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एक्सचेंज के लिए कम पड़ रहे नोट ,बैंकों के बाहर लगी कतारें, घंटों करना पड़ रहा इंतजार-
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
Updated Sun, 13 Nov 2016 12:24 AM IST
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एक्सचेंज के लिए कम पड़ रहे नोट ,बैंकों के बाहर लगी कतारें, घंटों करना पड़ रहा इंतजार-
यमुनानगर। बंद किए गए नोटों को बदलने के लिए बैंकों में करेंसी की किल्लत अब भी बरकरार है। शनिवार को बैंकों में नोट एक्सचेंज तो हुए, लेकिन नोट बदलने वालों की संख्या काफी अधिक होने से हजारों व्यक्तियों को बैंकों से बैरंग लौटना पड़ा। उधर, एटीएम से नोट निकलवाने के लिए एटीएम बूथों पर लंबी कतारें लगी रहीं। अधिकतर एटीएम बूथों पर दोपहर तक कैश खत्म हो गया। शनिवार को बैंक खुलने से पहले ही लोग लाइन में खड़े नजर आए। कुछ बैंकों में प्रति व्यक्ति दो हजार तो कही चार हजार रुपये एक्सचेंज किए गए।
-बैंकों में आए 280 करोड़ के नोट-
नोट बंदी के बाद से बैंकों में पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट जमा करवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शनिवार को भी बैंकों में नोट जमा करवाने वालों की भारी भीड़ रही। लीड बैंक पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजर विपिन सरीन ने बताया कि शनिवार को जिले के बैंकों में करीब 250 करोड़ रुपये जमा किए गए, जबकि एक्सचेंज से करीब 30 करोड़ रुपये आए। उन्होंने कहा कि काफी संख्या में लोग नोट एक्सचेंज करवाने के लिए बैंकों में आ रहे हैं, इस कारण नोट कम पड़ रहे हैं।
-बैंक आए लोगों ने समाजसेवी की मेहनत पर फेरा पानी-
कैंप के समाजसेवी कुंदन लाल कत्याल दो दिनों से बैंक खुलने से पहले लग रही लोगों की लाइन व बैंक खुलने पर हो रही मारा-मारी को देख रहे थे। उन्होंने विचार बनाया कि यदि लाइन में लगे व्यक्तियों को टोकन दे दिए जाए और 10-10 व्यक्ति बैंक में जाए तो आपाधापी नहीं मचेगी। इसके लिए उन्होंने कैंप स्थित पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजर को इसका सुझाव दिया। मैनेजर ने इस पर हामी भर दी। कुंदन लाल ने घर जाकर रात में तीन घंटे की मेहनत कर नंबर लिखे टोकन बना लिए और सुबह नौ बजे बैंक के बाहर पहुंच गए। उन्होंने लाइन में लगे लोगों को एक-एक टोकन दे दिया ताकि बैंक खुलने पर लोग एक-एक कर भीतर जाए। बैंक खुलने से पहले कुंदन लाल ने 150 टोकन बांट दिया। लेकिन जैसे ही बैंक खुला तो सभी टोकन फेंककर धड़धड़ाते हुए बैंक में घुस गए। कुंदन लाल ने इस पर भी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कहा कि रविवार को वह स्टेट बैंक आफ इंडिया के बाहर लोगों को टोकन देंगे ताकि वे एक-एक कर बैंक जाए।
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-नोट न मिलने से घर नहीं जा पा रही बिहार की सुमरिया देवी-
बिहार की रहने वाली सुमरिया देवी दामला में रहती है। उसे जरूरी काम से अपने परिवार सहित अपने गांव जाना है। वह नोट बदलवाने के लिए शुक्रवार को भी से बैंक आई थी, लेकिन उसका नंबर नहीं आया। शनिवार को सुबह 9 बजे बैंक आकर लाइन में लग गई। एक बजे तक उसका नंबर नहीं आया था।
-बेटी की शादी के लिए दो दिन से नोट बदलने बैंक आ रहा मनोहर लाल-
मजूदरी करने वाले पुराना हमीदा निवासी मनोहर लाल बेटी की शादी है। बारात कुंजपुरा जानी है। बेटी की शादी के लिए उसने थोड़ा-थोड़ा कर कुछ हजार रुपये इकट्ठा किए थे। सभी नोट पांच सौ व एक हजार रुपये के होने से उसके सामने बड़ी मुसीबत आ खड़ी हुई है। बैंक से केवल चार हजार ही मिलने है। नोट बदलने के लिए मनोहर लाल शुक्रवार को भी बैंक आया था, लेकिन भीड़ अधिक होने से उसका नंबर नहीं आया। शनिवार को वह सुबह 9 बजे आकर लाइन में लग गया, लेकिन दो बजे तक उसके नोट एक्सचेंज नहीं हो पाए थे।
