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Yamuna Nagar News: श्रद्धालुओं को बताया जीवन में संघर्ष का महत्व
Mon, 20 Jan 2025 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 20 Jan 2025 12:25 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। साध्वी बबली भारती ने श्रद्धालुओं को मानव जीवन में संघर्ष का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि जन्म से मृत्यु तक मनुष्य संघर्ष करता है। जीवन का यह संघर्ष माता के गर्भ से आरंभ होकर चिता की अग्नि पर समाप्त हो जाता है, लेकिन आत्मा का संघर्ष तब तक जारी रहता है जब तक वह अपने परम स्रोत परमात्मा से नहीं मिल जाती।
साध्वी ने कहा कि संघर्ष निर्माण को जन्म देता है। एक बीज संघर्ष के पश्चात ही फलदार वृक्ष बनता है, मिट्टी संघर्ष के पश्चात ही एक सुंदर घड़े का आकार लेती है और पत्थर कई संघर्षों के पश्चात ही सुंदर मूरत बनता है। मनुष्य के जीवन में कोई संघर्ष उसे तोड़ने के लिए नहीं बल्कि उसका निर्माण करने के लिए आता है, लेकिन यदि मनुष्य संघर्ष के समय में अपने कर्मों पर, परमात्मा पर या किसी अन्य व्यक्ति पर दोषारोपण करता है तो वह संघर्ष ही उसके जीवन के पतन का कारण बन जाता है।
यदि हम अपने जीवन का अवलोकन करें तो हम पाते हैं कि संघर्ष के समय में हमारा आत्मचिंतन और आत्म मंथन बहिर्मुखी से अंतर्मुखी हो जाता है। तभी हमें इस बात का एहसास होता है कि हमारे जीवन में आने वाली प्रत्येक परिस्थिति के लिए केवल हम ही ज़िम्मेदार होते हैं कोई और नहीं।
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संघर्ष का ताप आत्मा से कर्म संस्कारों की मैल को धोकर उसे परम पावन कर देता है क्योंकि संघर्ष के समय में व्यक्ति न तो किसी दूसरे का अहित सोच सकता है और न ही उसके मन में किसी भी तरह के विषय विकार को भोगने की लालसा पैदा हो सकती है। संघर्ष के समय में व्यक्ति आत्म निरीक्षण के द्वारा अपने द्वारा किए गये पापों का पश्चाताप एवं प्रायश्चित करता है।
ऐसा साधक जो अपने ही मन के संघर्ष में विजय प्राप्त करे वह सहज रूप से जीवन को परमार्थ और परोपकार का साधन बना कर जीवन मुक्ति का आनंद प्राप्त करता है। सत्संग कार्यक्रम के अंत में साध्वी बहनों ने सुमधुर भजनों का गायन करके समूह संगत को भाव विभोर कर दिया।
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। साध्वी बबली भारती ने श्रद्धालुओं को मानव जीवन में संघर्ष का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि जन्म से मृत्यु तक मनुष्य संघर्ष करता है। जीवन का यह संघर्ष माता के गर्भ से आरंभ होकर चिता की अग्नि पर समाप्त हो जाता है, लेकिन आत्मा का संघर्ष तब तक जारी रहता है जब तक वह अपने परम स्रोत परमात्मा से नहीं मिल जाती।
साध्वी ने कहा कि संघर्ष निर्माण को जन्म देता है। एक बीज संघर्ष के पश्चात ही फलदार वृक्ष बनता है, मिट्टी संघर्ष के पश्चात ही एक सुंदर घड़े का आकार लेती है और पत्थर कई संघर्षों के पश्चात ही सुंदर मूरत बनता है। मनुष्य के जीवन में कोई संघर्ष उसे तोड़ने के लिए नहीं बल्कि उसका निर्माण करने के लिए आता है, लेकिन यदि मनुष्य संघर्ष के समय में अपने कर्मों पर, परमात्मा पर या किसी अन्य व्यक्ति पर दोषारोपण करता है तो वह संघर्ष ही उसके जीवन के पतन का कारण बन जाता है।
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यदि हम अपने जीवन का अवलोकन करें तो हम पाते हैं कि संघर्ष के समय में हमारा आत्मचिंतन और आत्म मंथन बहिर्मुखी से अंतर्मुखी हो जाता है। तभी हमें इस बात का एहसास होता है कि हमारे जीवन में आने वाली प्रत्येक परिस्थिति के लिए केवल हम ही ज़िम्मेदार होते हैं कोई और नहीं।
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संघर्ष का ताप आत्मा से कर्म संस्कारों की मैल को धोकर उसे परम पावन कर देता है क्योंकि संघर्ष के समय में व्यक्ति न तो किसी दूसरे का अहित सोच सकता है और न ही उसके मन में किसी भी तरह के विषय विकार को भोगने की लालसा पैदा हो सकती है। संघर्ष के समय में व्यक्ति आत्म निरीक्षण के द्वारा अपने द्वारा किए गये पापों का पश्चाताप एवं प्रायश्चित करता है।
ऐसा साधक जो अपने ही मन के संघर्ष में विजय प्राप्त करे वह सहज रूप से जीवन को परमार्थ और परोपकार का साधन बना कर जीवन मुक्ति का आनंद प्राप्त करता है। सत्संग कार्यक्रम के अंत में साध्वी बहनों ने सुमधुर भजनों का गायन करके समूह संगत को भाव विभोर कर दिया।