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अहंकार सब कुछ कर देता है नष्ट : डॉ. स्वाति
Wed, 07 Aug 2024 03:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 07 Aug 2024 03:49 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा माडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 18वें दिन प्रवचन करते हुए महा साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने फरमाया कि इस संसार में कुछ ऐसी बुराइयां हैं जो हमारे जीवन में आ जाएं तो पूरे जीवन को तबाह कर देती हैं। उन बुराइयों में से एक बुराई है अहंकार। अहंकार यदि जीवन में आ जाए तो सब कुछ नष्ट कर देता है।
उन्होंने कहा कि रावण ने अहंकार किया था तो उसका कुल सहित विनाश हो गया। कंस ने अहंकार किया तो वह भी बेमौत मारा गया। अहंकारी आदमी से समाज दूरी बनाकर रखता है क्योंकि न तो अहंकारी आदमी को यह समझ होती है कि वह क्या कर रहा है और न यह समझ होती है कि वह जो बोल रहा है उससे दूसरे पर क्या बीतेगी।
दूसरी बुराई है क्रोध। क्रोध यदि जीवन में आ जाए तो व्यक्ति चैन से रह नहीं पाता है। क्रोधी आदमी क्रोध में आकर दूसरे का कम और अपना नुकसान ज्यादा करता है। तीसरी बुराई है ईर्ष्या। ईर्ष्यालु व्यक्ति न खुद चैन से रहता है न किसी और को चैन से रहने देता है। चील की उड़ान देखकर चिड़िया कभी अवसाद में नहीं आती, लेकिन एक इंसान की ऊंची उड़ान देखकर दूसरा इंसान बहुत जल्दी चिंता और तनाव में आ जाता है।
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ऐसे व्यक्ति को यह नहीं करना चाहिए।यदि आप किसी से ईर्ष्या की बजाय उसकी बराबरी करने की सोच रखोगे तो आपके अंदर की सकारात्मक ऊर्जा आपको आगे बढ़ाने में सहयोग करेगी और समाज भी आपके कंधे थपथपाएगा और शाबाशी देगा। ईष्र्यालु व्यक्ति को केवल अपने मन में यह सोचना चाहिए था कि ना किसी से ईर्ष्या, न किसी से होड़। मेरी अपनी मंजिल, मेरी अपनी दौड़।
हमें कभी किसी से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। ईर्ष्या से खुद का पतन होता है इसलिए कहने का भाव यह है यदि व्यक्ति अपने मन से अहंकार क्रोध और ईर्ष्या को निकाल दे तो उसे स्वयं का जीवन परिवर्तन करने में बहुत सहयोग मिलेगा। वह समाज के लिए भी आदर्श बनेगा और लोगों के लिए प्रेम और प्रेरणा का सुपात्र बनेगा।
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यमुनानगर। एसएस जैन सभा माडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 18वें दिन प्रवचन करते हुए महा साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने फरमाया कि इस संसार में कुछ ऐसी बुराइयां हैं जो हमारे जीवन में आ जाएं तो पूरे जीवन को तबाह कर देती हैं। उन बुराइयों में से एक बुराई है अहंकार। अहंकार यदि जीवन में आ जाए तो सब कुछ नष्ट कर देता है।
उन्होंने कहा कि रावण ने अहंकार किया था तो उसका कुल सहित विनाश हो गया। कंस ने अहंकार किया तो वह भी बेमौत मारा गया। अहंकारी आदमी से समाज दूरी बनाकर रखता है क्योंकि न तो अहंकारी आदमी को यह समझ होती है कि वह क्या कर रहा है और न यह समझ होती है कि वह जो बोल रहा है उससे दूसरे पर क्या बीतेगी।
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दूसरी बुराई है क्रोध। क्रोध यदि जीवन में आ जाए तो व्यक्ति चैन से रह नहीं पाता है। क्रोधी आदमी क्रोध में आकर दूसरे का कम और अपना नुकसान ज्यादा करता है। तीसरी बुराई है ईर्ष्या। ईर्ष्यालु व्यक्ति न खुद चैन से रहता है न किसी और को चैन से रहने देता है। चील की उड़ान देखकर चिड़िया कभी अवसाद में नहीं आती, लेकिन एक इंसान की ऊंची उड़ान देखकर दूसरा इंसान बहुत जल्दी चिंता और तनाव में आ जाता है।
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ऐसे व्यक्ति को यह नहीं करना चाहिए।यदि आप किसी से ईर्ष्या की बजाय उसकी बराबरी करने की सोच रखोगे तो आपके अंदर की सकारात्मक ऊर्जा आपको आगे बढ़ाने में सहयोग करेगी और समाज भी आपके कंधे थपथपाएगा और शाबाशी देगा। ईष्र्यालु व्यक्ति को केवल अपने मन में यह सोचना चाहिए था कि ना किसी से ईर्ष्या, न किसी से होड़। मेरी अपनी मंजिल, मेरी अपनी दौड़।
हमें कभी किसी से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। ईर्ष्या से खुद का पतन होता है इसलिए कहने का भाव यह है यदि व्यक्ति अपने मन से अहंकार क्रोध और ईर्ष्या को निकाल दे तो उसे स्वयं का जीवन परिवर्तन करने में बहुत सहयोग मिलेगा। वह समाज के लिए भी आदर्श बनेगा और लोगों के लिए प्रेम और प्रेरणा का सुपात्र बनेगा।