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ब्याज पर 1.60 लाख रुपये देकर लिए चार लाख, आठ पेज का सुसाइड नोट लिखकर दुकानदार ने जहरीला पदार्थ निगल दी जान
Updated Thu, 09 Aug 2018 01:08 AM IST
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ब्याज पर 1.60 लाख रुपये देकर लिए चार लाख, आठ पेज का सुसाइड नोट लिखकर दुकानदार ने दी जान
ब्याज पर 1.60 लाख रुपये देकर लिए चार लाख, आठ पेज का सुसाइड नोट लिखकर दुकानदार ने जहरीला पदार्थ निगल दी जान
- पैसे देने के लिए मकान की रजिस्ट्री भी गिरवी रखी, चार लाख देने के बाद भी ब्याज की पैसे मांग रहे थे आरोपी
- सुसाइड नोट में दो फाइनेंसरों को ठहराया अपनी मौत का जिम्मेवार
- करीब दो साल पहले एक फाइनेंसर से दुकानदार ने ब्याज पर लिए थे 1.60 लाख
- कैंप की घटना, पुलिस ने दोनों आरापियों पर किया आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। कैंप की शर्मा कॉलोनी में दो फाइनेंसरों से परेशान होकर दुकानदार सुंदर शाम ने बुधवार अलसुबह चार बजे सल्फास निगलकर जान दे दी। सल्फास खाने पर तबीयत खराब होने पर मृतक ने अपने बेटे व पत्नी को कहा कि वह जम्मू कॉलोनी निवासी आसू व कैंप निवासी मोहित से परेशान है। उनकी वजह से ही सुसाइड कर रहा हूं। अभी उसके पास टाइम नहीं। सारी बात उसने नोट में लिखी है। जो दुकान के गल्ले में रखा है। इसके बाद दुकानदार अचेत हो गया। परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित किया। सुसाइड नोट में दुकानदार ने दो अवैध फाइनेंसरों पर 1.60 रुपये के बदले चार लाख रुपये लेकर भी फिर से ब्याज के पैसे मांगने और दबाव देकर मकान की रजिस्ट्री व बयाना अपने नाम करने की बात कहीं है। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में केस दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
बॉक्स
दुकान में सामान रखने के लिए ब्याज पर लिए थे 1.60 लाख :
मृतक के बेटे शिवम ने बताया कि उसके पिता सुंदर शाम (53) की घर के पास ही क्रॉकरी की दुकान है। करीब दो साल पहले उसके पिता ने जम्मू कॉलोनी बी निवासी आसू से दुकान में सामान रखने के लिए दस हजार रुपये प्रतिमाह ब्याज पर 1.60 लाख रुपये लिए थे। उसके पिता समय समय पर आरोपी को पैसे देता रहा। लेकिन आरोपी आसू ने दिन बढने के साथ ब्याज की रकम भी बढ़ानी शुरू कर दी। अब तक आरोपी उसके पिता से चार-पांच लाख रुपये ले लिए। इसके बाद भी और पैसे मांग रहा था। यहां तक कि आरोपी ने उनके मकान की रजिस्ट्री भी अपने पास रखी हुई है।
बॉक्स
आठ पेज के सुसाइड नोट में ये लिखा :
मैं सुंदर शाम शर्मा कॉलोनी निवासी। मैने आज से लगभग 7-8 साल पहले जम्मू कॉलोनी निवासी आसू जो कि कमेटियां और फाइनेंस का काम करता हैं। इसने कहा कि वीर जी मेरे पैसे कोई आपका जानकार हो तो पैसे ब्याज ब्याज पर लगवा दिया करो। फिर मैं आसू से पैसे लेकर ब्याज पर देता रहा। आसू को ब्याज समय पर मिलती रही। मैने आसू से करते करते 1.60 लाख रुपये ले लिए। इसका मैं समय पर दस हजार रुपये प्रति माह की ब्याज देता रहा। कमेटियां भी खत्म करते करते नोट बंदी में इसने मेरे अकाउंट में 90 हजार रुपये जमा किए। मैं ही इसे पोस्ट ऑफिस से निकलवा कर वापस देता रहा। मैने 11 नवंबर 2016 को 20 हजार, 12 नवंबर को 40 हजार व 13 नवंबर को 20 हजार रुपये निकलवाकर उसे वापस किए। लेकिन इसने मेरे ऊपर दबाव बनाकर मेरे से 90 हजार और लिए। मैने अपने साले साहब अनिल कुमार जो कि