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गेहूं के फाने जलाए तो विभाग लगाएगा जुर्माना, भुगतान नहीं किया तो एफआईआर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Apr 2022 01:21 AM IST
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Department will impose fine if wheat straws are burnt, FIR if not paid
यमुनानगर। गेहूं की कटाई के बाद अवशेष (फाने) जलाने वालों के खिलाफ कृषि विभाग सख्ती के मूड में है। यदि कोई व्यक्ति फाने जलाते हुए मिला तो उसके खिलाफ कृषि विभाग जुर्माना लगाएगा। यदि भुगतान नहीं किया तो एफआईआर भी दर्ज हो सकती है।
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जिले में गेहूं की कटाई शुरू हो चुकी है। अभी तक सात प्रतिशत ही गेहूं की कटाई हो चुकी। मगर देखने में आता है कि किसान फसल की कटाई के बाद अवशेषों को जला देते हैं। इससे वायु प्रदूषण होता है। पर्यावरण को संरक्षित करना और प्रदूषण को रोकना सभी की जिम्मेदारी है। ऐसे में विभाग न,े इसबार भी फाने न जले इसको देखते हुए निगरानी टीम भी बना दी गई है। जो तुरंत मौके पर जाकर कार्रवाई करेगी और वहां की फोटो व वीडियो भी उपलब्ध कराएगी। अगर इस दौरान टीम ने लापरवाही दिखाई तो उनके भी खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश हैं।
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गेहूं की कटाई के बाद अगर कोई भी फाने जलाते पाया जाता है तो उस पर जुर्माना किया जाएगा। पांच एकड़ भूमि पर 2500 रुपये, पांच एकड़ से 15 एकड़ के बीच में पांच हजार और 15 एकड़ से अधिक पर 15 हजार रुपये तक जुर्माना वसूला जाएगा। कृषि विभाग के मुताबिक फसल की कटाई के बाद किसान खेत में बचे हुए अवशेषों को गलाने-सड़ाने के लिए 20 से 25 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव कर रोटावेटर या कल्टीवेटर से जुताई कर मिट्टी में मिला दें। इससे अवशेष खेत में विघटित हो कर आगामी फसल को पोषक तत्व देंगे।
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गेहूं के फाने जलाने से नाइट्रिफाइंग बैक्टीरिया जो पौधों को नाइट्रेट देते हैं वह पौधों को नहीं मिल पाते हैं। इससे जमीन में बार-बार यूरिया डालना पड़ता है। जब आग लगाते हैं तो दो तरह से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है। एक सीधे ऊर्जा निकलने से दूसरा कार्बनडाइआक्साइड व कार्बन के आधे जले कण निकलने से सल्फर डाईआक्साइड व नाइट्रोजन आक्साइड के कारण आंखों में जलन एवं अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ती है। वन्य प्राणी, चूहे, कबूतर इत्यादि के बच्चे जल जाते हैं।

गेहूं के फाने जलाने पर पाबंदी है। अगर इस बार भी फाने जलाए तो जुर्माना लगाया जाएगा। अगर भुगतान नहीं किया तो एफआईआर भी दर्ज हो सकती है। फाने जलाने से भूमि को भी नुकसान है और प्रदूषण भी बढ़ता है।
-जसविंद्र सिंह सैनी, उप कृषि निदेशक, कृषि विभाग।
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