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फैक्टरी में आरा मशीन से कटी किशोर की अंगुलियां
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर।
Updated Tue, 01 Jul 2014 11:20 PM IST
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गांव रायपुर में एक फैक्टरी में काम करते हुए एक किशोर की चार अंगुलियां कट गईं। फैक्टरी मालिक द्वारा उसे इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में ले जाने से मना कर प्राइवेट अस्पताल में ले जाने का प्रयास किया गया।
लेकिन घायल किशोर का जीजा उसे यमुनानगर के ट्रॉमा सेंटर ले पहुंचा। जहां अस्पताल के स्टाफ द्वारा इस बारे में पुलिस को सूचित किया गया।
सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने किशोर के घायल होने की वजह जानने के बाद मामले को बाल मजदूरी का मानते इस बारे में जिला चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट को अवगत कराया।
यूनिट की टीम ने घायल के बयान लेने पर फैक्टरी में और भी कई किशोरों से मजदूरी लेने की बात सामने आई। इस पर यूनिट द्वारा फैक्टरी पर रेड के लिए डीसी से अनुमति मांगी। लेकिन देर शाम तक टीम द्वारा फैक्टरी में इस प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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यमुनानगर के ट्रॉमा सेंटर में उपचाराधीन यूपी के जिला अमेठी में गांव पलान निवासी राम रुदल ने बताया कि वह पिछले तीन माह से यमुनानगर में गांव रायपुर स्थित प्लाइवुड फैक्टरी में अपने जीजा महेश कुमार के साथ काम कर रहा था।
मंगलवार को सुबह करीब छह बजे जब वह आरा मशीन पर काम कर रहा था तो अचानक उसके हाथ की अंगुलियां बीच में फंस गई। शोर सुनकर फैक्टरी में काम कर रहे मजदूरों ने मशीन को बंद कर दिया और इस बारे में फैक्टरी के मालिक को सूचना दी।
आरोप है कि सूचना पाकर मौके पर पहुंचे फैक्टरी मालिक ने घायल राम रुदल का पहले तो इलाज कराने से मना कर दिया और बाद में प्राइवेट अस्पताल में ले जाने का प्रयास किया।
लेकिन घायल के जीजा महेश कुमार उसे लेकर यमुनानगर के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल के बयान लेने के बाद मामले को बाल मजदूरी का मानते हुए चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट को सूचना दी।
यूनिट की ओर से लीगल ऑफिसर रंजन शर्मा और प्रीति वत्स ने मौके पर पहुंचकर घायल और उसके जीजा के बयान लिए।
उसने बताया कि उसके अलावा फैक्टरी में उससे भी कम उम्र के कई किशोरों से मजदूरी कराई जा रही है। यूनिट ने किशोर के परिजनों से उसके उम्र से संबंधित दस्तावेज मांगें हैं।
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लेकिन घायल किशोर का जीजा उसे यमुनानगर के ट्रॉमा सेंटर ले पहुंचा। जहां अस्पताल के स्टाफ द्वारा इस बारे में पुलिस को सूचित किया गया।
सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने किशोर के घायल होने की वजह जानने के बाद मामले को बाल मजदूरी का मानते इस बारे में जिला चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट को अवगत कराया।
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यूनिट की टीम ने घायल के बयान लेने पर फैक्टरी में और भी कई किशोरों से मजदूरी लेने की बात सामने आई। इस पर यूनिट द्वारा फैक्टरी पर रेड के लिए डीसी से अनुमति मांगी। लेकिन देर शाम तक टीम द्वारा फैक्टरी में इस प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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यमुनानगर के ट्रॉमा सेंटर में उपचाराधीन यूपी के जिला अमेठी में गांव पलान निवासी राम रुदल ने बताया कि वह पिछले तीन माह से यमुनानगर में गांव रायपुर स्थित प्लाइवुड फैक्टरी में अपने जीजा महेश कुमार के साथ काम कर रहा था।
मंगलवार को सुबह करीब छह बजे जब वह आरा मशीन पर काम कर रहा था तो अचानक उसके हाथ की अंगुलियां बीच में फंस गई। शोर सुनकर फैक्टरी में काम कर रहे मजदूरों ने मशीन को बंद कर दिया और इस बारे में फैक्टरी के मालिक को सूचना दी।
आरोप है कि सूचना पाकर मौके पर पहुंचे फैक्टरी मालिक ने घायल राम रुदल का पहले तो इलाज कराने से मना कर दिया और बाद में प्राइवेट अस्पताल में ले जाने का प्रयास किया।
लेकिन घायल के जीजा महेश कुमार उसे लेकर यमुनानगर के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल के बयान लेने के बाद मामले को बाल मजदूरी का मानते हुए चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट को सूचना दी।
यूनिट की ओर से लीगल ऑफिसर रंजन शर्मा और प्रीति वत्स ने मौके पर पहुंचकर घायल और उसके जीजा के बयान लिए।
उसने बताया कि उसके अलावा फैक्टरी में उससे भी कम उम्र के कई किशोरों से मजदूरी कराई जा रही है। यूनिट ने किशोर के परिजनों से उसके उम्र से संबंधित दस्तावेज मांगें हैं।