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जंगल से तस्कर काट रहे थे खैर के बेशकीमती पेड़, वन विभाग की टीम पहुंची तो चार लाख की लकड़ी छोड़ हुए फरार

Wed, 13 Feb 2019 10:47 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 13 Feb 2019 10:47 PM IST
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जंगल से तस्कर काट रहे थे खैर के बेशकीमती पेड़, वन विभाग की टीम पहुंची तो चार लाख की लकड़ी छोड़ हुए फरार
जंगल से तस्कर काट रहे थे खैर के बेशकीमती पेड़, वन विभाग की टीम पहुंची तो चार लाख की लकड़ी छोड़ हुए फरार
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लंबे समय से चल रहा है तस्करी का खेल, ग्रामीणों का पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप
पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिकती है खैर की लकड़ी

छछरौली
शिवालिक की पहाड़ियों के जंगल में वन माफिया की नजर खैर के बेशकीमती पेड़ों पर है। भूलखेड़ी गांव के पास खैर के 14 दुर्लभ पेड़ काटे जाने का मामला सामने आने से वन विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ गई है। प्राचीन वृक्षों की कटाई की सूचना मिलने पर वन विभाग के अधिकारियों ने बताएं स्थान पर छापा मारा तो माफिया के कारिंदे मौके पर लकड़ियों को छोड़कर फरार हो गए। अधिकारियों को जंगल से 14 पेड़ कटे हुए मिले और इनकी करीब 80 क्विंटल बेशकीमती लकड़ी बरामद हुई है। इनकी कीमत चार से पांच लाख रुपये बताई गई है। वन रेंज अधिकारी ने छछरौली थाना पुलिस में पांच लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवाई गई।
जगाधरी रेंज अधिकारी रामपाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि भूलखेड़ी के जंगल में खैर के प्रतिबंधित पेड़ काटे जाने की सूचना मिली थी। सूचना मिलने पर टीम के साथ मौके पर पहुंचे तो वहां 14 पेड़ कटे हुए मिले।
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आरोपियों की पहचान हुई
वन विभाग के कर्मचारियों की टीम द्वारा मामले की जांच की गई तो पता चला कि खैर के इन बेशकीमती पेड़ों को चूहड़पुर निवासी इस्लाम, मंगल सिंह, शहजादवाला निवासी राजू, चिकन निवासी ईलमू, जाटावाला निवासी दाऊद और भगवानपुर निवासी नवाब का इस मामले में संलिप्त होना पाया गया। पुलिस ने पांचों आरोपियों को नामजद करते हुए पेड़ चोरी करने का मामला दर्ज किया है।
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लंबे समय से चल रहा है खेल
जंगलों से खैर के पेड़ों की कटाई पर पूर्णत रोक है, लेकिन जिले में इनकी कटाई और तस्करी कई सालों से चल रही है। आसपास के गांवों वालों का आरोप है कि इस गोरखधंधे में पुलिस और वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की भी मिलीभगत है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अक्सर अधिकारियों की आंखों के सामने से आरोपी फरार हो जाते हैं। पेड़ कटने के बाद या गाड़ी में लकड़ी को ले जाते समय ही वन विभाग को इसकी खबर लगती है।
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अधिकारियों पर हो चुके हैं जानलेवा हमले
-खैर तस्करी के मामले में कई बार कर्मचारियों पर जानलेवा हमले भी हो चुके हैं। खैर तस्करों के हौसले इतने बुलंद है कि वह सड़क पर की गई नाकाबंदी को भी तोड़ते हुए निकल जाते हैं। अधिकारियों ने खैर तस्करों पर हत्या के प्रयास के मामले भी दर्ज करवाएं हैं, लेकिन न कटाई रुक रही और न ही तस्करी।
वर्जन
वन रेंज अधिकारी रामपाल की शिकायत पर पांच लोगों के खिलाफ जंगल से खैर की लकड़ी चोरी करने का मामला दर्ज किया। आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीम गठित कर दी गई है जल्द ही आरोपियों को पकड़ कर कोर्ट में पेश कर दिया जाएगा।

कमलजीत, थाना छछरौली प्रभारी

करीब चार लाख रुपये की लकड़ी बरामद की है। खैर की बेशकीमती लकड़ी से कथा बनाया जाता है। बाजार में खैर की लकड़ी का रेट पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल से भी ज्यादा है। जोकि दिल्ली स्थित फैक्ट्रियों में पहुंचाया जाता है।
रामपाल, वन रेंज अधिकारी
फोटो नंबर 25
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