हमीदा में रहता है। उससे एक लाख रुपये लेकर दिया। फिर अंत में सारा पैसा कहता है कि वीर जी मेरे पैसों का इंतजाम करो। मैने कहा आसू वीर जी पैसे और भी है क्या। मुझे कहता है आपको पता नहीं, मेरे सारे पैसे लगभग 3.80 लाख रुपये है। मैने कहा कैसे। कुछ नहीं बताया। दबाव बनाता रहा कि मैने पूछने का यतन किया। नहीं बताया। मेरे से कभी, कहता है वीर जी ब्याज इस महीने 18.500 रुपये है, अगले महीने 21 हजार रुपये है। मैने कहा मार्च, अप्रैल, मई की ब्याज दस हजार प्रति माह के हिसाब से ही है और अब मेरे पास पैसे नहीं है। ब्याज नहीं दे सकता और मुझे तंग करते है। जनवरी, फरवरी से अब तक इसने मुझे बहुत परेशान किया। कहता है कि वीर जी मेरे चार लाख रुपये हो गए है। ब्याज कैसे दोगे। सारी ब्याज कुल मिलकर 20 हजार प्रति महीना देनी पड़ेगी। मैने कहा कि आसू वीर मैं कोई न कोई इंतजाम करता हूं। इंतजाम नहीं हुआ तो परेशान करने लगा। सुबह शाम मेरा जीना मुश्किल हो गया। इधर, काम दुकान पर कम हो गया। इधर आसू ने परेशान करना शुरू किया। मैने कहा आसू वीर जी मेरे पास मेरे मकान की रजिस्ट्री है। जो कि मेरे पिता ने हमारे नाम अपनी वसीयत बनवाकर हमारे दोनों भाईयों के नाम किया था। मैने आसू से कहा कि मेरी रजिस्ट्री कही रखकर पैसे का इंतजाम कर दो। आप अपने डेढ़ लाख रख लेता बाकी के मुझे दे देना। आसू ने कहा कि वीर जी ठीक है। मैने जनवरी के अंत में रजिस्ट्री और अपनी वसीयत आसू को दे दी। 15-20 दिन बीत गए, मैने कहा कि वीर जी पैसों का इंतजाम हुआ या नहीं, मैने भी अपनी दुकान ठीक करवानी है। सारा माल खत्म है। कुछ पैसे जली मिल जाए तो दुकान का कार्य ठीक हो जाएगा। मैने अपनी दुकान का माल लेने गया था। फरवरी की 26/27 तारीख को आसू का फोन आया कि मैने आपको रजिस्ट्री किसी को दिखाकर रजिस्ट्री ओके है। मैने चार लाख ले लिया है। लेकिन आसू अपने साथी मोहित के साथ मिलकर उससे और पैसे मांगने लगा। मोहित व आसू दोनों मिले हुए है। आज सुबह 11.55 पर घर आ गए और धमकाने लगे। इसके बाद दोनों ने उसे धमकाते हुए ब्याना लिखा और उसपर उसके हस्ताक्षर लिए। अब मैने आसू का कोई पैसा नहीं देना है। आसू ने मुझसे इतना ब्याज खा लिया है कि मुझे इसने काम करने लायक नहीं छोड़ा और अब दुकान के पीछे पड़ा है। आसू को 1.60 लाख के बदले चार लाख रुपये दे दिए। मुझे कहा कि अब चार लाख की ब्याज आप ने देनी है। बस क्या बताऊ मुझे तो मरने पर मजबूर कर दिया। मैं जा रहा हूं, आसू की वजह से। यह हैवान है।
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बॉक्स
सुसाइड नोट में दो पेज रफ, पेज कम पड़ने पर डाकघर की पर्ची पर भी लिखी अपनी बात :
आठ पेज के सुसाइड नोट में दो पेज रफ हैं, इनमें दुकानदार ने सुसाइड नोट लिखने की शुरुआत की। अनुमान लगाया जा रहा है कि मृतक ने सुसाइड नोट एक ही समय में नहीं, बल्कि काफी समय में लिखा है। पेज कम पड़ने पर मृतक ने डाकघर बचत बैंक से नकदी निकलवाने की पर्ची पर भी अपनी बात लिखी। वहीं कुछ पेज की साइड में भी आरोपियों की प्रताड़ना की अपनी दास्तान बताई।
वर्जन
कैंप की शर्मा कॉलोनी में दुकानदार के सुसाइड करने की सूचना पर पुलिस मौके पर गई थी। मृतक के पास से आठ पेज का सुसाइड नोट बरामद कर लिया गया है। सुसाइड नोट में आसू व मोहित नाम के दो फाइनेंसरों पर आरोप लगाया है। मृतक की पत्नी सुनीता की शिकायत पर दोनों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्जकर लिया गया है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
