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नोटबंदी में नहीं दे पा रहे लोन की किश्त, फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारी कर रहे तंग
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
Updated Wed, 07 Dec 2016 10:52 PM IST
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खंड बिलासपुर के विभिन्न गांवों की दर्जनों महिलाओं ने प्राइवेट फाइनेंस कंपनियों से तंग आकर बुधवार को बिलासपुर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। एसडीएम के कार्यालय में न होने पर कार्यालय के सुपरीटेडेंट कन्हैया गोयल ने मांगपत्र लिया। महिला पूजा, सत्या, पिंकी, सीमा, सुमन, जसवींद्र कौर, हरजीत कौर, कर्मजीत, गुरमीत, सलोचना, सरोज ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि बिलासपुर खंड के गांवों में आधा दर्जन के करीब प्राइवेट फाइनेंस कंपनियों ने अपने कारोबार चला रखे हैं। यह कंपनियां ग्रामीण महिलाओं के ग्रुप बनाकर उन्हें मासिक किश्तों पर लोन देती है। यह कारोबार पिछले कई वर्षों से कस्बों व देहात में खूब फल-फूल रहा है। महिलाओं ने बताया कि उन्होंने बिलासपुर स्थित अलग अलग कंपनियों से मासिक किश्त पर लोन लिया हुआ है। वह हर माह मेहनत मजदूरी कर किश्तें दे रही थी। नोटबंदी के बाद से कंपनी वाले एक हजार और पांच सौ के नोट लेने से मना करते हैं। उनके परिवार मेहनत मजदूरी कर जो रुपये कमाते हैं, उन्हीं से रुपये निकाल वह किश्त अदा करती आ रही है। कंपनियों के कर्मचारी उनसे किश्त लेने के लिए गांवों में उनके घरों में आ रहे हैं और नए नोट नहीं देने पर सरेआम उनका अपमान करते हैं। महिलाओं ने कहा कि मंगलवार को भी मियापुर गांव में कंपनी के कर्मचारियों ने एक महिला को किश्त नहीं देने पर अपमानित किया और वह बेहोश हो गई। महिलाओं का कहना है कि उनके पास कंपनी की किश्त देने के लिए रुपये नहीं है। कंपनी ने उनको दी रकम पर भारी ब्याज लगा रखा है, जिसे देने वह असमर्थ हैं। महिलाओं ने एसडीएम के माध्यम से डीसी से गुहार लगाई कि उनकी किश्तें माफ कराई जाए और उन्हें कंपनियों के चुंगल से निकलवाया जाए।
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