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Yamuna Nagar News: घटी मार्केट फीस बंद होते कारोबार को देगी संजीवनी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Oct 2023 01:16 AM IST
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Decreased market fees will give life to the closing business
लक्कड़ मंडियों में लकड़ी पर लगने वाली मार्केट फीस एक प्रतिशत कम होना मंदी से जूझ रहे प्लाईवुड उद्योग के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं होगा। मार्केट फीस व जीएसटी ने उद्योगपतियों की कमर तोड़ कर रख दी है। जिस कारण जिले में एक साल में 105 फैक्टरियां बंद हो चुकी हैं, जबकि कइयों की माली हालत ठीक नहीं है। प्लाईवुड कारोबारी लकड़ी पर लगने वाली दो प्रतिशत मार्केट फीस को पूरी तरह से खत्म करने की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने इसमें एक प्रतिशत की ही राहत दी। फिर भी सरकार के इस निर्णय से कारोबारियों को कुछ राहत जरूर मिलेगी। यमुनानगर की फैक्टरियों में तैयार प्लाई देशभर के लगभग सभी राज्यों में सप्लाई होता है।
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प्लाईवुड उद्योगपतियों का मानना है कि सरकार ने यदि मार्केट फीस कम करने का निर्णय पहले लिया होता तो 105 फैक्टरियां बंद होने से बच जाती। जिले में प्लाईवुड की 300 से अधिक यूनिट हैं। इसके अलावा 400 से अधिक पिलिंग व सॉ मिल हैं। इन प्लाईवुड यूनिट में रोजाना 7000 क्यूबिक मीटर प्लाई का उत्पादन होता है। जगाधरी के मानकपुर और यमुनानगर के मंडौली गांवों में दो लक्कड़ मंडियां हैं जहां पर रोजाना लकड़ी की खरीद होती है। पहले दोनों मंडियों में पोपलर व सफेदा लकड़ी की रोजाना करीब 400 ट्रालियां आती थी। लेकिन जब से फैक्टरियां बंद हुई हैं तब से दोनों मंडियों में लकड़ी की आवक काफी घट गई है। मंडौली मंडी में अब रोजाना औसतन 150 ट्राली आती हैं। इसी तरह करीब 100 ट्राली मानकपुर मंडी में आ रही है। कारोबारियों का कहना है कि जब से प्लाई पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगी है तब से उद्योगों को काफी नुकसान हो रहा है। जब पूरे देश में एक ही टैक्स लग रहा है तो दो प्रतिशत अलग से मार्केट फीस का कोई औचित्य नहीं है। प्रदेशभर में दो प्रतिशत मार्केट फीस के हिसाब से सरकार को हर साल 16 करोड़ रुपये जमा होते थे। अब एक प्रतिशत मार्केट फीस कम होने से कारोबारियों को 8 करोड़ रुपये की बचत होगी।
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हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के जिला प्रधान जेके बिहानी का कहना है कि एक प्रतिशत मार्केट फीस कम होने से सालभर में प्लाईवुड कारोबारियों के आठ करोड़ रुपये बचेंगे। व्यापारियों ने दो प्रतिशत फीस को पूरी तरह से खत्म करने की मांग की थी। मांग खत्म करने की थी। 100 से अधिक फैक्टरियां एक साल में बंद हो चुकी हैं। मार्केट फीस के साथ प्लाई बनाने में लगने वाले अन्य सामान के रेट भी कम करने की जरूरत है।
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