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लापरवाही में मरीज की मौत, परिजनों को मिलेगा एक लाख रुपये मुआवजा
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
Updated Fri, 02 Dec 2016 12:12 AM IST
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लापरवाही से मरीज की मौत के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम ने मृतक के कानूनी वारिसों को एक लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए है। ये मुआवजा छह प्रतिशत ब्याज के साथ देना होगा। इसके अलावा दस हजार रुपये कानूनी खर्च के भी देने होंगे। ये मुआवजा डाक्टर की इंश्योरेंस कंपनी को देना होगा।
नालागढ़ माजरी निवासी मेहर चंद को गॉल ब्लाडर में पत्थरी थी। मेहर चंद ने 21 जुलाई 2009 बस स्टैंड जगाधरी के पास स्थित रामेश्वर दास मेमोरियल हॉस्पिटल में डा. प्रवीण से संपर्क किया। जिसके बाद वह पत्थरी के आप्रेशन के लिए भर्ती हुआ और छह हजार रुपये जमा करवा दिए। यहां पर डा. राजीव ने उनका पत्थरी का ऑप्रेशन किया और बताया कि आप्रेशन ठीक हुआ है। आप्रेशन के बाद मरीज से नौ हजार रुपये और जमा करवा दिए गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। मगर 30 जुलाई 2009 को मेहर चंद को ठीक महसूस नहीं हुआ। उनके पेट में दर्द हुआ और वह कुछ खा-पी भी नहीं पा रहे थे। परिजनों की सलाह पर मेहर ने पीजीआई चंडीगढ़ में संपर्क किया। जिसके बाद परिजन 11 अगस्त को उसे पीजीआई चंडीगढ़ मेें ले गए। तीन सितंबर को पीजीआई में मेहर चंद को भर्ती किया गया और यहां दस दिन उनका इलाज चला। जिस पर उनका करीब सवा लाख रुपये खर्च आया और मरीज को मानसिक व शारीरिक परेशानी भी उठानी पड़ी। इसी दौरान मेहर चंद के परिजनों को पता चला कि पत्थरी का ऑप्रेशन करने वाले डाक्टर ने लापरवाही की है, जिसकी वजह से उन्हें परेशानी हो रही है। ऐसे में अप्रैल 2010 में मेहर चंद ने दोनों डाक्टर व इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में याचिका दायर की। इस दौरान शिकायतकर्ता की मौत हो गई, जिसके बाद उसकी पत्नी कृष्णा देवी व बेटे विनोद कुमार व रिंकु कुमार पेश हुए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद फोरम के अध्यक्ष अशोक कुमार गर्ग तथा सदस्य एससी शर्मा ने इलाज करने वाले डा. राजीव को लापरवाही का जिम्मेदार माना और उपरोक्त निर्णय सुनाया।
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नालागढ़ माजरी निवासी मेहर चंद को गॉल ब्लाडर में पत्थरी थी। मेहर चंद ने 21 जुलाई 2009 बस स्टैंड जगाधरी के पास स्थित रामेश्वर दास मेमोरियल हॉस्पिटल में डा. प्रवीण से संपर्क किया। जिसके बाद वह पत्थरी के आप्रेशन के लिए भर्ती हुआ और छह हजार रुपये जमा करवा दिए। यहां पर डा. राजीव ने उनका पत्थरी का ऑप्रेशन किया और बताया कि आप्रेशन ठीक हुआ है। आप्रेशन के बाद मरीज से नौ हजार रुपये और जमा करवा दिए गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। मगर 30 जुलाई 2009 को मेहर चंद को ठीक महसूस नहीं हुआ। उनके पेट में दर्द हुआ और वह कुछ खा-पी भी नहीं पा रहे थे। परिजनों की सलाह पर मेहर ने पीजीआई चंडीगढ़ में संपर्क किया। जिसके बाद परिजन 11 अगस्त को उसे पीजीआई चंडीगढ़ मेें ले गए। तीन सितंबर को पीजीआई में मेहर चंद को भर्ती किया गया और यहां दस दिन उनका इलाज चला। जिस पर उनका करीब सवा लाख रुपये खर्च आया और मरीज को मानसिक व शारीरिक परेशानी भी उठानी पड़ी। इसी दौरान मेहर चंद के परिजनों को पता चला कि पत्थरी का ऑप्रेशन करने वाले डाक्टर ने लापरवाही की है, जिसकी वजह से उन्हें परेशानी हो रही है। ऐसे में अप्रैल 2010 में मेहर चंद ने दोनों डाक्टर व इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में याचिका दायर की। इस दौरान शिकायतकर्ता की मौत हो गई, जिसके बाद उसकी पत्नी कृष्णा देवी व बेटे विनोद कुमार व रिंकु कुमार पेश हुए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद फोरम के अध्यक्ष अशोक कुमार गर्ग तथा सदस्य एससी शर्मा ने इलाज करने वाले डा. राजीव को लापरवाही का जिम्मेदार माना और उपरोक्त निर्णय सुनाया।
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