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अस्पतालों में बढ़े डेंगू, टाइफाइड और वायरल के मरीज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 22 Sep 2022 02:00 AM IST
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Dengue, typhoid and viral patients increased in hospitals
सिविल अस्पताल यमुनानगर की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़। - फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। डेंगू के अलावा वायरल फीवर और टाइफाइड के मरीजों की संख्या अस्पतालों में बढ़ती जा रही है। सिविल अस्पताल के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी रोजाना सैकड़ों की संख्या में बुखार, टाइफाइड, खांसी, जुकाम व अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। जिले में अब तक डेंगू के 78 और चिकनगुनिया के दो मरीज मिल चुके हैं। सिविल अस्पताल यमुनानगर की बात करें तो यहां पर रोजाना औसतन 800 से अधिक ओपीडी हो रही है। जिनमें 40 प्रतिशत से ज्यादा केस बुखार, खांसी, जुकाम व अन्य बीमारियों के हैं। सिविल अस्पताल में रोज ओपीडी में मरीजों की भीड़ लग रही है। डॉक्टरों को सीरियस सीरियस मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है। इसके चलते इस समय अस्पतालों में सभी बेड फुल हैं।
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खासकर बच्चों के निजी अस्पतालों में तो चेकअप के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। शायद ही जिले का कोई ऐसा अस्पताल होगा जिसमें बेड खाली हो। बच्चे बुखार, खांसी, जुकाम व वायरल की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। मौसम में परिवर्तन का असर बच्चों की सेहत पर देखा जा रहा है। सिविल से ज्यादा निजी अस्पतालों में मरीज ओपीडी के लिए ज्यादा पहुंच रहे हैं। इसकी वजह सिविल अस्पतालों की व्यवस्था और समय ज्यादा लगना है। सिविल अस्पताल में ओपीडी बनवाने से लेकर उस पर नंबर लगवाने, डॉक्टर से चेकअप कराने व दवा के लिए लाइन में लगना समेत कई औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। जिसमें काफी समय लगता है। यही वजह है कि लोग उपचार के लिए निजी अस्पतालों में ज्यादा जा रहे हैं। हालांकि निजी अस्पताल में पर्ची बनवाने पर ही 150 से 200 रुपये लग जा रहे हैं।
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बारिश ने बढ़ाई स्वास्थ्य विभाग की चिंता
कई दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने भी स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि बारिश का पानी खाली प्लाटों व गड्ढों में जमा हो जाता है। जिसमें मच्छर पनपते हैं। खासकर खनन जोन जहां पर जेसीबी से खोदाई होती है। फिर यह गड्ढे पानी से भर जाते हैं। यही वजह है कि खनन जोन से लगते एरिया में ही बुखार, डेंगू व मलेरिया के केस ज्यादा मिल रहे हैं।
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लाउडस्पीकर लगाकर किया जा रहा जागरूक
जिले में डेंगू के बढ़ते केसों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। पहली बार डेंगू के को लेकर कंट्रोल रूम बनाया गया। अब ट्रॉमा सेंटर में लाउड स्पीकर लगाकर लोगों को डेंगू को लेकर अलर्ट किया जा रहा है। दिन भर लाउड स्पीकर के जरिये लोगों को डेंगू बीमारी से बचाव करने बारे जागरूक किया जा रहा है। जिला मलेरिया विभाग की तरफ से ट्रॉमा सेंटर के भवन पर दो लाउड स्पीकर लगाए गए हैं। जिन पर सुबह से लेकर शाम तक यह बताया जा रहा है कि डेंगू बीमारी कैसे फैलती है। इसे फैलाने वाले मच्छर घरों में कहां पनपते हैं। इसके अलावा डेंगू के लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है। क्योंकि डेंगू को रोकने के लिए उपचार के साथ-साथ जागरूकता भी जरूरी है।

उपचार व जागरुकता दोनों जरूरी हैं : डॉ. मनजीत सिंह
सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह का कहना है कि डेंगू के अब तक 78 केस सामने आए हैं। विभाग की तरफ से रैलियां निकाल कर, गांवों में बैठक करके डेंगू को लेकर प्रचार प्रसार किया जा रहा है। इसके अलावा ट्रॉमा सेंटर के भवन पर लाउड स्पीकर लगाए गए हैं। जिन पर डेंगू से बचाव को लेकर लोगों से अलर्ट रहने की अपील की जा रही है। ओपीडी में बुखार, डेंगू व टाइफाइड के मरीज काफी संख्या में आ रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वह अपने घरों में पानी जमा न होने दें ताकि उसमें मच्छर का लारवा न पनपे। किसी भी बीमारी से बचाव के लिए उपचार व जागरूकता दोनों जरूरी हैं।
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