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Yamuna Nagar News: सात वर्षों में 5.27 करोड़ खर्च के बाद भी विज्ञापन साइट्स के टेंडर न लगे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jan 2024 01:24 AM IST
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Even after spending Rs 5.27 crore in seven years, tenders for advertising sites were not awarded.
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। नगर निगम के हर साल के बजट में विज्ञापन फीस से आय के लक्ष्य घटते-बढ़ते रहे, पर सात वर्षों में इससे निगम की आय शून्य रही। क्योंकि निगम के गठन से अब तक विज्ञापन साइट्स के टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इससे राजनीतिक दलों से लेकर धार्मिक, सामाजिक संगठन व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने सात वर्षों में खूब फायदा उठाया और अब भी उठा रहे हैं। जो बिना फीस अवैध रूप से शहर में होर्डिंग लगाकर प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। विज्ञापन साइट के टेंडर पेंच में सात वर्षों की तरह शहर मौजूदा समय में भी होर्डिंगों से अटा पड़ा है और निगम की कार्रवाई उन्हें उतारने तक सिमटी है। जबकि इस तरह निगम गत सात वर्षों में 5.27 करोड़ रुपये गंवा चुका है।
बता दें कि विज्ञापन साइट्स नगर निगम की आय का बड़ा स्रोत बन सकता है, जिससे शहर के विकास कार्यों के लिए फंड की कमी दूर हो सकती है। लेकिन हर साल विज्ञापन साइट्स के टेंडर सिरे चढ़ने की उम्मीद में निगम के हर वित्त वर्ष के बजट में आय के लक्ष्य घटते-बढ़ते जरूर है, पर सात वर्षो में टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से आय का आंकड़ा शून्य से आगे नहीं बढ़ पाया है। जबकि त्योहारों व चुनावों सहित पूरे सालभर शहर में विज्ञापन साइट्स सहित खंभों, पेड़ों व अन्य भवनों की दीवारों पर होर्डिंग लटके रहते हैं। इस मुद्दे पर बजट व सदन बैठकों में अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठ चुके हैं, बावजूद इसके न होर्डिंगों से अटे शहर की तस्वीर बदल पाई है और न निगम की कार्रवाई।
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सात साल में 5.27 करोड़ का था लक्ष्य, आय शून्य
बजट- लक्ष्य - आय
2015-16 - 2 करोड़ - 0
2016-17 - 50 लाख - 0
2017-18 - 50 लाख - 0
2018-19 - 1 करोड़ - 0
2019-20 - 50 लाख - 0
2020-21 - 27 लाख - 0
2021-22 - 50 लाख - 0

चुनिंदा पर ही कार्रवाई, सिफारिशी होर्डिंग पर नहीं-
वर्तमान पार्षदों में वार्ड-7 से रामआसरा भारद्वाज, वार्ड-8 से विनोद मरवाह, वार्ड-13 से निर्मल चौहान ने कहा कि पूरे कार्यकाल में सदन में मंजूर प्रस्तावों सहित अन्य कामों के लिए अफसर फंड की कमी गिनाते रहे, पर अगर निगम के आय के विज्ञापन जैसे बड़े स्रोतों से पूरी रिकवरी की जाए तो विकास कार्यों के लिए फंड की कमी नहीं रहेगी। लेकिन इसमें वर्षों से टेंडर करने का ही तर्क चल रहा है। अगर टेंडर नहीं है तो विज्ञापन साइट्स सहित अन्य जगह लगे सभी होर्डिंग अवैध है, तब भी निगम टीमें बार-बार सिर्फ चुनिंदा होर्डिंग उतार इतिश्री कर लेती है। जबकि आरोप है कि बाकी सिफारिशी होर्डिंग सेटिंग से शहर में लगे रहते हैं।
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शहर में नगर निगम की विज्ञापन साइट्स के टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। इसमें नियमानुसार ही कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। - अशोक कुमार, संयुक्त आयुक्त, नगर निगम।
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