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Yamuna Nagar News: यमुना के संरक्षण और प्रवाह पर किया मंथन
Tue, 23 Jun 2026 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 23 Jun 2026 01:22 AM IST
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हथिनीकुंड बैराज पर मां यमुना के जयकारे लगाते साधु व समर्थक। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापनगर। मां यमुना को अविरल एवं निरंतर प्रवाहित करने की मांग को लेकर यमुना रक्षा दल का एक प्रतिनिधिमंडल प्रमुख संत स्वामी जय कृष्ण दास महाराज के नेतृत्व में हथिनीकुंड बैराज पहुंचा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने अजात आश्रम हथनीकुंड के महंत स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती महाराज से मुलाकात कर यमुना संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर मंथन किया।
बैठक में यमुना नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने, उसके अस्तित्व की रक्षा करने तथा संरक्षण के लिए चलाए जा रहे जनजागरण अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श किया गया। संतों ने कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और जीवन का महत्वपूर्ण आधार है। इसके संरक्षण के लिए समाज और सरकार दोनों को मिलकर गंभीर प्रयास करने होंगे।
यमुना रक्षा दल के प्रमुख संत स्वामी जय कृष्ण दास महाराज ने कहा कि मां यमुना का अविरल और निर्मल स्वरूप बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होता है तो इसका सीधा असर पर्यावरण, जैव विविधता और मानव जीवन पर पड़ता है। इसलिए यमुना को उसके मूल स्वरूप में संरक्षित रखने के लिए जनभागीदारी बढ़ाना जरूरी है।
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महंत स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती महाराज ने भी यमुना संरक्षण के लिए व्यापक जनसहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और नदी बचाओ अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देना होगा, तभी आने वाली पीढ़ियों के लिए जल स्रोतों को सुरक्षित रखा जा सकेगा। बैठक के दौरान यमुना रक्षा दल के सदस्यों ने भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा की और यमुना बचाओ आंदोलन को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लिया।
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प्रतापनगर। मां यमुना को अविरल एवं निरंतर प्रवाहित करने की मांग को लेकर यमुना रक्षा दल का एक प्रतिनिधिमंडल प्रमुख संत स्वामी जय कृष्ण दास महाराज के नेतृत्व में हथिनीकुंड बैराज पहुंचा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने अजात आश्रम हथनीकुंड के महंत स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती महाराज से मुलाकात कर यमुना संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर मंथन किया।
बैठक में यमुना नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने, उसके अस्तित्व की रक्षा करने तथा संरक्षण के लिए चलाए जा रहे जनजागरण अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श किया गया। संतों ने कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और जीवन का महत्वपूर्ण आधार है। इसके संरक्षण के लिए समाज और सरकार दोनों को मिलकर गंभीर प्रयास करने होंगे।
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यमुना रक्षा दल के प्रमुख संत स्वामी जय कृष्ण दास महाराज ने कहा कि मां यमुना का अविरल और निर्मल स्वरूप बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होता है तो इसका सीधा असर पर्यावरण, जैव विविधता और मानव जीवन पर पड़ता है। इसलिए यमुना को उसके मूल स्वरूप में संरक्षित रखने के लिए जनभागीदारी बढ़ाना जरूरी है।
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महंत स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती महाराज ने भी यमुना संरक्षण के लिए व्यापक जनसहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और नदी बचाओ अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देना होगा, तभी आने वाली पीढ़ियों के लिए जल स्रोतों को सुरक्षित रखा जा सकेगा। बैठक के दौरान यमुना रक्षा दल के सदस्यों ने भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा की और यमुना बचाओ आंदोलन को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लिया।