पूरी तरह सूखने के बाद ही उसे मंडियों में लाने की सोच रहे हैं। ऐसे में खरीद शुरू होने के बावजूद मंडियां सूनी पड़ी हैं। उधर, जिला प्रशासन मंडियों की सुविधाओं व खरीद को चुस्त-दुरुस्त बनाने का दावा कर रहा है। मंडियों में गेहूं की खरीद को सुगम बनाने के लिए अब तक प्रशासनिक अधिकारियों की दो बैठकें हो चुकी हैं, जिसमें विभिन्न अधिकारियों की मंडी वाइज ड्यूटी तय कर दी गई है। मार्केट कमेटियों के सचिवों को जरूरी सुविधाएं जल्द से जल्द उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद हर साल किसानों को मंडियों में भारी दिक्कतों को सामना करना पड़ता है।
मंडियों में सामने आती हैं ये समस्याएं
हर साल खरीद सीजन में किसान मंडियों की सुविधाओं से असंतुष्ट नजर आते हैं। मंडी किसानों को हर बार इन दिक्कतों से दो-चार होना पड़ता है।
1. मंडियों में बिजली व्यवस्था पर्याप्त नहीं होती है, जिससे किसानों को गेहूं की सप्लाई व पानी की उपलब्धता में दिक्कत आती है।
2. मंडियों में सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं होती है। गेहूं की फसल से निकलने वाले अवशेष से गंदगी बढ़ती है।
3. गेहूं खरीद की बोली को लेकर किसानों को शिकायत रहती है कि खरीद करने वाले अधिकारी लेट आते हैं, जिस कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है।
4. मंडी में गेहूं की तुलाई के लिए भी किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
5. मंडियों में किसानों के ठहरने की व्यवस्था नहीं होती है, जिससे उन्हें रात में खुले में सोना पड़ता है। इससे किसान खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
6. मंडियों से गेहूं की उठान की समस्या हर बार सामने आती है। गेहूं का उठान धीमी गति से होने से मंडियां पूरी तरह गेहूं से अट जाती हैं, जिससे दूसरे किसानों को मंडी की सड़कों में गेहूं डालनी पड़ती है।
7. मंडियों की सड़कों की समय पर मरम्मत न होने के कारण सड़क पर डाली गई गेहूं खराब होती है।
8. मंडियों में किसानों के पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती है।
9. मंडियों में पर्याप्त शौचालय नहीं होते या शौचालय गंदगी से अटे रहते हैं। इस कारण किसानों व श्रमिकों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।
10. बेमौसम बरसात होने पर खुले में रखे गेहूं को ढंकने के लिए तिरपाल कम पड़ जाती है, जिससे गेंहू की बोरियों भीग जाती हैं।
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक सुरेंद्र कुमार से सीधी बात
सवाल-मंडियों में किसानों को ठहरने में दिक्कत आती है।
जवाब-डीसी ने मार्किट कमेटी के सचिवों को मंडियों में किसानों के ठहरने के उचित प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं।
सवाल-मंडियों में बिजली व सफाई व्यवस्था सही न होने की शिकायतें आती हैं।
जवाब-इस बार बिजली निगम के एसई को मंडियों में हर समय बिजली की निर्बाध आपूर्ति करने के निर्देश दिए गए हैं।
सवाल-मंडियों में खरीद की बोली के लिए कर्मचारी लेट आते हैं। गेहूं की तुलाई में भी किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
जवाब-मार्किट कमेटियों के सचिवों को बोली का रिकार्ड रजिस्टर मेें रखने को कहा गया है। साथ ही किसानों के मंडी में गेहूं लाते ही उसकी तुलाई सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
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सवाल-तिरपाल की कमी, सफाई व्यवस्था, सड़कों की मरम्मत, पेयजल व शौचालय की दिक्कत हर बार सामने आती हैं।
जवाब-सचिवों को इन दिक्कतों को दूर करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
सवाल-गेंहू की धीमी उठान की समस्या हर बार देखने को मिलती है।
किसानों के काम की बात.....