- एएसआई अनिल कुमार, इंचार्ज, गांधी नगर चौकी फर्कपुर।
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ब्याज पर 1.60 लाख रुपये देकर लिए चार लाख, आठ पेज का सुसाइड नोट लिखकर दुकानदार ने जहरीला पदार्थ निगल दी जान
- पैसे देने के लिए मकान की रजिस्ट्री भी गिरवी रखी, चार लाख देने के बाद भी ब्याज की पैसे मांग रहे थे आरोपी
- सुसाइड नोट में दो फाइनेंसरों को ठहराया अपनी मौत का जिम्मेवार
- करीब दो साल पहले एक फाइनेंसर से दुकानदार ने ब्याज पर लिए थे 1.60 लाख
- कैंप की घटना, पुलिस ने दोनों आरापियों पर किया आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। कैंप की शर्मा कॉलोनी में दो फाइनेंसरों से परेशान होकर दुकानदार सुंदर शाम ने बुधवार अलसुबह चार बजे सल्फास निगलकर जान दे दी। सल्फास खाने पर तबीयत खराब होने पर मृतक ने अपने बेटे व पत्नी को कहा कि वह जम्मू कॉलोनी निवासी आसू व कैंप निवासी मोहित से परेशान है। उनकी वजह से ही सुसाइड कर रहा हूं। अभी उसके पास टाइम नहीं। सारी बात उसने नोट में लिखी है। जो दुकान के गल्ले में रखा है। इसके बाद दुकानदार अचेत हो गया। परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित किया। सुसाइड नोट में दुकानदार ने दो अवैध फाइनेंसरों पर 1.60 रुपये के बदले चार लाख रुपये लेकर भी फिर से ब्याज के पैसे मांगने और दबाव देकर मकान की रजिस्ट्री व बयाना अपने नाम करने की बात कहीं है। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में केस दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
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दुकान में सामान रखने के लिए ब्याज पर लिए थे 1.60 लाख :
मृतक के बेटे शिवम ने बताया कि उसके पिता सुंदर शाम (53) की घर के पास ही क्रॉकरी की दुकान है। करीब दो साल पहले उसके पिता ने जम्मू कॉलोनी बी निवासी आसू से दुकान में सामान रखने के लिए दस हजार रुपये प्रतिमाह ब्याज पर 1.60 लाख रुपये लिए थे। उसके पिता समय समय पर आरोपी को पैसे देता रहा। लेकिन आरोपी आसू ने दिन बढने के साथ ब्याज की रकम भी बढ़ानी शुरू कर दी। अब तक आरोपी उसके पिता से चार-पांच लाख रुपये ले लिए। इसके बाद भी और पैसे मांग रहा था। यहां तक कि आरोपी ने उनके मकान की रजिस्ट्री भी अपने पास रखी हुई है।
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आठ पेज के सुसाइड नोट में ये लिखा :
मैं सुंदर शाम शर्मा कॉलोनी निवासी। मैने आज से लगभग 7-8 साल पहले जम्मू कॉलोनी निवासी आसू जो कि कमेटियां और फाइनेंस का काम करता हैं। इसने कहा कि वीर जी मेरे पैसे कोई आपका जानकार हो तो पैसे ब्याज ब्याज पर लगवा दिया करो। फिर मैं आसू से पैसे लेकर ब्याज पर देता रहा। आसू को ब्याज समय पर मिलती रही। मैने आसू से करते करते 1.60 लाख रुपये ले लिए। इसका मैं समय पर दस हजार रुपये प्रति माह की ब्याज देता रहा। कमेटियां भी खत्म करते करते नोट बंदी में इसने मेरे अकाउंट में 90 हजार रुपये जमा किए। मैं ही इसे पोस्ट ऑफिस से निकलवा कर वापस देता रहा। मैने 11 नवंबर 2016 को 20 हजार, 12 नवंबर को 40 हजार व 13 नवंबर को 20 हजार रुपये निकलवाकर उसे वापस किए। लेकिन इसने मेरे ऊपर दबाव बनाकर मेरे से 90 हजार और लिए। मैने अपने साले साहब अनिल कुमार जो कि हमीदा में रहता है। उससे एक लाख रुपये लेकर दिया। फिर अंत में सारा पैसा कहता है कि वीर जी मेरे