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विश्वास तय करता है जीवन की दिशा : नीलम भारती
Mon, 02 Feb 2026 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 02 Feb 2026 01:12 AM IST
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग में उपस्थित संगत। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग के दौरान साध्वी नीलम भारती ने मानव जीवन में विश्वास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्वास जीवन का आधार है, लेकिन यह किस पर टिके है, वही जीवन की दिशा और परिणाम तय करता है।
साध्वी नीलम भारती ने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि जिस प्रकार फिसलन भरी भूमि पर पैर टिक नहीं पाता, उसी प्रकार असत्य पर आधारित विश्वास भी शीघ्र टूट जाता है। यह नश्वर संसार देखने में सत्य प्रतीत होता है, पर जब प्रिय वस्तुएं, व्यक्ति या पद अचानक छिन जाते हैं, तो संसार के प्रति हमारा विश्वास डगमगा जाता है। उन्होंने कहा कि भरी सभा में द्रौपदी के अडिग विश्वास ने ही अदृश्य परमात्मा को वस्त्र रूप में प्रकट होने के लिए विवश किया।
साध्वी ने बताया कि आत्म-साक्षात्कार के माध्यम से संसार की क्षणभंगुरता का बोध होने पर परमात्मा की शाश्वत सत्ता पर विश्वास सहज हो जाता है। जब एक ब्रह्मनिष्ठ संत अपनी कृपा से साधक के अंतःकरण में दिव्य प्रकाश और अनहद नाद का अनुभव कराते हैं, तब जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन घटित होता है। ऐसा साधक आशा और ममता से रहित होकर भी अपने सांसारिक दायित्वों को पूर्ण निष्ठा से निभाता है।
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग के दौरान साध्वी नीलम भारती ने मानव जीवन में विश्वास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्वास जीवन का आधार है, लेकिन यह किस पर टिके है, वही जीवन की दिशा और परिणाम तय करता है।
साध्वी नीलम भारती ने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि जिस प्रकार फिसलन भरी भूमि पर पैर टिक नहीं पाता, उसी प्रकार असत्य पर आधारित विश्वास भी शीघ्र टूट जाता है। यह नश्वर संसार देखने में सत्य प्रतीत होता है, पर जब प्रिय वस्तुएं, व्यक्ति या पद अचानक छिन जाते हैं, तो संसार के प्रति हमारा विश्वास डगमगा जाता है। उन्होंने कहा कि भरी सभा में द्रौपदी के अडिग विश्वास ने ही अदृश्य परमात्मा को वस्त्र रूप में प्रकट होने के लिए विवश किया।
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साध्वी ने बताया कि आत्म-साक्षात्कार के माध्यम से संसार की क्षणभंगुरता का बोध होने पर परमात्मा की शाश्वत सत्ता पर विश्वास सहज हो जाता है। जब एक ब्रह्मनिष्ठ संत अपनी कृपा से साधक के अंतःकरण में दिव्य प्रकाश और अनहद नाद का अनुभव कराते हैं, तब जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन घटित होता है। ऐसा साधक आशा और ममता से रहित होकर भी अपने सांसारिक दायित्वों को पूर्ण निष्ठा से निभाता है।
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