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पिछले जन्म के कर्मों का करो नाश : डॉ. स्वाति
Fri, 27 Sep 2024 08:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 27 Sep 2024 08:00 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 69वें दिन महा साध्वी डॉक्टर स्वाति महाराज ने स्थानक में चल रहे 27 दिवसीय तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ जप अनुष्ठान के दसवें दिन का जाप संपन्न करवाया। महा साध्वी ने फरमाया कि अध्यात्म जगत में दो बातें मुख्य हैं एक है तप और दूसरा है जप।
उन्होंने कहा कि तप का अर्थ है तपाना दूसरे तरीके से देखें तो त से तत्काल प से पवित्र जो तत्काल पवित्र करें हमारी आत्मा को वह तप कहलाता है। कुछ लोग प्रश्न करते हैं की आत्मा को पवित्र करने के लिए शरीर को क्यों तपाया या कष्ट दिया जाता है गुरु फरमाते हैं कि मक्खन को घी बनाने के लिए बर्तन को तपाया जाता है पहले बर्तन तपता है फिर मक्खन तपता है और फिर घी बनता है।
ऐसे ही आत्मा को पवित्र करने के लिए शरीर को तपाना भी जरूरी है कहते हैं सोना तप कर ही कुंदन बनता है महा साध्वी जी स्थानक में तप के साथ-साथ तपस्याएं भी करवा रही हैं और श्रावकों को निरंतर प्रेरित कर रही हैं कि जप और तप के माध्यम से अपने शरीर को पवित्र करो अपने पिछले जन्म के कर्मों का नाश करो और मोक्ष की प्राप्ति में लग जाओ।
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यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 69वें दिन महा साध्वी डॉक्टर स्वाति महाराज ने स्थानक में चल रहे 27 दिवसीय तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ जप अनुष्ठान के दसवें दिन का जाप संपन्न करवाया। महा साध्वी ने फरमाया कि अध्यात्म जगत में दो बातें मुख्य हैं एक है तप और दूसरा है जप।
उन्होंने कहा कि तप का अर्थ है तपाना दूसरे तरीके से देखें तो त से तत्काल प से पवित्र जो तत्काल पवित्र करें हमारी आत्मा को वह तप कहलाता है। कुछ लोग प्रश्न करते हैं की आत्मा को पवित्र करने के लिए शरीर को क्यों तपाया या कष्ट दिया जाता है गुरु फरमाते हैं कि मक्खन को घी बनाने के लिए बर्तन को तपाया जाता है पहले बर्तन तपता है फिर मक्खन तपता है और फिर घी बनता है।
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ऐसे ही आत्मा को पवित्र करने के लिए शरीर को तपाना भी जरूरी है कहते हैं सोना तप कर ही कुंदन बनता है महा साध्वी जी स्थानक में तप के साथ-साथ तपस्याएं भी करवा रही हैं और श्रावकों को निरंतर प्रेरित कर रही हैं कि जप और तप के माध्यम से अपने शरीर को पवित्र करो अपने पिछले जन्म के कर्मों का नाश करो और मोक्ष की प्राप्ति में लग जाओ।
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