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Yamuna Nagar News: श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, भजनों पर झूमे
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रादौर में कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु। संवाद
रादौर। शहर के प्राचीन नगर खेड़ा मंदिर में चल रही आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार को चौथा दिन रहा। इस दौरान कथा में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथा में साध्वी आत्मानंद पुरी ने प्रवचन किया। कथा में उन्होंने श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का वर्णन किया, जो सुनकर श्रद्धालु आत्मविभोर हो गए। कथा में भजनों पर सभी झूमने पर विवश हो गए।
कथा व्यास ने बताया कि द्वापर युग में मथुरा का राजा कंस अत्यंत अत्याचारी और अहंकारी शासक था। उसने छलपूर्वक अपने पिता भोजवंशी राजा उग्रसेन को राजसिंहासन से हटाकर स्वयं सत्ता संभाल ली थी। कंस की बहन देवकी का विवाह यदुवंशी राजा वासुदेव से हुआ था। विवाह के बाद जब कंस अपनी बहन और बहनोई के लिए जा रहा था, तभी आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस का वध करेगी। यह सुनते ही कंस भयभीत हो गया और उसने देवकी व वासुदेव को कारागार में डाल दिया।
साध्वी ने बताया कि कंस ने देवकी की सात संतानों को निर्दयता से मार डाला। इसके बाद भगवान विष्णु ने वासुदेव को स्वप्न में दर्शन देकर आठवीं संतान को बचाने का मार्ग बताया। जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो प्रभु की कृपा से कारागार के सभी द्वार स्वतः खुल गए। वासुदेव नवजात श्रीकृष्ण को लेकर गोकुल पहुंचे और उन्हें यशोदा व नंद बाबा के यहां छोड़ आए। वहां से यशोदा की नवजात कन्या को लेकर कारागार लौट आए।
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जब कंस उस कन्या को मारने पहुंचा तो वह उसके हाथ से छूटकर आकाश में देवी योगमाया के रूप में प्रकट हुई और कंस को उसके अंत का संकेत दिया। आगे चलकर भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा पहुंचकर कंस का वध किया और प्रजा को अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। कथा के बीच भजनों पर श्रद्धालु झूमने पर विवश हो गए। इस दौरान पंडित प्रिंस भारद्वाज सहारनपुर, महंत मनीष पुरी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कथा व्यास ने बताया कि द्वापर युग में मथुरा का राजा कंस अत्यंत अत्याचारी और अहंकारी शासक था। उसने छलपूर्वक अपने पिता भोजवंशी राजा उग्रसेन को राजसिंहासन से हटाकर स्वयं सत्ता संभाल ली थी। कंस की बहन देवकी का विवाह यदुवंशी राजा वासुदेव से हुआ था। विवाह के बाद जब कंस अपनी बहन और बहनोई के लिए जा रहा था, तभी आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस का वध करेगी। यह सुनते ही कंस भयभीत हो गया और उसने देवकी व वासुदेव को कारागार में डाल दिया।
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साध्वी ने बताया कि कंस ने देवकी की सात संतानों को निर्दयता से मार डाला। इसके बाद भगवान विष्णु ने वासुदेव को स्वप्न में दर्शन देकर आठवीं संतान को बचाने का मार्ग बताया। जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो प्रभु की कृपा से कारागार के सभी द्वार स्वतः खुल गए। वासुदेव नवजात श्रीकृष्ण को लेकर गोकुल पहुंचे और उन्हें यशोदा व नंद बाबा के यहां छोड़ आए। वहां से यशोदा की नवजात कन्या को लेकर कारागार लौट आए।
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जब कंस उस कन्या को मारने पहुंचा तो वह उसके हाथ से छूटकर आकाश में देवी योगमाया के रूप में प्रकट हुई और कंस को उसके अंत का संकेत दिया। आगे चलकर भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा पहुंचकर कंस का वध किया और प्रजा को अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। कथा के बीच भजनों पर श्रद्धालु झूमने पर विवश हो गए। इस दौरान पंडित प्रिंस भारद्वाज सहारनपुर, महंत मनीष पुरी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।