यमुनानगर। पांच सौ व एक हजार के नोट बंद करने का असर एतिहासिक कपालमोचन मेले में भी पड़ रहा है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अब तक पिछले सालों से काफी कम है। वहीं, मेेले में लगने वाली एक हजार से अधिक दुकानों पर भी खरीददारों का टोटा बना हुआ है।
कपालमोचन मेले में पंजाब के विभिन्न जिलों के लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं। अधिकतर श्रद्धालु ट्रकों व बसों में आते हैं। जबकि बड़ी संख्या में सरकारी बसों में यहां तक आते हैं। नोट बंद होने से मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। मेले में एक हजार से अधिक छोटी-बड़ी दुकानें लगती हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं मेले में जमकर खरीददारी भी करते हैं। मेले में मुख्य स्नान रवि-सोमवार की रात को है। हर साल मुख्य स्नान से एक दिन पहले तक मेले में पांच से छह लाख श्रद्धालु आ जाते हैं, लेकिन इस बार अब तक मेले में दो-ढाई लाख श्रद्धालु ही आए हैं। श्रद्धालुओं की कम आमद की मुख्य वजह पांच सौ व एक हजार के नोटों का बंद होना बताई जा रही है। मेले में अब तक जो श्रद्धालु आ चुके हैं। उन्हें भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां आने वाले श्रद्धालु रहने के लिए किराए पर टेंट व बिस्तर लेते हैं। मेल में लगने वाले भंडारों व लंगरों के लिए प्रशासन द्वारा ईंधन के तौर पर लकड़ी का प्रबंध कराया जाता है। इस बार प्रशासन ने लकड़ी के साथ-साथ एलपीजी गैस सिलेंडर भी उपलब्ध कराए हैं, लेकिन पांच सौ व एक हजार के नोट बंद होने से श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मेले में आए अधिकतर श्रद्धालुओं के पास पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट हैं। अधिकतर दुकानदार इन नोटों को लेने से मना कर रहे हैं। जबकि कुछ दुकानदार पूरे पांच सौ या एक हजार रुपये का सामान खरीदने पर ही ये नोट ले रहे हैं। इसके चलते इस बार मेेेले में पिछले सालों से काफी कम श्रद्धालु आने की उम्मीद है।
यमुनानगर। बंद किए गए नोटों को बदलने के लिए बैंकों में करेंसी की किल्लत अब भी बरकरार है। शनिवार को बैंकों में नोट एक्सचेंज तो हुए, लेकिन नोट बदलने वालों की संख्या काफी अधिक होने से हजारों व्यक्तियों को बैंकों से बैरंग लौटना पड़ा। उधर, एटीएम से नोट निकलवाने के लिए एटीएम बूथों पर लंबी कतारें लगी रहीं। अधिकतर एटीएम बूथों पर दोपहर तक कैश खत्म हो गया। शनिवार को बैंक खुलने से पहले ही लोग लाइन में खड़े नजर आए। कुछ बैंकों में प्रति व्यक्ति दो हजार तो कही चार हजार रुपये एक्सचेंज किए गए।
-बैंकों में आए 280 करोड़ के नोट-
नोट बंदी के बाद से बैंकों में पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट जमा करवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शनिवार को भी बैंकों में नोट जमा करवाने वालों की भारी भीड़ रही। लीड बैंक पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजर विपिन सरीन ने बताया कि शनिवार को जिले के बैंकों में करीब 250 करोड़ रुपये जमा किए गए, जबकि एक्सचेंज से करीब 30 करोड़ रुपये आए। उन्होंने कहा कि काफी संख्या में लोग नोट एक्सचेंज करवाने के लिए बैंकों में आ रहे हैं, इस कारण नोट कम पड़ रहे हैं।
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-बैंक आए लोगों ने समाजसेवी की मेहनत पर फेरा पानी-
