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Yamuna Nagar News: सरसों की फसल में सफेद रतुआ का खतरा
Tue, 07 Jan 2025 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 07 Jan 2025 01:22 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला/यमुनानगर। सरसों की फसल इन दिनों खेतों में लहलहा रही है। सरसों के पीले-पीले फूल हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित कर रहे हैं तापमान में लगातार हो रही गिरावट से सरसों की फसल पर सफेद रतुआ बीमारी का खतरा भी मंडरा रहा है। दक्षिण हरियाणा में कहीं-कहीं सरसों में सफेद रतुआ बीमारी के लक्षण देखे गए हैं।
ऐसे में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार की तरफ से प्रदेश के किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। जिसमें किसानों सफेद रतुआ के लक्षण और बीमारी दिखने पर इसमें किए जाने वाले दवा के छिड़काव के बारे में जानकारी दी गई है। जिले में सरसों का रकबा करीब नौ हजार एकड़ है।
एडवाइजरी में कहा गया है कि किसान सरसों की फसल में निरंतर निगरानी बनाए रखें। तापमान में गिरावट व अधिक नमी के कारण सरसों में सफेद रतुआ बीमारी आने की संभावना बनी हुई है। इस बीमारी में सरसों के पौधे में पत्ते पर गोलाकार सफेद धब्बे बन जाते हैं। यदि यह बीमारी फसल में लग जाए तो सरसों के उत्पादन पर पड़ सकता है।
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सफेद रतुआ के लक्षण दिखने पर सरसों में 600 से 800 ग्राम मैंकोजेब (डाइथेन एम-45) को 250 से 300 लीटर पानी में मिलकर छिड़काव कर सकते हैं। 15 दिन के अंतराल के बाद दवा का दो से तीन बार छिड़काव करना चाहिए। सरसों की फसल में तना गलन भी देखा जाता है। इसमें पौधे का तना गल कर टूट जाता है।
पौधे के बीच में सफेद रंग का फंफूद सा दिखने लगता है। तना गलन से सरसों को बचाने के लिए बिजाई के 45-50 दिन बाद कार्बेन्डाजिम का 0.1 प्रतिशत (1 ग्राम दवाई प्रति लीटर) की दर से पहला छिड़काव करना चाहिए। दूसरा छिड़काव 65-70 दिन बाद कार्बेन्डाजिम का 0.1 प्रतिशत की दर से करना चाहिए। तना गलन की रोकथाम के लिए दो छिड़काव जरूरी हैं।
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अंबाला/यमुनानगर। सरसों की फसल इन दिनों खेतों में लहलहा रही है। सरसों के पीले-पीले फूल हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित कर रहे हैं तापमान में लगातार हो रही गिरावट से सरसों की फसल पर सफेद रतुआ बीमारी का खतरा भी मंडरा रहा है। दक्षिण हरियाणा में कहीं-कहीं सरसों में सफेद रतुआ बीमारी के लक्षण देखे गए हैं।
ऐसे में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार की तरफ से प्रदेश के किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। जिसमें किसानों सफेद रतुआ के लक्षण और बीमारी दिखने पर इसमें किए जाने वाले दवा के छिड़काव के बारे में जानकारी दी गई है। जिले में सरसों का रकबा करीब नौ हजार एकड़ है।
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एडवाइजरी में कहा गया है कि किसान सरसों की फसल में निरंतर निगरानी बनाए रखें। तापमान में गिरावट व अधिक नमी के कारण सरसों में सफेद रतुआ बीमारी आने की संभावना बनी हुई है। इस बीमारी में सरसों के पौधे में पत्ते पर गोलाकार सफेद धब्बे बन जाते हैं। यदि यह बीमारी फसल में लग जाए तो सरसों के उत्पादन पर पड़ सकता है।
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सफेद रतुआ के लक्षण दिखने पर सरसों में 600 से 800 ग्राम मैंकोजेब (डाइथेन एम-45) को 250 से 300 लीटर पानी में मिलकर छिड़काव कर सकते हैं। 15 दिन के अंतराल के बाद दवा का दो से तीन बार छिड़काव करना चाहिए। सरसों की फसल में तना गलन भी देखा जाता है। इसमें पौधे का तना गल कर टूट जाता है।
पौधे के बीच में सफेद रंग का फंफूद सा दिखने लगता है। तना गलन से सरसों को बचाने के लिए बिजाई के 45-50 दिन बाद कार्बेन्डाजिम का 0.1 प्रतिशत (1 ग्राम दवाई प्रति लीटर) की दर से पहला छिड़काव करना चाहिए। दूसरा छिड़काव 65-70 दिन बाद कार्बेन्डाजिम का 0.1 प्रतिशत की दर से करना चाहिए। तना गलन की रोकथाम के लिए दो छिड़काव जरूरी हैं।