जिले में कुल 13 मंडियां हैं, जिनमें आठ स्थायी व पांच अस्थायी मंडियां हैं। इस बार एसफीआई भी गेहूं की खरीद करेगी। इसके अलावा फूड सप्लाई, हैफेड, एग्रो व एचडब्ल्यूसी भी किसानों का गेहूं खरीदेंगे।
-मंडी वाइज खरीद एजेंसियों का ब्यौरा-
बिलासपुर-सप्ताह के पहले, तीसरे, पांचवें दिन हैफेड व
दूसरे, चौथे, छठे व सातवें दिन एफसीआई खरीद करेगी।
छछरौली-पहले, तीसरे, पांचवे दिन फूड सप्लाई व दूसरे, चौथे, छठे व सातवें दिन हैफेड खरीद करेगी।
गुमथला राव-सातों दिन हैफेड खरीद करेगी।
जगाधरी-दूसरे व चौथे दिन फूड सप्लाई, पांचवें, छठे व सातवें दिन हैफेड तथा पहले व तीसरे दिन एग्रो गेहूं खरीदेगी।
जठलाना व खारवन-सातों दिन हैफेड गेहूं खरीदेगी।
खिजराबाद-दूसरे, चौथे दिन फूड सप्लाई तथा पहले, तीसरे, पांचवें, छठे व सातवें दिन हैफेड गेहूं खरीदेगी।
मुस्तफाबाद-पहले, तीसरे, पांचवें दिन फूड सप्लाई तथा दूसरे, चौथे, छठे व सातवें दिन हैफेड की खरीद है।
रादौर-दूसरे, चौथे, छठे व सातवें दिन हैफेड व पहले, तीसरे व पांचवे दिन एचडब्ल्यूसी गेहूं खरीदेगी।
रंजीतपुर-पहले, तीसरे, पांचवे दिन हैफेड तथा दूसरे, चौथे, छठे व सातवें दिन एफसीआई गेहूं खरीदेगी।
रसूलपुर-सातों दिन फूड सप्लाई की ख्ररीद है।
साढौरा-सातों दिन हैफेड की खरीद है।
यमुनानगर- पहले, दूसरे, चौथे दिन फूड सप्लाई तथा तीसरे, पांचवे, छठे व सातवें दिन एचडब्ल्यूसी गेहूं खरीदेगी।
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मंडियों में सामने आती हैं ये समस्याएं
हर साल खरीद सीजन में किसान मंडियों की सुविधाओं से असंतुष्ट नजर आते हैं। मंडी किसानों को हर बार इन दिक्कतों से दो-चार होना पड़ता है।
1. मंडियों में बिजली व्यवस्था पर्याप्त नहीं होती है, जिससे किसानों को गेहूं की सप्लाई व पानी की उपलब्धता में दिक्कत आती है।
2. मंडियों में सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं होती है। गेहूं की फसल से निकलने वाले अवशेष से गंदगी बढ़ती है।
3. गेहूं खरीद की बोली को लेकर किसानों को शिकायत रहती है कि खरीद करने वाले अधिकारी लेट आते हैं, जिस कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है।
4. मंडी में गेहूं की तुलाई के लिए भी किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
5. मंडियों में किसानों के ठहरने की व्यवस्था नहीं होती है, जिससे उन्हें रात में खुले में सोना पड़ता है। इससे किसान खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
6. मंडियों से गेहूं की उठान की समस्या हर बार सामने आती है। गेहूं का उठान धीमी गति से होने से मंडियां पूरी तरह गेहूं से अट जाती हैं, जिससे दूसरे किसानों को मंडी की सड़कों में गेहूं डालनी पड़ती है।
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7. मंडियों की सड़कों की समय पर मरम्मत न होने के कारण सड़क पर डाली गई गेहूं खराब होती है।
8. मंडियों में किसानों के पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती है।