पैसों का इंतजाम करो। मैने कहा आसू वीर जी पैसे और भी है क्या। मुझे कहता है आपको पता नहीं, मेरे सारे पैसे लगभग 3.80 लाख रुपये है। मैने कहा कैसे। कुछ नहीं बताया। दबाव बनाता रहा कि मैने पूछने का यतन किया। नहीं बताया। मेरे से कभी, कहता है वीर जी ब्याज इस महीने 18.500 रुपये है, अगले महीने 21 हजार रुपये है। मैने कहा मार्च, अप्रैल, मई की ब्याज दस हजार प्रति माह के हिसाब से ही है और अब मेरे पास पैसे नहीं है। ब्याज नहीं दे सकता और मुझे तंग करते है। जनवरी, फरवरी से अब तक इसने मुझे बहुत परेशान किया। कहता है कि वीर जी मेरे चार लाख रुपये हो गए है। ब्याज कैसे दोगे। सारी ब्याज कुल मिलकर 20 हजार प्रति महीना देनी पड़ेगी। मैने कहा कि आसू वीर मैं कोई न कोई इंतजाम करता हूं। इंतजाम नहीं हुआ तो परेशान करने लगा। सुबह शाम मेरा जीना मुश्किल हो गया। इधर, काम दुकान पर कम हो गया। इधर आसू ने परेशान करना शुरू किया। मैने कहा आसू वीर जी मेरे पास मेरे मकान की रजिस्ट्री है। जो कि मेरे पिता ने हमारे नाम अपनी वसीयत बनवाकर हमारे दोनों भाईयों के नाम किया था। मैने आसू से कहा कि मेरी रजिस्ट्री कही रखकर पैसे का इंतजाम कर दो। आप अपने डेढ़ लाख रख लेता बाकी के मुझे दे देना। आसू ने कहा कि वीर जी ठीक है। मैने जनवरी के अंत में रजिस्ट्री और अपनी वसीयत आसू को दे दी। 15-20 दिन बीत गए, मैने कहा कि वीर जी पैसों का इंतजाम हुआ या नहीं, मैने भी अपनी दुकान ठीक करवानी है। सारा माल खत्म है। कुछ पैसे जली मिल जाए तो दुकान का कार्य ठीक हो जाएगा। मैने अपनी दुकान का माल लेने गया था। फरवरी की 26/27 तारीख को आसू का फोन आया कि मैने आपको रजिस्ट्री किसी को दिखाकर रजिस्ट्री ओके है। मैने चार लाख ले लिया है। लेकिन आसू अपने साथी मोहित के साथ मिलकर उससे और पैसे मांगने लगा। मोहित व आसू दोनों मिले हुए है। आज सुबह 11.55 पर घर आ गए और धमकाने लगे। इसके बाद दोनों ने उसे धमकाते हुए ब्याना लिखा और उसपर उसके हस्ताक्षर लिए। अब मैने आसू का कोई पैसा नहीं देना है। आसू ने मुझसे इतना ब्याज खा लिया है कि मुझे इसने काम करने लायक नहीं छोड़ा और अब दुकान के पीछे पड़ा है। आसू को 1.60 लाख के बदले चार लाख रुपये दे दिए। मुझे कहा कि अब चार लाख की ब्याज आप ने देनी है। बस क्या बताऊ मुझे तो मरने पर मजबूर कर दिया। मैं जा रहा हूं, आसू की वजह से। यह हैवान है।
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सुसाइड नोट में दो पेज रफ, पेज कम पड़ने पर डाकघर की पर्ची पर भी लिखी अपनी बात :
आठ पेज के सुसाइड नोट में दो पेज रफ हैं, इनमें दुकानदार ने सुसाइड नोट लिखने की शुरुआत की। अनुमान लगाया जा रहा है कि मृतक ने सुसाइड नोट एक ही समय में नहीं, बल्कि काफी समय में लिखा है। पेज कम पड़ने पर मृतक ने डाकघर बचत बैंक से नकदी निकलवाने की पर्ची पर भी अपनी बात लिखी। वहीं कुछ पेज की साइड में भी आरोपियों की प्रताड़ना की अपनी दास्तान बताई।
वर्जन
कैंप की शर्मा कॉलोनी में दुकानदार के सुसाइड करने की सूचना पर पुलिस मौके पर गई थी। मृतक के पास से आठ पेज का सुसाइड नोट बरामद कर लिया गया है। सुसाइड नोट में आसू व मोहित नाम के दो फाइनेंसरों पर आरोप लगाया है। मृतक की पत्नी सुनीता की शिकायत पर दोनों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्जकर लिया गया है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
- एएसआई अनिल कुमार, इंचार्ज, गांधी नगर चौकी फर्कपुर।