कैंप के समाजसेवी कुंदन लाल कत्याल दो दिनों से बैंक खुलने से पहले लग रही लोगों की लाइन व बैंक खुलने पर हो रही मारा-मारी को देख रहे थे। उन्होंने विचार बनाया कि यदि लाइन में लगे व्यक्तियों को टोकन दे दिए जाए और 10-10 व्यक्ति बैंक में जाए तो आपाधापी नहीं मचेगी। इसके लिए उन्होंने कैंप स्थित पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजर को इसका सुझाव दिया। मैनेजर ने इस पर हामी भर दी। कुंदन लाल ने घर जाकर रात में तीन घंटे की मेहनत कर नंबर लिखे टोकन बना लिए और सुबह नौ बजे बैंक के बाहर पहुंच गए। उन्होंने लाइन में लगे लोगों को एक-एक टोकन दे दिया ताकि बैंक खुलने पर लोग एक-एक कर भीतर जाए। बैंक खुलने से पहले कुंदन लाल ने 150 टोकन बांट दिया। लेकिन जैसे ही बैंक खुला तो सभी टोकन फेंककर धड़धड़ाते हुए बैंक में घुस गए। कुंदन लाल ने इस पर भी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कहा कि रविवार को वह स्टेट बैंक आफ इंडिया के बाहर लोगों को टोकन देंगे ताकि वे एक-एक कर बैंक जाए।
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-नोट न मिलने से घर नहीं जा पा रही बिहार की सुमरिया देवी-
बिहार की रहने वाली सुमरिया देवी दामला में रहती है। उसे जरूरी काम से अपने परिवार सहित अपने गांव जाना है। वह नोट बदलवाने के लिए शुक्रवार को भी से बैंक आई थी, लेकिन उसका नंबर नहीं आया। शनिवार को सुबह 9 बजे बैंक आकर लाइन में लग गई। एक बजे तक उसका नंबर नहीं आया था।
-बेटी की शादी के लिए दो दिन से नोट बदलने बैंक आ रहा मनोहर लाल-
मजूदरी करने वाले पुराना हमीदा निवासी मनोहर लाल बेटी की शादी है। बारात कुंजपुरा जानी है। बेटी की शादी के लिए उसने थोड़ा-थोड़ा कर कुछ हजार रुपये इकट्ठा किए थे। सभी नोट पांच सौ व एक हजार रुपये के होने से उसके सामने बड़ी मुसीबत आ खड़ी हुई है। बैंक से केवल चार हजार ही मिलने है। नोट बदलने के लिए मनोहर लाल शुक्रवार को भी बैंक आया था, लेकिन भीड़ अधिक होने से उसका नंबर नहीं आया। शनिवार को वह सुबह 9 बजे आकर लाइन में लग गया, लेकिन दो बजे तक उसके नोट एक्सचेंज नहीं हो पाए थे।
यमुनानगर। पांच सौ व एक हजार के नोट बंद करने का असर एतिहासिक कपालमोचन मेले में भी पड़ रहा है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अब तक पिछले सालों से काफी कम है। वहीं, मेेले में लगने वाली एक हजार से अधिक दुकानों पर भी खरीददारों का टोटा बना हुआ है।
कपालमोचन मेले में पंजाब के विभिन्न जिलों के लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं। अधिकतर श्रद्धालु ट्रकों व बसों में आते हैं। जबकि बड़ी संख्या में सरकारी बसों में यहां तक आते हैं। नोट बंद होने से मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। मेले में एक हजार से अधिक छोटी-बड़ी दुकानें लगती हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं मेले में जमकर खरीददारी भी करते हैं। मेले में मुख्य स्नान रवि-सोमवार की रात को है। हर साल मुख्य स्नान से एक दिन पहले तक मेले में पांच से छह लाख श्रद्धालु आ जाते हैं, लेकिन इस बार अब तक मेले में दो-ढाई लाख श्रद्धालु ही आए हैं। श्रद्धालुओं की कम आमद की मुख्य वजह पांच सौ व एक हजार के नोटों का बंद होना बताई जा रही है। मेले में अब तक जो श्रद्धालु आ चुके हैं। उन्हें भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां आने वाले श्रद्धालु रहने के लिए किराए पर टेंट व बिस्तर लेते हैं। मेल में लगने वाले भंडारों व लंगरों के लिए प्रशासन द्वारा ईंधन के तौर पर लकड़ी का प्रबंध कराया जाता है। इस बार प्रशासन ने लकड़ी के साथ-साथ एलपीजी गैस सिलेंडर भी उपलब्ध कराए हैं, लेकिन पांच सौ व एक हजार के नोट बंद होने से श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मेले में आए अधिकतर श्रद्धालुओं के पास पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट हैं। अधिकतर दुकानदार इन नोटों को लेने से मना कर रहे हैं। जबकि कुछ दुकानदार पूरे पांच सौ या एक हजार रुपये का सामान खरीदने पर ही ये नोट ले रहे हैं। इसके चलते इस बार मेेेले में पिछले सालों से काफी कम श्रद्धालु आने की उम्मीद है।