9. मंडियों में पर्याप्त शौचालय नहीं होते या शौचालय गंदगी से अटे रहते हैं। इस कारण किसानों व श्रमिकों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।
10. बेमौसम बरसात होने पर खुले में रखे गेहूं को ढंकने के लिए तिरपाल कम पड़ जाती है, जिससे गेंहू की बोरियों भीग जाती हैं।
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक सुरेंद्र कुमार से सीधी बात
सवाल-मंडियों में किसानों को ठहरने में दिक्कत आती है।
जवाब-डीसी ने मार्किट कमेटी के सचिवों को मंडियों में किसानों के ठहरने के उचित प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं।
सवाल-मंडियों में बिजली व सफाई व्यवस्था सही न होने की शिकायतें आती हैं।
जवाब-इस बार बिजली निगम के एसई को मंडियों में हर समय बिजली की निर्बाध आपूर्ति करने के निर्देश दिए गए हैं।
सवाल-मंडियों में खरीद की बोली के लिए कर्मचारी लेट आते हैं। गेहूं की तुलाई में भी किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
जवाब-मार्किट कमेटियों के सचिवों को बोली का रिकार्ड रजिस्टर मेें रखने को कहा गया है। साथ ही किसानों के मंडी में गेहूं लाते ही उसकी तुलाई सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
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सवाल-तिरपाल की कमी, सफाई व्यवस्था, सड़कों की मरम्मत, पेयजल व शौचालय की दिक्कत हर बार सामने आती हैं।
जवाब-सचिवों को इन दिक्कतों को दूर करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
सवाल-गेंहू की धीमी उठान की समस्या हर बार देखने को मिलती है।
किसानों के काम की बात.....
जिले में कुल 13 मंडियां हैं, जिनमें आठ स्थायी व पांच अस्थायी मंडियां हैं। इस बार एसफीआई भी गेहूं की खरीद करेगी। इसके अलावा फूड सप्लाई, हैफेड, एग्रो व एचडब्ल्यूसी भी किसानों का गेहूं खरीदेंगे।
-मंडी वाइज खरीद एजेंसियों का ब्यौरा-
बिलासपुर-सप्ताह के पहले, तीसरे, पांचवें दिन हैफेड व
दूसरे, चौथे, छठे व सातवें दिन एफसीआई खरीद करेगी।
छछरौली-पहले, तीसरे, पांचवे दिन फूड सप्लाई व दूसरे, चौथे, छठे व सातवें दिन हैफेड खरीद करेगी।
गुमथला राव-सातों दिन हैफेड खरीद करेगी।
जगाधरी-दूसरे व चौथे दिन फूड सप्लाई, पांचवें, छठे व सातवें दिन हैफेड तथा पहले व तीसरे दिन एग्रो गेहूं खरीदेगी।
जठलाना व खारवन-सातों दिन हैफेड गेहूं खरीदेगी।
खिजराबाद-दूसरे, चौथे दिन फूड सप्लाई तथा पहले, तीसरे, पांचवें, छठे व सातवें दिन हैफेड गेहूं खरीदेगी।
मुस्तफाबाद-पहले, तीसरे, पांचवें दिन फूड सप्लाई तथा दूसरे, चौथे, छठे व सातवें दिन हैफेड की खरीद है।
रादौर-दूसरे, चौथे, छठे व सातवें दिन हैफेड व पहले, तीसरे व पांचवे दिन एचडब्ल्यूसी गेहूं खरीदेगी।
रंजीतपुर-पहले, तीसरे, पांचवे दिन हैफेड तथा दूसरे, चौथे, छठे व सातवें दिन एफसीआई गेहूं खरीदेगी।
रसूलपुर-सातों दिन फूड सप्लाई की ख्ररीद है।
साढौरा-सातों दिन हैफेड की खरीद है।
यमुनानगर- पहले, दूसरे, चौथे दिन फूड सप्लाई तथा तीसरे, पांचवे, छठे व सातवें दिन एचडब्ल्यूसी गेहूं खरीदेगी।