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Yamuna Nagar News: भगवान कृष्ण-सुदामा मित्रता का प्रसंग सुनकर भक्त हुए भावविभोर
Fri, 20 Mar 2026 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 20 Mar 2026 12:02 AM IST
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श्री हनुमान मंदिर रामपुरा में हवन में आहुतियां डालते श्रद्धालु। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। श्री हनुमान मंदिर रामपुरा कॉलोनी में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का वीरवार को अंतिम दिन कथा व्यास स्वामी चैतन्य मृदुल महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं के प्रसंगों का प्रवचन किया। कथा में श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
कथा व्यास ने कहा कि मित्रता निभाना भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा से समझ सकते हैं। सुदामा पत्नी के आग्रह पर मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचते। सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे तो द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षुक समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह श्रीकृष्ण के मित्र हैं, इस पर द्वारपाल महल गए और कहा कि सुदामा नाम का व्यक्ति स्वयं को आपका मित्र बता रहा है और मिलने आया है।
द्वारपाल के मुंह से नाम सुनते प्रभु नंगे पांव सुदामा सुदामा पुकारते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे। सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभी अचंभित हो गए। भगवान कृष्ण ने सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया। उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। उन्होंने कहा कि जब-जब भक्तों पर विपदा आ पड़ी है, प्रभु उनका तारण करने अवश्य आए हैं।
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यमुनानगर। श्री हनुमान मंदिर रामपुरा कॉलोनी में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का वीरवार को अंतिम दिन कथा व्यास स्वामी चैतन्य मृदुल महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं के प्रसंगों का प्रवचन किया। कथा में श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
कथा व्यास ने कहा कि मित्रता निभाना भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा से समझ सकते हैं। सुदामा पत्नी के आग्रह पर मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचते। सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे तो द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षुक समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह श्रीकृष्ण के मित्र हैं, इस पर द्वारपाल महल गए और कहा कि सुदामा नाम का व्यक्ति स्वयं को आपका मित्र बता रहा है और मिलने आया है।
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द्वारपाल के मुंह से नाम सुनते प्रभु नंगे पांव सुदामा सुदामा पुकारते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे। सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभी अचंभित हो गए। भगवान कृष्ण ने सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया। उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। उन्होंने कहा कि जब-जब भक्तों पर विपदा आ पड़ी है, प्रभु उनका तारण करने अवश्य आए हैं।
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