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एमबीए छात्र के साथ धोखा करने पर चैरिटेबल ट्रस्ट के संचालक को उपभोक्ता फोरम ने लताड़ा, नौ प्रतिशत ब्याज के साथ ली गई फीस देने के
Updated Thu, 28 Jun 2018 12:20 AM IST
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चैरिटेबल ट्रस्ट के संचालक को ब्याज के साथ फीस वापस करने के निर्देश
-उपभोक्ता फोरम ने जारी किया निर्देश, एमबीए छात्र के साथ धोखा किया था ट्रस्ट ने
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जिला उपभोक्ता फोरम ने राजस्थान स्थित श्रीधर विश्वविद्यालय के नाम पर एमबीए छात्र के साथ धोखा करने मामले को लेकर पीड़ित छात्र के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है। फोरम अध्यक्ष सतपाल व सदस्य डा. जवाहर लाल गुप्ता की बेंच ने कमानी चौक स्थित चूड़ेश्वर चैरिटेबल ट्रस्ट के संचालक अजय खन्ना को निर्देश दिया कि वह पीड़ित छात्र को नौ फीसदी ब्याज से साथ पूरी रकम वापस करें। बता दे कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिवर्सिटी को भी पार्टी बनाया गया था।
फोरम बेंच ने अपना निर्णय देते हुए कहा कि संचालक के स्तर पर गलती हुई है। इसलिए फोरम संचालक को आदेश देता है कि वह पीड़ित छात्र को बकाया रकम के तौर पर 45000 रुपये की राशि 9 फीसदी ब्याज के साथ लौटाए। इसके अतिरिक्त कानूनी खर्चे और मानसिक परेशानी के लिए मुआवजे के तौर पर 25000 रुपये अतिरिक्त अदा करें।
ये था मामला: धौला कुआं, पौंटा साहब निवासी गुलाब सिंह ने फोरम को दी शिकायत में बताया था कि ट्रस्ट द्वारा वर्ष 2012 में पौंटा साहब में एक विज्ञापन व पेम्फलेट के माध्यम प्रचार कराया गया था कि उनके संस्थान में दो वर्ष का एमबीए कोर्स कराया जाता है। यह कोर्स राजस्थान की श्रीधर यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त है और इसकी फीस प्रति सेमेस्टर 25000 रुपये है. ऐसे में उसने विज्ञापन पर भरोसा करके संचालक से बात की। संचालक ने फीस की बात को दोहराते हुए डिग्री मिलने के दौरान 10000 रुपये अतिरिक्त फीस की बात की। पीड़ित गुलाब सिंह को एमबीए करनी थी इसलिए उसने हर समेस्टर के लिए निर्धारित फीस 25000 रुपये जमा करा दिए। लेकिन संचालक द्वारा कभी भी रसीद नहीं दी गई। जब ज्यादा जोर दिया गया तो संचालक ने मात्र 45000 रुपये की ही रसीद बनाकर दी। किसी तरह उसे डिग्री मिल गई। डिग्री को लेकर जब नौकरी के लिए इंटरव्यू देने गया तो पता चला की उसकी डिग्री फर्जी है। डिग्री की जांच के लिए शिकायतकर्ता ने श्रीधर यूनिवर्सिटी में एक आरटीआई लगाई जिसके माध्यम से पता चला की उसकी डिग्री श्रीधर यूनिवर्सिटी से बनी ही नहीं है। ऐसे में उसने ट्रस्ट संचालक से बात की तो उसने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। ऐसे में छात्र गुलाब ने परेशान होकर उपभोक्ता फोरम की शरण ली।
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-उपभोक्ता फोरम ने जारी किया निर्देश, एमबीए छात्र के साथ धोखा किया था ट्रस्ट ने
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जिला उपभोक्ता फोरम ने राजस्थान स्थित श्रीधर विश्वविद्यालय के नाम पर एमबीए छात्र के साथ धोखा करने मामले को लेकर पीड़ित छात्र के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है। फोरम अध्यक्ष सतपाल व सदस्य डा. जवाहर लाल गुप्ता की बेंच ने कमानी चौक स्थित चूड़ेश्वर चैरिटेबल ट्रस्ट के संचालक अजय खन्ना को निर्देश दिया कि वह पीड़ित छात्र को नौ फीसदी ब्याज से साथ पूरी रकम वापस करें। बता दे कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिवर्सिटी को भी पार्टी बनाया गया था।
फोरम बेंच ने अपना निर्णय देते हुए कहा कि संचालक के स्तर पर गलती हुई है। इसलिए फोरम संचालक को आदेश देता है कि वह पीड़ित छात्र को बकाया रकम के तौर पर 45000 रुपये की राशि 9 फीसदी ब्याज के साथ लौटाए। इसके अतिरिक्त कानूनी खर्चे और मानसिक परेशानी के लिए मुआवजे के तौर पर 25000 रुपये अतिरिक्त अदा करें।
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ये था मामला: धौला कुआं, पौंटा साहब निवासी गुलाब सिंह ने फोरम को दी शिकायत में बताया था कि ट्रस्ट द्वारा वर्ष 2012 में पौंटा साहब में एक विज्ञापन व पेम्फलेट के माध्यम प्रचार कराया गया था कि उनके संस्थान में दो वर्ष का एमबीए कोर्स कराया जाता है। यह कोर्स राजस्थान की श्रीधर यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त है और इसकी फीस प्रति सेमेस्टर 25000 रुपये है. ऐसे में उसने विज्ञापन पर भरोसा करके संचालक से बात की। संचालक ने फीस की बात को दोहराते हुए डिग्री मिलने के दौरान 10000 रुपये अतिरिक्त फीस की बात की। पीड़ित गुलाब सिंह को एमबीए करनी थी इसलिए उसने हर समेस्टर के लिए निर्धारित फीस 25000 रुपये जमा करा दिए। लेकिन संचालक द्वारा कभी भी रसीद नहीं दी गई। जब ज्यादा जोर दिया गया तो संचालक ने मात्र 45000 रुपये की ही रसीद बनाकर दी। किसी तरह उसे डिग्री मिल गई। डिग्री को लेकर जब नौकरी के लिए इंटरव्यू देने गया तो पता चला की उसकी डिग्री फर्जी है। डिग्री की जांच के लिए शिकायतकर्ता ने श्रीधर यूनिवर्सिटी में एक आरटीआई लगाई जिसके माध्यम से पता चला की उसकी डिग्री श्रीधर यूनिवर्सिटी से बनी ही नहीं है। ऐसे में उसने ट्रस्ट संचालक से बात की तो उसने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। ऐसे में छात्र गुलाब ने परेशान होकर उपभोक्ता फोरम की शरण ली।
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